दुनिया

Underground Cities in the World: धरती के नीचे छिपे हैं पूरे के पूरे शहर, कहीं हजारों लोगों की पनाहगाह तो कहीं चलता है आधुनिक कारोबार

आमतौर पर शहरों की पहचान उनकी ऊंची इमारतों और व्यस्त सड़कों से होती है, लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे शहर भी हैं जो जमीन के नीचे बसे हैं। सुरक्षा, युद्ध, मौसम और सीमित जमीन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बनाए गए ये भूमिगत शहर मानव की अद्भुत सोच और तकनीकी कौशल को दर्शाते हैं। आइए, दुनिया के ऐसे सात अनोखे भूमिगत शहरों के बारे में जानते हैं, जो आज भी अपने रहस्य और इतिहास से लोगों को हैरान करते हैं।

Image

धरती के नीचे छिपा एक और संसार (AI फोटो)

Underground Cities in the World: एक शहर वह है जिसे हम रोज देखते हैं, जिसमें हम रहते हैं और कभी-कभी उसे छोड़कर दूसरे शहर का रुख करते हैं। लेकिन क्या आपने ऐसे शहरों के बारे में सुना है जो धरती के नीचे बसे हैं? धरती के नीचे बसाए गए शहर मानव सभ्यता की अद्भुत इंजीनियरिंग और कल्पनाशीलता का उदाहरण हैं। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक दौर तक, लोगों ने सुरक्षा और बेहतर जीवन के लिए भूमिगत बस्तियों का निर्माण किया है। इन शहरों का इस्तेमाल युद्ध, दुश्मन के हमलों, अत्यधिक मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए किया जाता था। कुछ भूमिगत शहरों को परमाणु हमलों जैसी गंभीर परिस्थितियों में सुरक्षित रहने के उद्देश्य से भी तैयार किया गया। इसके अलावा, बढ़ती आबादी और सीमित जमीन के बीच शहरी क्षेत्र का बेहतर उपयोग करना भी इनके निर्माण की एक बड़ी वजह रही है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद ऐसे सात अनोखे भूमिगत शहर (Underground Cities in the World) आज भी अपने इतिहास, वास्तुकला और रहस्यमयी संरचनाओं से लोगों को आकर्षित करते हैं। तो आइए जानें इनके बारे में।

Derinkuyu, Turkey

डेरिंक्यु, कतुर्की

डेरिंक्यु, कप्पाडोसिया, तुर्की

डेरिंक्यु दुनिया के सबसे प्रसिद्ध प्राचीन भूमिगत शहरों में गिना जाता है, जो तुर्की के कप्पाडोसिया क्षेत्र में मौजूद है। यह विशाल भूमिगत परिसर धरती की सतह से करीब 60 मीटर नीचे तक फैला हुआ है और माना जाता है कि यहां लगभग 20 हजार लोग एक साथ रह सकते थे। इसके निर्माण की शुरुआत ईसा पूर्व 8वीं सदी के आसपास मानी जाती है। भूमिगत शहर में रहने के कमरों के अलावा रसोई, तेल और शराब बनाने की सुविधाएं, अस्तबल तथा धार्मिक स्थलों की भी व्यवस्था थी। यहां हवा के आवागमन के लिए विशेष वेंटिलेशन शाफ्ट बनाए गए थे, जिससे लंबे समय तक अंदर रहना संभव हो पाता था। कई सदियों तक डेरिंक्यु का इस्तेमाल युद्ध और बाहरी हमलों के दौरान लोगों को सुरक्षित रखने वाले आश्रय के रूप में किया जाता रहा।

नुशाबाद, ईरान

नुशाबाद ईरान के काशान शहर के नजदीक स्थित एक प्राचीन भूमिगत बस्ती है, जो कई स्तरों में धरती के नीचे बनी हुई है। इस अनोखे शहर का निर्माण मुख्य रूप से बाहरी हमलों और बेहद गर्म या प्रतिकूल मौसम से लोगों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से किया गया था। इसके अंदर संकरे रास्तों और गलियारों का जाल मौजूद है, जो अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ता है। बस्ती में खाद्य सामग्री रखने के लिए भंडारगृह, पानी जमा करने के लिए जलाशय और जरूरत के समय बाहर निकलने के लिए विशेष सुरंगें भी बनाई गई थीं। भूमिगत संरचना होने के बावजूद यहां सुरक्षा, आवागमन और दैनिक जरूरतों का खास ध्यान रखा गया था। नुशाबाद आज भी प्राचीन फारसी वास्तुकला, तकनीकी समझ और दूरदर्शी शहरी नियोजन का अनोखा उदाहरण माना जाता है।

नाउर्स, फ्रांस

नाउर्स उत्तरी फ्रांस में मौजूद एक ऐतिहासिक भूमिगत बस्ती है, जिसकी जड़ें मध्ययुगीन काल तक जाती हैं। इसे एक विशाल चॉक खदान को भूमिगत आवासीय परिसर में बदलकर तैयार किया गया था। यहां करीब 300 कमरे और 28 बड़े कक्ष बनाए गए थे, जहां युद्ध जैसी परिस्थितियों में लगभग 3,000 लोग शरण ले सकते थे। इतिहास में तीस वर्षीय युद्ध के दौरान भी इसका इस्तेमाल लोगों को सुरक्षित रखने के लिए किया गया था और बाद के समय में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी यह पनाहगाह बना। भूमिगत परिसर में रहने के स्थानों के साथ पानी की व्यवस्था के लिए कुएं और धार्मिक गतिविधियों के लिए पूजा स्थल भी मौजूद थे। इसके अलावा, हवा के आवागमन के लिए विशेष पाइप और रास्ते बनाए गए थे, जो इस भूमिगत शहर की उन्नत संरचना को दर्शाते हैं।

Orvieto, Italy

ओर्वियतो, इटली

ओर्वियतो, इटली

इटली के ओर्वियतो में फैला भूमिगत नेटवर्क शहर के प्राचीन इतिहास और इंजीनियरिंग कौशल की झलक देता है। ज्वालामुखीय चट्टान से बनी पहाड़ी के नीचे करीब 1,200 सुरंगों और कमरों का यह जटिल ढांचा विकसित किया गया था। माना जाता है कि इसकी शुरुआती संरचना एट्रस्कन सभ्यता के लोगों ने तैयार की थी। इन भूमिगत स्थानों का इस्तेमाल मुख्य रूप से अनाज, खाद्य सामग्री और शराब जैसी चीजों को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था। समय के साथ इस नेटवर्क का महत्व बढ़ा और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसे हवाई हमलों से बचने के लिए बम शेल्टर के तौर पर भी इस्तेमाल किया गया। आज इसका एक हिस्सा पर्यटकों के लिए खुला है, जहां लोग इन प्राचीन सुरंगों और भूमिगत कक्षों को करीब से देख सकते हैं।

डिशिया चेंग (भूमिगत शहर), बीजिंग, चीन

बीजिंग के डिशिया चेंग को 1960 के दशक में परमाणु हमले की स्थिति में लोगों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से एक विशाल बंकर के रूप में किया गया था। बताया जाता है कि इसका भूमिगत क्षेत्र करीब 85 वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ था और इसमें 10 लाख से अधिक लोगों के लंबे समय तक रहने की क्षमता थी। परिसर में अस्पताल, स्कूल, भोजनालय, अनाज भंडारण केंद्र और मनोरंजन के लिए अलग-अलग स्थान जैसी सुविधाओं की योजना बनाई गई थी। हालांकि, परमाणु हमले के दौरान इसका वास्तविक इस्तेमाल कभी नहीं हुआ, लेकिन इसकी संरचना उस समय की सुरक्षा रणनीति और आपातकालीन तैयारियों को दर्शाती है। आज डिशिया चेंग शीत युद्ध के दौर में बड़े पैमाने पर की गई भूमिगत नागरिक सुरक्षा योजनाओं की याद दिलाने वाली एक महत्वपूर्ण संरचना के रूप में जाना जाता है।

SubTropolis Kansas City

सबट्रोपोलिस, कैनसस सिटी, यूएसए

सबट्रोपोलिस, कैनसस सिटी, यूएसए

सबट्रोपोलिस अमेरिका के मिसूरी में कैनसस सिटी के पास स्थित एक विशाल भूमिगत व्यावसायिक परिसर है। इसे चूना पत्थर की पुरानी खदान को खोदकर तैयार किया गया है और इसे दुनिया के सबसे बड़े मानव निर्मित भूमिगत व्यावसायिक क्षेत्रों में गिना जाता है। यह परिसर 50 लाख वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है, जहां अलग-अलग तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती हैं। इसके अंदर गोदामों के साथ कार्यालय, विनिर्माण इकाइयां और डेटा सेंटर जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं। भूमिगत होने के कारण यहां का वातावरण बाहरी मौसम की तुलना में अधिक स्थिर रहता है, जिससे तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, जमीन के नीचे स्थित होने से यह परिसर कई तरह के बाहरी खतरों से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है।

क्रिस्टल सिटी, अर्लिंगटन, वर्जीनिया, यूएसए

क्रिस्टल सिटी अमेरिका के वॉशिंगटन डी.सी. के बाहरी इलाके में विकसित एक आधुनिक भूमिगत शहरी व्यवस्था का उदाहरण है। यहां कार्यालयों, होटलों, आवासीय इमारतों, दुकानों और रेस्तरां को आपस में जोड़ने वाली भूमिगत सुरंगों का विस्तृत नेटवर्क मौजूद है। इन रास्तों के जरिए लाखों वर्ग फुट में फैले व्यावसायिक और आवासीय क्षेत्रों के बीच आसानी से आवाजाही की जा सकती है। भूमिगत नेटवर्क का एक बड़ा फायदा यह है कि लोगों को बारिश, तेज गर्मी, ठंड या अन्य खराब मौसम में खुले में ज्यादा समय नहीं बिताना पड़ता। इस व्यवस्था ने शहर के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़कर पैदल आवागमन को भी सुविधाजनक बनाया है। प्राचीन भूमिगत आश्रयों से लेकर आधुनिक कारोबारी परिसरों तक, धरती के नीचे की जगह आज भी सुरक्षित और उपयोगी शहरी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article