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इजराइल पर 200 मिसाइल दागने के बाद ईरान के राष्ट्रपति ने छोड़ा देश! कतर पहुंच बोले- 'हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन...'

Israel Iran Conflict:ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का कतर दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मध्य पूर्व के हालात बेहद गंभीर है और इजराइल कभी भी ईरान पर जवाबी हमला कर सकता है। इस बीच ईरानी राष्ट्रपति का कतर दौरा सवाल खड़े करता है।

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ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन

Photo : AP

Israel Iran Conflict: ईरान के हमले के बाद इजराइल चुप बैठा है। हालांकि, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने यह जरूर कहा है कि ईरान को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। जाहिर है इजराइल नई नई रणनीति बना रहा है। वह ईरान पर हमला कब और कहां करेगा, किसी को नहीं पता। इस बीच खबर है कि इजराइल पर 200 मिसाइलें दागने के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन कतर पहुंच गए हैं और यहां से उन्होंने इजराइल को एक बार फिर धमकी दी है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि ईरान जंग नहीं चाहता है, लेकिन इजरायल उनके देश के खिलाफ कार्रवाई करता है तो जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह टिप्पणी कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ मुलाकात के बाद की। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर कतर गए हैं। उनकी इस यात्रा का मकसद ईरान और कतर के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना है।

पर्दे के पीछे कोई और कहानी?

ईरानी राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मध्य पूर्व के हालात बेहद गंभीर है और इजराइल कभी भी ईरान पर जवाबी हमला कर सकता है। इस बीच ईरानी राष्ट्रपति का कतर दौरा सवाल खड़े करता है। मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि असल में ईरानी राष्ट्रपति की कतर यात्रा का मकसद जंग के हालातों के बीच समर्थन जुटाना है। वह चाहते हैं कि जब इजराइल हमला करते तो कतर उनके साथ खड़ा रहे।

नेतन्याहू ने दी थी बदला लेने की धमकी

ईरानी हमले के कुछ घंटों बाद ही इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक के दौरान कहा था कि ईरान ने आज रात एक बड़ी गलती की है, और उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। इजरायल के चैनल 13 टीवी समाचार ने बताया कि ईरान से कम से कम 200 जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं, जिससे पूरे देश में सायरन बजने लगे और लाखों लोग शेलटर्स की ओर भागे। ईरान का कहना है कि यह बमबारी हमास के राजनीतिक नेता इस्माइल हानिया, हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अब्बास निलफोरुशन की हत्याओं के जवाब में की गई। बता दें, ईरान हमास और हिबुल्लाह को खुलकर समर्थन देता आया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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