ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों के जद में अमेरिकी सैन्य अड्डे, अराघची ने चेताया; आज होगी ईरान-अमेरिका अहम वार्ता
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Feb 10, 2026, 08:32 AM IST
अराघची ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका हमला करता है तो ईरान खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। अराघची ने अल जजीरा को बताया कि अमेरिकी धरती पर हमला करना संभव नहीं होगा, लेकिन हम क्षेत्र में उनके ठिकानों को निशाना बनाएंगे।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची
US Iran Tension: अमेरिका के साथ युद्ध की धमकियों के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि तेहरान वाशिंगटन के साथ बातचीत में यूरेनियम संवर्धन को कभी भी छोड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में सैन्य तैनाती से हमें डर नहीं लगता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को धमकी देने और यह कहने के बाद कि एक विशाल सैन्य बेड़ा ईरान की ओर तेजी से, पूरी ताकत, उत्साह और उद्देश्य के साथ बढ़ रहा है, अराघची ने कहा कि तेहरान किसी भी आक्रामकता का तुरंत और जोरदार जवाब देने के लिए तैयार है।
आज होगी ईरान-अमेरिका अहम वार्ता
वहीं, ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मंगलवार को ओमान की यात्रा करेंगे। मध्य पूर्व का यह सल्तनत तेहरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच इस्लामी गणराज्य के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही वार्ता में मध्यस्थता कर रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिका द्वारा संभावित हमले को रोकना है। ईरान की संसद के पूर्व अध्यक्ष और अब देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी, पिछले सप्ताह मस्कट में अमेरिकियों के साथ हुई अप्रत्यक्ष वार्ता के पहले दौर पर अपने देश की प्रतिक्रिया लेकर जाएंगे।
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, लारीजानी वार्ता के मुख्य मध्यस्थ ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात करेंगे। आईआरएनए ने वार्ता को "महत्वपूर्ण" बताया, लेकिन लारीजानी क्या संदेश लेकर जाएंगे, इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। ईरान और अमेरिका ने पिछले सप्ताह ओमान में परमाणु वार्ता की थी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को तेहरान में आयोजित शिखर सम्मेलन में राजनयिकों को संबोधित करते हुए संकेत दिया कि ईरान यूरेनियम संवर्धन करने की अपनी शर्त पर अडिग रहेगा। यह मुद्दा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ विवाद का प्रमुख विषय है, जिन्होंने 12 दिवसीय ईरान-इजराइल युद्ध के दौरान जून में ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी की थी। इस युद्ध ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु वार्ता के पिछले दौर को बाधित कर दिया था।
अमेरिका को दी सख्त चेतावनी
शनिवार को अराघची ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका हमला करता है तो ईरान खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। अराघची ने अल जजीरा को बताया कि अमेरिकी धरती पर हमला करना संभव नहीं होगा, लेकिन हम क्षेत्र में उनके ठिकानों को निशाना बनाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि हम पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करेंगे; बल्कि, हम उनमें स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएंगे। इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है।
अराघची ने स्पष्ट किया कि यूरेनियम संवर्धन अभी भी तेहरान के लिए एक गैर-समझौते वाला मुद्दा है। उन्होंने कहा, हम एनरिचमेंट पर इतना जोर क्यों देते हैं और युद्ध थोपे जाने पर भी इसे छोड़ने से इनकार क्यों करते हैं? क्योंकि किसी को भी हम पर हुक्म चलाने का अधिकार नहीं है।
अमेरिकी सैन्य तैनाती के दबाव को खारिज किया
उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती को अप्रभावी दबाव रणनीति बताते हुए खारिज कर दिया और पास के जलक्षेत्र में विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन की उपस्थिति का हवाला दिया। अराघची ने मंच पर कहा कि क्षेत्र में उनकी सैन्य तैनाती से हमें डर नहीं लगता। उन्होंने कहा कि ईरान को वाशिंगटन पर बहुत कम भरोसा है और उसने सवाल उठाया कि क्या अमेरिकी पक्ष वास्तव में कूटनीति के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि तेहरान किसी भी ऐसे समझौते पर सहमत नहीं होगा जो उसकी स्वतंत्रता या राष्ट्रीय गरिमा को कमजोर करे।
वार्ता की प्रगति आपसी सम्मान पर निर्भर
अराघची ने कहा कि ईरान प्रतिबंधों में राहत के बदले विश्वास बनाने के उपायों की एक श्रृंखला पर विचार करने के लिए तैयार है, लेकिन चेतावनी दी कि वार्ता प्रगति आपसी सम्मान पर निर्भर है। अराघची ने कहा कि वे हमारे परमाणु बम से डरते हैं, जबकि हम ऐसा कोई बम नहीं बना रहे हैं। हमारा परमाणु बम महाशक्तियों को 'ना' कहने की शक्ति है। बता दें कि पश्चिमी सरकारें और इजराइल लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप लगाते रहे हैं। तेहरान ने बार-बार इस दावे का खंडन करते हुए जोर दिया है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
