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क्या है बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जिसके नाम से पाकिस्तान में कांप जाते हैं चीनी नागरिक, कई को मार चुका है सरेआम गोली

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Aug 14, 2023, 07:06 AM IST

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जिसे बीएलए (BLA) या बलूच लिबरेशन आर्मी के रूप में भी जाना जाता है। बीएलए मुख्य रूप से पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में एक्टिव है, जहां यह पाकिस्तान सशस्त्र बलों और विदेशी नागरिकों के खिलाफ हमले करता है।

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बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के हमले में 4 चीनी इंजीनियर्स की मौत

Photo : Twitter

Balochistan Liberation Army: पाकिस्तान में एक बड़ा ही महत्वपूर्ण प्रांत है, नाम है बलूचिस्तान, इसी प्रांत ोक अलग देश बनाने के लिए बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी वर्षों से हथियार उठाए है। पहले जहां बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के निशाने पर पाकिस्तानी सरकार के लोग और सेना रहते थे, वहीं हाल के दिनों में इसके निशाने पर मुख्य रूप से चीनी नागरिक आ गए हैं। एक के बाद एक हमलों में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने कई चीनी आम नागरिकों, इंजीनियरों की हत्या कर चुका है। कभी सरेआम गोली मारकर तो कभी बम में उड़ा कर।

क्या है बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जिसे बीएलए (BLA) या बलूच लिबरेशन आर्मी के रूप में भी जाना जाता है। बीएलए मुख्य रूप से पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में एक्टिव है, जहां यह पाकिस्तान सशस्त्र बलों और विदेशी नागरिकों के खिलाफ हमले करता है। बलूच आंदोलन की सशस्त्र शाखा बीएलए ने पाकिस्तान में कई हिंसक हमले किए हैं। इसके लगभग 6,000 कैडर बलूचिस्तान प्रांत और अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में फैले हुए हैं। बलूच आंदोलन, पाकिस्तान से भारत के अलग होने के बाद से चल रहा है। जिसका नेतृत्व बीएलए करते रहा है। इसे पहले अप्रत्यक्ष रूप से मैरी, बुगती, मेंगल और अन्य कुलों या सरदारों का समर्थन प्राप्त था। बीएलए विद्रोहियों का दावा है कि पाकिस्तानी सरकार बलूच लोगों और स्वदेशी बलूच जनजातियों को उचित हिस्सा दिए बिना प्रांत के संसाधनों का दोहन कर रहा है।

चीन के खिलाफ क्यों

बलूच लोग पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ तो थे है, लेकिन जब बाद में चीन इस इलाके में घुसा तो यहां के लोग उसके खिलाफ भी हो गए। चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के लिए काम कर रहे कई चीनी इंजीनियरों और अधिकारियों को को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी मार चुका है। ग्वादर बंदरगाह अरबों डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के केंद्र बिंदुओं में से एक है और बंदरगाह पर कई चीनी कर्मचारी काम करते हैं। चीन सीपीईसी के तहत बलूचिस्तान में भारी निवेश कर रहा है। उसका यहां प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय लोग खफा हैं।

अभी चर्चा में क्यों

दरअसल रविवार को ही पाकिस्तान में चीनी इंजीनियरों के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ है। जिसमें 4 चीनी इंजीनियर समेत 13 लोग मारे गए हैं। जिसमें पाकिस्तानी सेना के जवान और आतंकी भी शामिल हैं। साथ ही 27 लोगों के घायल होने की भी खबर है। इस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने ली है।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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