9/11 Anniversary: अमेरिका में 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी से पहले न्यूयॉर्क शहर का आसमान ड्रोन की रोशनी से जगमगा उठा। एक समय ऐसा भी आया जब ड्रोन ने 2001 में ध्वस्त हुए ट्विन टावर्स की आकृति को हूबहू दोहरा दिया। बुधवार रात लोअर मैनहट्टन के आसमान में 2,977 रोशनियां प्रदर्शित की गईं, जिनमें से प्रत्येक रोशनी 9/11 आतंकी हमलों में मारे गए एक-एक व्यक्ति की याद में थी। आतंकी संगठन अलकायदा के इस हमले में करीब 3 हजार लोगों की मौत हुई थी।
ट्विन टावर्स की आकृति दोबार बनती दिखी
इस शानदार प्रदर्शन के दौरान रोशनियां एक साथ जुड़कर ट्विन टावर्स के 'पूर्ण वास्तुशिल्पीय आकार' को दोबारा बनाती नजर आईं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। हार्बर के ऊपर यह मनमोहक ड्रोन शो जारी रहा, जबकि पास ही ग्राउंड जीरो पर पारंपरिक 'ट्रिब्युट इन लाइन' स्मारक भी रोशन था।
जीरो परिसर में स्मृति समारोह होगा
लोग 9 सितंबर, 2026 को न्यू जर्सी के जर्सी सिटी स्थित लिबर्टी स्टेट पार्क से निचले मैनहट्टन के आसमान में ट्विन टावर्स की आकृति दिखाने वाले ड्रोन लाइट शो को देखते और उसकी तस्वीरें लेते नजर आए। बता दें कि यह आयोजन शुक्रवार को ग्राउंड जीरो पर होने वाले वार्षिक स्मृति समारोह से पहले किया गया। यह समारोह 9/11 आतंकी हमलों की बरसी के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। शुक्रवार सुबह पवित्र माने जाने वाले ग्राउंड जीरो परिसर में स्मृति समारोह होगा।
मृतकों के सम्मान में मौन रखा जाएगा
इस दौरान विमानों के ट्विन टावर्स और पेंटागन से टकराने के समय, दोनों टावरों के गिरने के समय और पेनसिल्वेनिया में एक अपहृत विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के समय एक-एक मिनट का मौन रखा जाएगा। पहली बार, इस समारोह में 9/11 से जुड़ी बीमारी या चोट के कारण बाद में जान गंवाने वाले लोगों को सम्मानित करने के लिए मौन भी रखा जाएगा।
11 सितंबर 2001 को क्या हुआ था?
11 सितंबर 2001 को अमेरिका में अल-कायदा के 19 आतंकवादियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकराया गया, जिससे दोनों इमारतें ढह गईं। तीसरा विमान पेंटागन से टकराया। चौथा विमान, फ्लाइट 93, यात्रियों के प्रतिरोध के बाद पेनसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इन हमलों में 2,977 लोग मारे गए। 9/11 के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ व्यापक सैन्य और सुरक्षा अभियान शुरू किया, जिसका सबसे बड़ा असर अफगानिस्तान और बाद में इराक में देखने को मिला।
