Islamic Nato Alliance: पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को मौलिक रूप से बदलने वाले एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की एक एकीकृत और व्यापक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। वैश्विक कूटनीतिक हलकों में 'इस्लामिक नाटो' (Islamic Nato) कहे जा रहे इस गठबंधन के तहत तीनों देश एक साझा सैन्य और रणनीतिक सुरक्षा तंत्र स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इस समझौते के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंच चुके हैं और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन आज शुक्रवार को हस्ताक्षर करने पहुंचेंगे।
तीनों देशों का होगा कितना मजबूत गठबंधन?
तीनों देशों ने इस्लामी दुनिया में एक संयुक्त और एकीकृत सुरक्षा गठबंधन बनाने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दिया है। सीएनएन-न्यूज18 को तुर्की के एक वरिष्ठ इंटेलिजेंस सूत्र ने पुष्टि की है कि गठबंधन के लिए सभी बुनियादी शर्तों का मसौदा तैयार कर लिया गया है, जहां पाकिस्तानी, सऊदी तथा तुर्की नेताओं ने उसपर सहमति भी जता दी है। यह त्रिपक्षीय समझौता बीते वर्ष सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए पारस्परिक रक्षा समझौते का एक स्वाभाविक विस्तार है। गठबंधन में तीनों देशों की भूमिका
सऊदी अरब: अपनी विशाल वित्तीय शक्ति, रणनीतिक गहराई और क्षेत्रीय प्रभाव का योगदान देगा।
तुर्की: अपनी उन्नत सैन्य तकनीक, विशेष रूप से अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक, और नाटो-मानक सैन्य-औद्योगिक आधार प्रदान करेगा।
पाकिस्तान: अपनी परमाणु क्षमताओं और युद्ध-अनुभवी विशाल थल सेना का योगदान देगा।
संयुक्त अभ्यास, तकनीक हस्तांतरण और परमाणु-सैन्य तालमेल
इस नए सुरक्षा ढांचे के तहत तीनों देश रक्षा उत्पादन, खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को बढ़ावा देंगे।
सैन्य तैनाती व ढांचा: सऊदी-पाक समझौते के तहत पाकिस्तान ने पहले ही लगभग 25,000 सैनिकों, बख्तरबंद, तोपखाने, इन्फैंट्री और रॉकेट इकाइयों के साथ-साथ दो वायु सेना स्क्वाड्रन और दो नौसेना बेड़ों को सऊदी अरब में तैनात करने पर सहमति जताई थी।
वित्तीय निवेश: सऊदी अरब इस सुरक्षा साझेदारी और संयुक्त ऑपरेशनों के बदले पाकिस्तान में $10 बिलियन (10 अरब डॉलर) का निवेश करेगा।
तकनीकी हस्तांतरण: तुर्की के शामिल होने से इस गठबंधन को उन्नत ड्रोन और अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन में बड़ी बढ़त मिलेगी।
ऐसे में तीन प्रमुख और शक्तिशाली मुस्लिम देशों का एक सैन्य ब्लॉक में एक साथ आना वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा राजनीति के लिहाज से एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
