विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत रूस और यूक्रेन, दोनों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। भारत का प्रयास है कि ऐसे विचार और सुझाव सामने लाए जा सकें, जो युद्ध की तीव्रता कम करने और अंततः संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में मददगार साबित हों। यूक्रेन की राजधानी कीव की यात्रा पूरी करने के बाद जयशंकर शुक्रवार को वारसॉ पहुंचे। यहां उन्होंने पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा हुई।
यूक्रेन युद्ध पर पोलैंड से भी हुई चर्चा
वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता में जयशंकर ने कहा कि बैठक के दौरान आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, खाद्य सुरक्षा, ईंधन की उपलब्धता और उर्वरक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने यूक्रेन और रूस में चल रही जंग पर भी बात की। जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन में चल रहा युद्ध पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और यह मौजूदा समय की प्रमुख वैश्विक एवं क्षेत्रीय चुनौतियों में शामिल है।रूस और यूक्रेन दोनों के संपर्क में भारत
युद्ध समाप्त कराने में भारत की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली लगातार रूस और यूक्रेन, दोनों पक्षों के संपर्क में है। उन्होंने कहा कि भारत यह समझने की कोशिश कर रहा है कि क्या ऐसे व्यावहारिक सुझाव या पहल विकसित की जा सकती हैं, जो तनाव कम करने में योगदान दें और आगे चलकर संघर्ष को समाप्त करने का रास्ता तैयार करें।
कीव में भी दिया था शांति का संदेश
जयशंकर ने एक दिन पहले कीव में भी भारत की नीति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि भारत युद्ध समाप्त करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार हर संभव सहयोग देने को तैयार है। कीव में उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मुलाकात की थी। जेलेंस्की ने बैठक के बाद भारत की ओर से युद्ध खत्म कराने के प्रयासों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि मौजूदा समय युद्ध का नहीं, बल्कि शांति का होना चाहिए और उम्मीद जताई थी कि दुनिया की अन्य बड़ी शक्तियां भी संघर्ष को खत्म करने तथा स्थायी शांति सुनिश्चित करने की दिशा में स्पष्ट रुख अपनाएंगी।
‘युद्ध में किसी की जीत नहीं होती’
वारसॉ में जयशंकर ने भारत के उस दृष्टिकोण को दोहराया कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध का कोई वास्तविक विजेता नहीं होता। उन्होंने कहा कि संघर्ष का हर अतिरिक्त दिन और अधिक जानमाल के नुकसान, तबाही और आर्थिक बोझ को बढ़ाता है। विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हाल में सार्वजनिक रूप से इस चिंता को सामने रख चुके हैं। भारत का मानना है कि युद्ध को आगे बढ़ाने के बजाय संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
रूसी तेल की खरीद पर भी भारत का जवाब
रूस से भारत द्वारा तेल खरीदने को लेकर सवाल किए जाने पर जयशंकर ने कहा कि तेल व्यापार को युद्ध की समाप्ति से जोड़ना सही दृष्टिकोण नहीं है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि किसी देश ने तेल, उर्वरक, धातु या अन्य वस्तुओं की खरीद की या नहीं। उनके मुताबिक युद्ध का अंत बातचीत, कूटनीति और समझौते की प्रक्रिया से ही संभव होगा।
