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पश्चिम एशिया संकट के बीच क्या खाद सब्सिडी होगी दोगुनी? उर्वरक मंत्रालय ने किया आग्रह

Fertilizer Subsidy: पश्चिम एशिया तनाव से उर्वरक आयात महंगा हुआ, उर्वरक मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के लिए उर्वरक सब्सिडी को दोगुना करने की मांग की है हालांकि खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

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पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी चिंता, उर्वरक सब्सिडी दोगुनी करने की तैयारी में सरकार

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Fertilizer Subsidy : पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के उर्वरक क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। आयातित उर्वरकों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण उर्वरक मंत्रालय (Fertilizer Ministry) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी को करीब दोगुना करने की मांग की है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने इस संबंध में वित्त मंत्रालय से अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

1.71 लाख करोड़ से बढ़कर हो सकता है दोगुना

वर्तमान वित्त वर्ष के बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों को देखते हुए उर्वरक विभाग का मानना है कि यह राशि पर्याप्त नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक, विभाग ने सब्सिडी बजट में 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मांग रखी है। पिछले महीने उर्वरक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी संकेत दिया था कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो चालू वित्त वर्ष में उर्वरक सब्सिडी पर होने वाला कुल खर्च तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी चिंता

न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा के मुताबिक सरकारी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा या बंदी का सीधा असर भारत के उर्वरक आयात पर पड़ेगा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में समुद्री मार्ग प्रभावित होने से न केवल आयात लागत बढ़ेगी, बल्कि उर्वरकों की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की उपलब्धता घट रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे वैश्विक निविदा प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक जटिल होती जा रही है।

सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां

सूत्रों के अनुसार, सरकार के सामने इस समय दो प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली चुनौती किसानों के लिए समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करना और आयात के लिए सफल निविदा प्रक्रिया पूरी करना है। दूसरी चुनौती अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बदलती कीमतों का सामना करना है, क्योंकि कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है।

किसानों को राहत देने के लिए जारी है सब्सिडी

सरकार किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए यूरिया और पी एंड के (फॉस्फेटिक एवं पोटासिक) उर्वरकों पर भारी सब्सिडी देती है। वर्तमान में नीम-लेपित यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम बैग है। वहीं, डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) 1,350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बैग के भाव पर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

हालांकि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच सरकार का कहना है कि खरीफ 2026 की बुवाई के लिए फिलहाल उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा के अनुसार, कृषि विभाग ने खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की कुल आवश्यकता 383.9 लाख टन आंकी है। इसके मुकाबले वर्तमान में देश में 197.56 लाख टन उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। यह खरीफ सीजन की कुल जरूरत का 51 प्रतिशत से अधिक है, जबकि सामान्य तौर पर यह स्तर करीब 33 प्रतिशत माना जाता है। इसलिए मौजूदा सीजन में किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर

सरकारी सूत्रों का कहना है कि देश में उर्वरकों का घरेलू उत्पादन बढ़ने से स्थिति को काफी हद तक संभालने में मदद मिल सकती है। वर्ष 2025 में भारत की कुल उर्वरक जरूरत का लगभग 73 प्रतिशत हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा किया गया था। फिर भी देश को अपनी मांग पूरी करने के लिए बड़ी मात्रा में यूरिया और डीएपी का आयात करना पड़ता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर भारत के उर्वरक क्षेत्र और सरकारी सब्सिडी खर्च पर पड़ता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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