Fertilizers : देशभर में जारी खरीफ 2026 के कृषि सीजन के दौरान किसानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में यूरिया, डीएपी (DAP), एमओपी (MOP) और एनपीकेएस (NPKS) जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता पूरी तरह से पर्याप्त बनी हुई है। सरकार के अनुसार, राज्यों की मांग के मुकाबले जरुरत से ज्यादा खाद का स्टॉक उपलब्ध कराया गया है ताकि किसानों को बुवाई के समय किसी भी तरह की किल्लत का सामना न करना पड़े।
संसद में रसायन एवं उर्वरक मंत्री का बयान
लोकसभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि सरकार ने देशभर में समय पर उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई कड़े और प्रभावी कदम उठाए हैं। इनमें राज्यों के आधार पर खाद की जरुरत का अग्रिम आकलन, आपूर्ति का आवंटन, 'इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम' (iFMS) के जरिए रियल-टाइम निगरानी, एडवांस इम्पोर्ट प्लानिंग, निर्माताओं और आयातकों के साथ बेहतर समन्वय और रेलवे के माध्यम से तेजी से परिवहन शामिल है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल से 27 जुलाई 2026 तक के दौरान खाद की आपूर्ति मांग से अधिक रही है।
मांग से अधिक उपलब्ध कराया गया उर्वरक का स्टॉक
सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 27 जुलाई 2026 के बीच यूरिया की मांग 120.16 लाख मीट्रिक टन (LMT) थी, जिसके मुकाबले 174.47 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया। इसी तरह डीएपी (DAP) की 34.67 LMT मांग के मुकाबले 42.36 LMT और एमओपी (MOP) की 10.97 LMT मांग के मुकाबले 14.21 LMT की उपलब्धता रही। एनपीकेएस (NPKS) की बात करें तो 52.89 LMT की आवश्यकता के विपरीत 88.01 LMT खाद बाजार में उपलब्ध रहा।
राज्यों के पास पर्याप्त क्लोजिंग स्टॉक मौजूद
27 जुलाई 2026 तक देश में खाद के क्लोजिंग स्टॉक (अंतिम शेष) की स्थिति भी काफी मजबूत दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में यूरिया का क्लोजिंग स्टॉक 65.52 LMT, डीएपी का 16.52 LMT, एमओपी का 8.51 LMT और एनपीकेएस का 44.31 LMT रहा। इसके अलावा, फास्फेटिक पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए डीएपी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाला 21.23 लाख मीट्रिक टन स्वदेशी 'सिंगल सुपर फॉस्फेट' (SSP) भी देश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराया गया है।
घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार के प्रयास
उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सरकार लगातार घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 'नई निवेश नीति-2012' (NIP-2012) के तहत छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित करके घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है, जबकि कुछ अन्य परियोजनाएं अभी कार्यान्वयन के चरण में हैं। इसके साथ ही, 'न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी' (NBS) योजना के माध्यम से देश में फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के स्वदेशी निर्माण को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि भविष्य में भी विदेशों पर निर्भरता कम की जा सके।
