अमेरिका में 11 सितंबर 2001 (9/11) को हुए भीषण आतंकवादी हमलों की 25वीं बरसी पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए तत्कालीन राष्ट्रपतियों के लिए तैयार की गई दर्जनों अत्यंत गोपनीय खुफिया रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया है। इन दस्तावेजों में अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन, उसके फंडिंग नेटवर्क और अमेरिकी धरती पर विमानों के अपहरण व जैविक/रेडियोधर्मी हमलों की साजिश को लेकर हमले से वर्षों पहले जुटाई गई खुफिया जानकारियों का ब्योरा है।
निशाना बनाने की थी पहले से जानकारी
सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने इसे "असाधारण पारदर्शिता का कदम" करार देते हुए कहा कि यह एजेंसी द्वारा राष्ट्रपति को दी जाने वाली टॉप-सीक्रेट रिपोर्टों को सार्वजनिक करने का अब तक का सबसे बड़ा संग्रह है। सार्वजनिक किए गए खुफिया दस्तावेजों में सुरक्षा विश्लेषकों द्वारा बिन लादेन की गतिविधियों पर लगातार रखी जा रही नजर का विस्तृत उल्लेख है।
सितंबर 1998 की चेतावनी: अधिकारियों ने 1998 में ही लिखा था कि बिन लादेन का सबसे पसंदीदा विकल्प "अमेरिका की धरती पर वाशिंगटन में हमला करना है" और अलकायदा "विस्फोटकों से भरे विमान को अमेरिका के किसी शहर में गिरा सकता है।"
दिसंबर 1998 (विमान अपहरण का परीक्षण): रिपोर्ट में संभावित विमान अपहरण की साजिश का स्पष्ट जिक्र था। खुफिया अधिकारियों ने दर्ज किया था कि अलकायदा सदस्यों ने न्यूयॉर्क के एक हवाई अड्डे पर सुरक्षा तंत्र को चकमा देने का सफल परीक्षण किया था और उसके गुर्गों ने अपहरण का प्रशिक्षण लिया था।
अगस्त 2001 (हमले से एक महीने पहले): तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि लादेन "अमेरिका में हमले के लिए प्रतिबद्ध" है। एफबीआई उस समय अमेरिका भर में लादेन के नेटवर्क से जुड़ी लगभग 70 अलग-अलग जांचों पर काम कर रही थी।
'डर्टी बम' बनाने की कोशिश
खुफिया दस्तावेजों में यह भी खुलासा हुआ है कि अलकायदा पारंपरिक हथियारों से इतर खतरनाक जैविक और रेडियोधर्मी हथियारों तक पहुंच बनाने की कोशिश में था:
फरवरी 1998 (क्लिंटन प्रशासन): पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के लिए तैयार रिपोर्ट का शीर्षक था- "आतंकवादी सामूहिक विनाश के हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने की कोशिश में"। इसमें लादेन और चरमपंथियों की इस खतरनाक मंशा का ब्योरा था।
रेडियोधर्मी सामग्री व जैविक एजेंट: जून 1999 की रिपोर्ट के अनुसार, लादेन के गुर्गे विस्फोटकों की मारक क्षमता बढ़ाने के प्रयोग कर रहे थे। 2001 की शुरुआत में राष्ट्रपति बुश को सौंपी गई रिपोर्ट में लादेन द्वारा जैविक एजेंटों के तात्कालिक प्रयोगों पर विशेष रूप से ध्यान दिलाया गया था।
तालिबान का संरक्षण और 2 साल लंबी साजिश
अप्रैल 1998 के दस्तावेजों के अनुसार, अफगानिस्तान में तालिबान ओसामा बिन लादेन को अपना "मेहमान" मानता था। सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान लादेन की मदद के प्रति आभारी होने के कारण तालिबान उसकी आतंकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने या उसे अमेरिका को सौंपने में हिचक रहा था। वहीं, 12 सितंबर 2001 (हमलों के ठीक अगले दिन) की एक रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से पुष्टि की गई थी कि 9/11 के इन भयावह हमलों की योजना अलकायदा द्वारा पिछले दो वर्षों से बनाई जा रही थी।
व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्टों के सार्वजनिक होने के बाद 9/11 जांच आयोग (2002-2004) द्वारा क्लिंटन और बुश प्रशासन के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के साक्षात्कार के संग्रह को भी राष्ट्रीय अभिलेखागार के जरिए जारी किए जाने की बात कही है।
