कूटनीति या टकराव? ईरान बोला-दोनों के लिए तैयार, अमेरिका पर नहीं है भरोसा, अगर हमला हुआ तो...
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 12, 2026, 12:05 AM IST
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि सैन्य हमले या धमकियां किसी देश की तकनीकी प्रगति को नहीं रोक सकतीं। बातचीत के दौरान ही पिछले जून में ईरान पर हमला किया गया, जो तेहरान के लिए बेहद खराब अनुभव रहा। उनका देश अमेरिका से वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन अगर सैन्य हमला होता है तो वह पलटवार के लिए भी तैयार हैं।
डोनाल्ड ट्रंप और अयातुल्ला खामेनेई।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ कूटनीति जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन किसी भी नए सैन्य आक्रमण का जवाब देने के लिए भी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने साफ किया कि हाल के अनुभवों के चलते तेहरान को अब भी वाशिंगटन पर पूरा भरोसा नहीं है।
'सैन्य हमले या धमकियां किसी देश की तकनीकी प्रगति को नहीं रोक सकतीं'
उन्होंने रूस टुडे को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि राजनयिक समाधान के अलावा कोई विकल्प नहीं है।परमाणु संवर्धन की बात पर उन्होंने कहा कि सैन्य हमले या धमकियां किसी देश की तकनीकी प्रगति को नहीं रोक सकतीं। बातचीत के दौरान ही पिछले जून में ईरान पर हमला किया गया, जो तेहरान के लिए बेहद खराब अनुभव रहा।
'ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण'
विदेश मंत्री ने दोहराया कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और यह देश के संप्रभु अधिकारों के तहत आता है। उन्होंने बताया कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए सामान्यतः 5 प्रतिशत से कम संवर्धित ईंधन की जरूरत होती है, जबकि तेहरान अनुसंधान रिएक्टर में चिकित्सा आइसोटोप उत्पादन के लिए 20 प्रतिशत संवर्धन का उपयोग किया जाता है। अराघची ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का आश्वासन देने को तैयार है, बशर्ते दोनों पक्षों में सद्भावना हो।
अमेरिका के साथ बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक सीमित
हालांकि, उन्होंने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गठबंधनों पर किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया।उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहेगी और अन्य शर्तें स्वीकार्य नहीं हैं।
अगर ईरान पर हमला हुआ तो...
साथ ही, उन्होंने वार्ता विफल होने की स्थिति में ईरान की आत्मरक्षा की तत्परता पर भी बल दिया। अराघची ने कहा कि हम कूटनीतिक समाधान के लिए उतने ही तैयार हैं जितना कि किसी भी नए आक्रमण के खिलाफ अपनी रक्षा करने के लिए। अराघची ने चेतावनी दी कि यदि ईरान पर दोबारा हमला हुआ तो वह क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल की बमबारी के बाद ईरान की सैन्य तैयारियों में मात्रा और गुणवत्ता दोनों स्तर पर सुधार हुआ है।
'बेंजामिन नेतन्याहू युद्ध भड़काने वाले'
इस दौरान अराघची ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भी आलोचना की। उन्होंने नेतन्याहू को युद्ध भड़काने वाला करार दिया, जो वाशिंगटन को एक व्यापक संघर्ष में घसीटना चाहता है।
अब हम वार्ता और जंग दोनों के लिए तैयार
बढ़ते तनाव के बावजूद, अराघची ने संकेत दिया कि अमेरिकी वार्ताकारों के साथ हालिया बातचीत से युद्ध से बचने में साझा हित का पता चलता है। उन्होंने कहा कि वार्ता को लेकर अगर वे गंभीर हैं, तो हम भी गंभीर हैं, लेकिन वाशिंगटन को यह सुनिश्चित करना होगा कि बातचीत के साथ-साथ कोई सैन्य कार्रवाई न हो। हमने युद्ध और कूटनीति से सबक सीख लिया है। अब हम दोनों के लिए तैयार हैं।
बेंजामिन नेतन्याहू ने की मार्को रूबियो से मुलाकात
इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दो विशेष अमेरिकी दूतों, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात की है। एक पोस्ट में उन्होंने बुधवार को कहा ईरान वार्ता को लेकर चर्चा की गई। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चाहते हैं कि वार्ता का दायरा बढ़ाकर उसमें ईरान की मिसाइलों और क्षेत्रीय गुटों को भी शामिल किया जाए, और उन्होंने ट्रंप से तेहरान से और अधिक मांग करने का आग्रह किया है।
ट्रंप ने कही ये बात
वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनका मानना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौता चाहता है और बातचीत आशाजनक रही है, हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान समझौते पर पहुंचने में विफल रहता है और हथियारों का विकास जारी रखता है तो इसके "बहुत गंभीर परिणाम" होंगे।
