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स्विट्जरलैंड में आज होगा अमेरिका और ईरान के बीच समझौता! US के सामने तेहरान ने रखी क्या-क्या शर्तें?

US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए स्विट्जरलैंड में एक महत्वपूर्ण बैठक हो रही है। इस बातचीत में ईरान जहां लेबनान में सीजफायर, अपने तेल की बिक्री और फ्रीज किए गए $6 बिलियन के फंड को जारी कराने पर अड़ा है। वहीं अमेरिका का मुख्य ध्यान ईरान के परमाणु ठिकानों की जांच पर है।

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अमेरिका-ईरान शांति वार्ता

Photo : AP

US Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने के लिए स्विट्जरलैंड (Switzerland Meeting) के बुर्गेनस्टॉक लग्जरी होटल में बातचीत का नया दौर शुरू हो चुका है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरानी नेताओं के साथ बातचीत शुरू करने के लिए स्विट्जरलैंड पहुंचे। आज होने वाली इन चर्चाओं में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने और युद्ध खत्म करने के लिए बनी कमजोर अंतरिम डील को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।

एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि अमेरिका चाहता था कि ईरान के साथ बातचीत का पहला दौर इस नतीजे पर खत्म हो कि UN के इंस्पेक्टर ईरान की परमाणु सुविधाओं का दौरा कर सकें। इनमें वे साइट्स भी शामिल हैं जिन पर पिछले साल जून में अमेरिका और इजराइल ने हमले किए थे। इस बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल बड़े एजेंडे के साथ आमने-सामने बैठे हैं। इनके अलावा इस बैठक में बातचीत के लिए पाकिस्तानी नेता पीएम शहवाज शरीफ भी शामिल हैं। वह भी स्विस रिजॉर्ट पहुंचे।

वीडियो में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का काफिला बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट पहुंचता हुआ, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची की स्विस विदेश मंत्री इग्नाज़ियो कैसिस से मुलाकात, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का आगमन और अमेरिकी 'सेकंड लेडी' उषा वेंस का कार्यक्रम स्थल पर जाते हुए दिख रहा है। इस बातचीत का मुख्य आधार इसी हफ्ते दोनों देशों के बीच साइन हुआ 14 सूत्रीय शांति समझौता (MoU) है, जिसके तहत क्षेत्र में दुश्मनी को खत्म करना और व्यापारिक रास्तों को सुरक्षित बनाना शामिल है।

ईरान का क्या है एजेंडा?

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई के मुताबिक, ईरान के लिए सबसे बड़ा मुद्दा लेबनान में जारी इजरायली हमले हैं। ईरान का कहना है कि अमेरिका लेबनान में सीजफायर लागू करवाने में पूरी तरह नाकाम रहा है, जो कि शांति समझौते की पहली शर्त थी। इसके अलावा, ईरान चाहता है कि उस पर से तेल बेचने के प्रतिबंध हटाए जाएं और विदेशों में फंसे उसके फंड, विशेषकर कतर के बैंक में मौजूद 6 अरब डॉलर की रकम को जल्द से जल्द रिलीज किया जाए।

परमाणु ठिकानों की हो जांच-अमेरिका की मांग

दूसरी तरफ, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी टीम का पूरा ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को रोकने पर है। वाशिंगटन चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय निरीक्षक ईरान के परमाणु ठिकानों का दौरा करें और वहां की जमीनी हकीकत का आकलन करें। अगर ईरान इसके लिए तैयार होता है, तभी अमेरिका उसके फंड को रिलीज करने पर विचार करेगा।

ट्रंप की चेतावनी

इस पूरी बातचीत के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर भी विवाद गरमाया हुआ है। लेबनान पर हमलों के विरोध में ईरान ने इसे बंद करने की धमकी दी है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह जलमार्ग खुला हुआ है। ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि अगले 60 दिनों की इस बातचीत से कोई न कोई सकारात्मक रास्ता निकलेगा, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी भी दी है कि अगर बात नहीं बनी, तो अमेरिका वो कदम उठाएगा जिससे ईरान खुश नहीं होगा।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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