BRICS Summit 2026 : नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ दुनिया भर के दिग्गज नेता शिरकत कर रहे हैं। इस महाबैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फत्ताह अल-सिसी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। पश्चिमी एशिया और यूक्रेन के युद्ध, महाशक्तियों की खींचतान और वैश्विक संस्थानों में सुधार की मांगों के बीच हो रहा यह सम्मेलन बेहद खास है। 5 सदस्यों से शुरू हुआ यह समूह अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच का रूप ले चुका है। आइए समझते हैं कि इस सम्मेलन में पहुंचे दिग्गज नेता कौन हैं, उनकी ताकत क्या है और दुनिया और भारत के लिए उनका क्या महत्व है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
व्लादिमीर पुतिन पिछले दो दशकों से रूस की सत्ता के केंद्र में हैं। पूर्व केजीबी (KGB) जासूस रहे पुतिन 1999 से राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के रूप में देश की कमान संभाल रहे हैं। 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जिसके बाद रूस ने पश्चिमी दुनिया से बाहर अपने संबंध मजबूत करने शुरू कर दिए। रूस के लिए ब्रिक्स एक ऐसा मंच है, जहां वह यह साबित कर सकता है कि पश्चिमी देशों की कोशिशों के बावजूद वह दुनिया में अलग-थलग नहीं पड़ा है। भारत और रूस हमेशा से गहरे रणनीतिक साझेदार रहे हैं। रक्षा क्षेत्र में दोनों का पुराना रिश्ता है, वहीं यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल हो गया है। दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ा है और 2030 तक इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। पश्चिमी देशों से भारत के बढ़ते नजदीकी संबंधों के बावजूद, भारत के लिए पुतिन की मौजूदगी बहुत मायने रखती है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
शी जिनपिंग 2013 से चीन के राष्ट्रपति हैं और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे शक्तिशाली नेता माने जाते हैं। उनके नेतृत्व में चीन ने 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) जैसी योजनाओं के जरिए वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) में अपना प्रभाव बढ़ाया है। आर्थिक और सैन्य मोर्चे पर चीन लगातार आक्रामक रुख अपनाता रहा है। चीन ब्रिक्स ग्रुप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग तथा व्यापार का मुख्य केंद्र है। बीजिंग हमेशा से ब्रिक्स का उपयोग अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए करता रहा है। भारत के नजरिए से देखें तो 2020 की गलवान घाटी सीमा झड़प के बाद शी जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, भारत का चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा और चीन-पाकिस्तान की साठगांठ जैसे कई गंभीर मुद्दे हैं। ऐसे में नई दिल्ली में उनकी मौजूदगी दोनों देशों के ठंडे पड़े रिश्तों को सुधारने का एक अहम मौका हो सकती है।
पीएम मोदी की अगुवाई में तय होगी वैश्विक राजनीति की नई दिशा (तस्वीर-AI)
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा
सिरिल रामाफोसा 2018 से दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति हैं। उनका राजनीतिक करियर रंगभेद विरोधी आंदोलन से जुड़ा रहा है और उन्होंने नेल्सन मंडेला के साथ मिलकर भी काम किया है। 2024 के चुनावों के बाद उन्होंने गठबंधन सरकार का गठन किया। दक्षिण अफ्रीका महाद्वीप की सबसे विकसित और औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। प्लेटिनम, सोना और मैंगनीज जैसे खनिजों के विशाल भंडार के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में इसका विशेष स्थान है। दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स के माध्यम से विकासशील देशों के अधिकारों और सुधारों की आवाज उठाता रहा है। भारत और दक्षिण अफ्रीका का रिश्ता उपनिवेशवाद और रंगभेद के खिलाफ साझा संघर्ष के इतिहास से बंधा है। आज दोनों देश व्यापार, ऑटोमोबाइल, रक्षा और दवाओं के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान
मसूद पेजेशकियान जुलाई 2024 में ईरान के राष्ट्रपति बने। पेशे से डॉक्टर और सुधारवादी नेता पेजेशकियान ने देश की आर्थिक स्थिति सुधारने और बाहरी दुनिया के साथ बेहतर संबंध बनाने का वादा किया है। ईरान 2024 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना। ईरान की भौगोलिक स्थिति मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और मध्य एशिया को जोड़ती है। पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध और तनाव के बीच ब्रिक्स सम्मेलन में ईरान की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है। भारत के लिए ईरान रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। दोनों देश मिलकर ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित कर रहे हैं, जो भारत को पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच देता है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह ईरान के साथ संबंध बनाए रखते हुए अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों (जैसे यूएई) के साथ भी संतुलन स्थापित करे।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के क्राउन प्रिंस शेख खालिद
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नहयान अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यूएई 2024 में ब्रिक्स का सदस्य बना। एक प्रमुख तेल उत्पादक, वैश्विक वित्तीय केंद्र और लॉजिस्टिक्स हब होने के नाते यूएई का ब्रिक्स में आना इस समूह की आर्थिक ताकत को कई गुना बढ़ाता है। भारत और यूएई के रिश्ते बेहद करीबी हैं, जो व्यापार, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र तक फैले हुए हैं।
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब अपनी पारंपरिक अमेरिका-केंद्रित नीति से इतर चीन, रूस और अन्य उभरती शक्तियों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है। हालांकि सऊदी अरब को 2023 में ब्रिक्स में शामिल होने का निमंत्रण मिला था और उसे सदस्य देशों की सूची में गिना जाता है, लेकिन उसने अपनी सदस्यता की औपचारिक स्थिति को लेकर कुछ अस्पष्टता रखी है। इसके बावजूद, सऊदी विदेश मंत्री की उपस्थिति बहुत मायने रखती है। सऊदी अरब भारत के लिए कच्चे तेल का एक मुख्य स्रोत है। इसके अलावा, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) में भी सऊदी अरब भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है।
ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा
ब्राजील के राष्ट्रपति की जगह वहां के विदेश मंत्री मौरो विएरा ब्राजील के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं। विएरा एक अनुभवी राजनयिक हैं, जो इससे पहले अमेरिका और अर्जेंटीना में ब्राजील के राजदूत रह चुके हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और कृषि, ऊर्जा तथा खनिजों का बहुत बड़ा निर्यातक देश है। ब्रिक्स के मंच पर ब्राजील की मुख्य प्राथमिकता वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करके स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देना रही है। भारत और ब्राजील के बीच व्यापार, दवा (फार्मास्यूटिकल्स), कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं। ब्राजील लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फत्ताह अल-सिसी
पूर्व सैन्य प्रमुख अब्दुल फत्ताह अल-सिसी 2014 से मिस्र के राष्ट्रपति हैं। मिस्र भी 2024 में ब्रिक्स का हिस्सा बना। मिस्र स्वेज नहर पर नियंत्रण रखता है, जो भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ती है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों में रुकावटों के कारण मिस्र की भूमिका और बढ़ गई है। भारत और मिस्र के संबंध ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे रहे हैं। 2023 में सिसी भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि भी रहे थे। मिस्र भारत को अरब दुनिया और अफ्रीका से जोड़ने वाली एक मजबूत कड़ी है।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो
प्रबोवो सुबियांतो ने अक्टूबर 2024 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का पद संभाला। इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा और सबसे अधिक आबादी वाला देश है। यह देश निकल, पाम ऑयल और प्राकृतिक गैस जैसे संसाधनों से समृद्ध है। इंडोनेशिया 2025 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना और वह इस समूह में शामिल होने वाला पहला दक्षिण-पूर्व एशियाई देश है। इंडोनेशिया के आने से ब्रिक्स को दक्षिण-पूर्व एशिया में एक बहुत मजबूत आधार मिला है। भारत और इंडोनेशिया समुद्री पड़ोसी हैं और हिंद महासागर में सुरक्षा तथा व्यापार के मोर्चे पर दोनों मिलकर काम कर रहे हैं।
इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद
अबी अहमद 2018 से इथियोपिया के प्रधानमंत्री हैं। 2019 में पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ शांति समझौते के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इथियोपिया अफ्रीका के सबसे अधिक आबादी वाले देशों में से एक है और इसकी राजधानी अदीस अबाबा में 'अफ्रीकी संघ' का मुख्यालय है। 2024 में ब्रिक्स में शामिल होने से अफ्रीका महाद्वीप की आवाज इस मंच पर और मजबूत हुई है। इथियोपिया में भारतीय कंपनियों ने मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और दवा उद्योग में बड़ा निवेश किया है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह सम्मेलन?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए इस महाबैठक की मेजबानी करना भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रतीक है। ब्रिक्स अब केवल 5 देशों का संगठन नहीं रहा, बल्कि इसमें दुनिया की आधी आबादी और एक बड़ा आर्थिक हिस्सा शामिल है। भारत इस मंच का उपयोग दुनिया में संतुलन बनाने के लिए कर रहा है। एक तरफ जहां भारत अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है, वहीं ब्रिक्स के जरिए वह रूस, चीन और 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) के साथ भी संवाद बनाए रख रहा है। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में इन सभी दिग्गजों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि आने वाले समय में विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में ब्रिक्स और भारत की भूमिका सबसे निर्णायक होने वाली है।
