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इजरायल की सेना ने हमास के वरिष्ठ नेता को मार गिराया, खुद किया ये बड़ा दावा

Israel vs Hamas: इजरायल ने अपने दुश्मनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पहले बेरूत में हमला कर उसने हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरुल्लाह को मार गिराया, फिर ईरान ने उसके खिलाफ मिसाइल हमला किया तो माकूल जवाब दिया। इजरायल की सेना ने कहा है कि गाजा में हमास के वरिष्ठ नेता को मार गिराया।

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इजरायल हमास युद्ध।

Photo : AP

Israeli Army's Big Claim: हिजबुल्लाह के चीफ की मारकर इजरायल ने आतंकी संगठन की कमर तोड़ दी। पहले हसन नसरुल्लाह और अब उसके दामाद को इजरायल ने जहन्नुम भेज दिया है। इस बीच इजरायल सेना ने ये दावा किया है कि उसने तीन महीने पहले एक हमले में हमास के वरिष्ठ नेता को मार दिया था।

हमास के एक वरिष्ठ नेता को मार गिराया

इज़राइली सेना ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने तीन महीने पहले गाजा पट्टी में हवाई हमले में हमास के एक वरिष्ठ नेता को मार गिराया था। सेना ने कहा है कि उत्तरी गाजा में एक भूमिगत परिसर पर हमले में रवही मुश्तहा और दो अन्य हमास कमांडर मारे गए।

सोशल मीडिया पोस्ट में इजरायली सेना ने बताया है कि लगभग 3 महीने पहले, गाजा में IDF और ISA के संयुक्त हमले में, निम्नलिखित आतंकवादियों को मार गिराया गया:

  • गाजा में हमास सरकार के प्रमुख रावी मुश्तहा
  • समेह अल-सिराज, जिन्होंने हमास के राजनीतिक ब्यूरो और हमास की श्रम समिति में सुरक्षा पोर्टफोलियो संभाला था
  • हमास के सामान्य सुरक्षा तंत्र के कमांडर सामी औदेह

IAF के लड़ाकू विमानों ने उत्तरी गाजा में एक किलेबंद और सुसज्जित भूमिगत परिसर में छिपे आतंकवादियों पर हमला किया और उन्हें मार गिराया। यह परिसर हमास के कमांड और नियंत्रण केंद्र के रूप में काम करता था और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को लंबे समय तक इसके अंदर रहने में सक्षम बनाता था। IDF 7 अक्टूबर के नरसंहार के लिए जिम्मेदार सभी आतंकवादियों का पीछा करना जारी रखेगा और इज़राइल राज्य को धमकी देने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करेगा।

हजारों लेबनानी नागरिक सीरिया चले गए

बता दें कि हिजबुल्लाह चीफ नसरुल्लाह की मौत के बाद इजरायली सेना लगातार लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर तेजी से कार्रवाई कर रही है। इसी बीच स्थानीय मीडिया के अनुसार, इजरायली सैन्य कार्रवाई तेज होने के बाद से अब तक 52 हजार से ज्यादा लेबनानी नागरिक सीरिया चले गए हैं।अल-वतन ऑनलाइन ने सीरिया के जनरल डायरेक्टरेट ऑफ माइग्रेशन एंड पासपोर्ट के एक सूत्र के हवाले से बताया था कि लेबनानी शरणार्थियों के अलावा लगभग 1 लाख 25 हजार सीरिया के नागरिक भी अपने वतन लौट आए हैं।

पिछले शुक्रवार को बेरूत के दक्षिणी उपनगर में एक महत्वपूर्ण हमले में हिज्बुललाह चीफ हसन नसरल्लाह और उसके कई सहयोगी मारे गए। इस हफ्ते इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान भी शुरू कर दिया। बुधवार को उसने लेबनान के अंदर अपने आठ सैनिकों की मौत की पुष्टि की। 8 अक्टूबर, 2023 को हिजबुल्लाह ने गाजा में हमास के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए इजरायल पर रॉकेट दागने शुरू किए थे। नवीनतम घटनाक्रम इसी संघर्ष का विस्तार है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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