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क्या ईरान को मिला मक्का डिफेंस पैक्ट में शामिल होने का न्योता, किसने किया दावा?

इस सनसनीखेज दावे का मुख्य स्रोत ईरान का संसदीय मीडिया है। ईरानी संसद की आधिकारिक समाचार एजेंसी खाना मिल्लत के प्रमुख मेहदी रहीमी ने लेबनान स्थित समाचार नेटवर्क अल-मयादीन (Al-Mayadeen) से बात करते हुए यह दावा किया।

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क्या ईरान को मिला मक्का डिफेंस पैक्ट का न्योता?

Photo : AP

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध और सैन्य तनाव के बीच एक बहुत बड़ी कूटनीतिक हलचल की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान द्वारा बनाए गए नए सुरक्षा गठबंधन 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' (Mecca Joint Defence Agreement) में शामिल होने के लिए ईरान को औपचारिक न्योता दिया गया है। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल सकता है।

किसने किया यह दावा?

इस सनसनीखेज दावे का मुख्य स्रोत ईरान का संसदीय मीडिया है। ईरानी संसद की आधिकारिक समाचार एजेंसी खाना मिल्लत के प्रमुख मेहदी रहीमी ने लेबनान स्थित समाचार नेटवर्क अल-मयादीन (Al-Mayadeen) से बात करते हुए यह दावा किया। रहीमी ने दावा किया कि ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है और तेहरान इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के देश अब एक "क्षेत्रीय सुरक्षा छत्र" बनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। रहीमी के अनुसार, यह ईरान के लिए एक वैचारिक जीत है क्योंकि तेहरान लंबे समय से बाहरी शक्तियों (अमेरिका) के हस्तक्षेप के बिना क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की वकालत करता रहा है।

हालांकि यह खबर तेजी से वायरल हो रही है, लेकिन इसमें कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलू भी ध्यान देने योग्य हैं। खबर लिखे जाने तक ईरान के विदेश मंत्रालय या वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व ने इस न्योते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मक्का पैक्ट के मूल हस्ताक्षरकर्ता देशों—सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए में से किसी भी सरकार ने सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की है कि उन्होंने ईरान को यह न्योता भेजा है।

तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान गठबंधन

तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने 7 अगस्त 2026 को इस मक्का रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह पैक्ट नाटो (NATO) के 'अनुच्छेद 5' की तर्ज पर काम करता है, जिसके तहत किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ सशस्त्र हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा।

अमेरिका के लिए बड़ा झटका

अमेरिकी प्रशासन जहां ईरान को आर्थिक और सैन्य रूप से पूरी तरह अलग-थलग करने और "इकोनॉमिक D-Day" की रणनीति पर काम कर रहा है, वहीं अगर अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी (सऊदी अरब, तुर्किए, पाकिस्तान) ईरान को सुरक्षा घेरे में लाते हैं, तो यह वाशिंगटन की नीति को सीधा झटका होगा। अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान सऊदी अरब और ईरान के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में अगर दोनों देश एक ही रक्षा समझौते के तहत एक साथ आते हैं, तो यह मध्य पूर्व के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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