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अपनों की कोई खोज-खबर नहीं, आंखों में आंसू, पर दूसरों की जिंदगी बचा रहे बाढ़ पीड़ित; नेपाल में दिखी इंसानियत की मिसाल

Nepal Flood: नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बचे कई लोग अपने प्रियजनों को खोने का दुख सहने और परिवार के लापता सदस्यों की तलाश करने के बावजूद, आपदा से प्रभावित दूसरों की मदद में जुट गए।

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नेपाल में तेजी से चल रहा राहत-बचाव कार्य

Photo : AP

Nepal Flood: नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बचे कई लोग, अपने प्रियजनों को खोने का दुख सहने और परिवार के लापता सदस्यों की तलाश करने के बावजूद, आपदा से प्रभावित दूसरों की मदद के लिए फिर से राहत कार्यों में जुट गए हैं। सुदीप कुमार न्यूपाने 26 अगस्त को आई बाढ़ में बच गए, लेकिन उनके छोटे भाई और एक करीबी साथी बह गए।

आंखों में आंसू फिर भी नहीं रुके कदम

'द काठमांडू पोस्ट' अखबार की शनिवार की खबर के अनुसार, दो दिन तक शोक मनाने के बाद न्यूपाने (31) राहत कार्यों में शामिल हो गए और रसुवा में विस्थापित लोगों को खाना और दूसरी मदद पहुंचाने में सहायता की। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, जिसमें 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि लगभग 5,000 लोग अब भी लापता हैं।

न्यूपाने ग्रामीणों को आने वाली बाढ़ के बारे में चेतावनी दे रहे थे, तभी वे अपने 27-वर्षीय भाई प्रदीप और एक परिचित जनक के साथ बाढ़ के तेज बहाव की चपेट में आ गए। बाढ़ के आने की चेतावनी मिलने के बाद तीनों आदमी सुरक्षित जगह की ओर तेजी से भाग रहे थे। इसके कुछ ही देर बाद बाढ़ आ गई और प्रदीप और जनक को बहा ले गई। न्यूपाने पहाड़ी की ओर भागकर बच गए। दो दिन तक शोक मनाने के बाद, न्यूपाने राहत कार्यों में वापस लौट आए, क्योंकि बेघर हुए लोगों को खाने और रहने की जगह की जरूरत थी और स्थानीय सरकारी इकाई में कर्मचारियों की कमी थी।

बाढ़ में बचे लोग बने 'मसीहा'

अखबार के अनुसार, उन्होंने कहा, "मैं किस्मत से बच गया। जब तक मैं जिंदा हूं, समाज और लोगों की सेवा करता रहूंगा।" 'ऑनलाइनखबर' न्यूज पोर्टल की खबर के मुताबिक, पड़ोसी नुवाकोट में सुचित जोशी खोज और बचाव कार्यों में मदद कर रहे हैं, जबकि उनके परिवार के चार सदस्य- उनकी पत्नी, सात साल की बेटी, भाभी और भतीजा- अब भी लापता हैं। तलाश अभियान के दौरान, जोशी को उनके चाचा तथा एक और भतीजा मिला।

इसके बाद उनकी तलाशी का काम एक बड़े बचाव अभियान में बदल गया तथा उनकी टीम में पांच और लोग शामिल हो गए। इस समूह ने बाढ़ में फंसे लोगों की मदद की और एक बुजुर्ग महिला को बचाया, जो अपने घर के सामने बाढ़ के पानी में फंस गई थी; उन्होंने उसे सुरक्षित जगह पहुंचाया।

जोशी सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर अपने रिश्तेदारों की तलाश करते रहे हैं। तलाशी अभियान के दौरान त्रिशूली नदी से तीन शव बरामद किए गए, लेकिन वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे और उनकी पहचान नहीं हो सकी। अपने परिजनों की तलाश के बीच जोशी आपदा से प्रभावित अन्य लोगों की मदद भी लगातार कर रहे हैं। समाचार पोर्टल ने उनके हवाले से बताया, "मैं इस पीड़ा को सह रहा हूं और फिर भी बचाव कार्य जारी रखे हुए हूं।"

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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