Konnichiwa Namaste Diplomacy: अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति की दुनिया अक्सर बेहद गंभीर, नियम-कायदों से बंधी और औपचारिक मानी जाती है। लेकिन हाल ही में नई दिल्ली में एक ऐसा वाकया देखने को मिला, जिसने कूटनीति के गंभीर माहौल में गर्मजोशी और मुस्कुराने की वजह घोल दी। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी और बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रांकेन के बीच सोशल मीडिया पर हुई बातचीत इस समय हर जगह चर्चा का विषय बनी हुई है।
दरअसल, बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रांकेन भारत के आधिकारिक दौरे पर आए हुए थे। नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि भारत आने से ठीक पहले वह जापान में थे। वहां के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइजुमी ने उनसे खासतौर पर गुजारिश की थी कि वे भारत पहुंचकर राजनाथ सिंह को उनका ढेरों प्यार और शुभकामनाएं देना न भूलें। सुबह-सुबह मैसेज करके भी जापानी मंत्री ने फ्रांकेन को यह याद दिलाया था।
जापानी रक्षा मंत्री बातचीत का वीडियो किया शेयर
यह सुनते ही बैठक का माहौल बेहद खुशनुमा हो गया और राजनाथ सिंह ने भी मुस्कुराते हुए इस गर्मजोशी भरे पैगाम का स्वागत किया। इसके बाद कूटनीति का यह खूबसूरत सिलसिला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पहुंच गया। जापानी रक्षा मंत्री ने इस बातचीत का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि यह नेताओं के बीच आपसी जुड़ाव और अनौपचारिक बातचीत का बेहतरीन नतीजा है।
क्या है पूरा माजरा?
जवाब में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जापानी मंत्री को धन्यवाद दिया और लिखा कि उनका संदेश सही समय पर मिल गया है। राजनाथ सिंह ने आने वाले दिनों में जापान दौरे के दौरान दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को और मजबूत करने की उम्मीद भी जताई। यह पूरा वाकया उस समय शुरू हुआ था जब पिछले महीने जापानी रक्षा मंत्री भारत आए थे।
तब राजनाथ सिंह ने जापानी भाषा में "कोनिचिवा" कहकर उनका स्वागत किया था, तो जवाब में जापानी मंत्री ने भी तुरंत "नमस्ते" कहा था। अब बेल्जियम के मंत्री के इस दौरे ने इस त्रिकोणीय दोस्ती को और गहरा बना दिया है। एक तरफ जहां वैश्विक मंच पर उथल-पुथल मची है, वहीं भारत, जापान और बेल्जियम के बीच रक्षा विनिर्माण, सुरक्षा और आपसी सहयोग को बढ़ाने के साथ-साथ यह हल्की-फुल्की और आत्मीय कूटनीति दुनिया को दिखाती है कि मजबूत रिश्ते सिर्फ कागजी समझौतों से नहीं, बल्कि दिलों के जुड़ाव से बनते हैं।
