US Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। इस्लामाबाद में हुई पर्दे के पीछे की बातचीत के दौरान दोनों देश सीधे सैन्य टकराव के बेहद करीब आ गए थे। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने एक टीवी इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया कि कैसे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी युद्धपोत को ईरानी सेना ने निशाने पर ले लिया था और अमेरिका को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस्लामाबाद में 15 मिनट का अल्टीमेटम
गालिबाफ ने बताया कि वार्ता के दौरान जब अमेरिकी डेलिगेशन से होर्मुज जलडमरूमध्य में उनकी नौसैनिक गतिविधियों पर सवाल किया गया, तो माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अमेरिका का माइनस्वीपर (सुरंग हटाने वाला जहाज) अपनी जगह से जरा भी आगे बढ़ा, तो ईरानी सेना उसे तुरंत मार गिराएगी।
गालिबाफ के अनुसार, "अमेरिकी डेलिगेशन ने अपने जहाज को वापस मोड़ने का आदेश देने के लिए 15 मिनट का समय मांगा और ठीक वैसा ही किया।" ईरान का कहना है कि जलमार्ग में अमेरिकी सेना द्वारा बारूदी सुरंगें हटाने की कोशिश 'संघर्षविराम का उल्लंघन' है।
अमेरिका की 'नाकेबंदी' और ईरान का कड़ा रुख
ईरानी संसद अध्यक्ष ने अमेरिका द्वारा हाल ही में घोषित नौसैनिक नाकेबंदी (Blockade) को 'मुर्खतापूर्ण और अज्ञानी निर्णय' करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में है और अमेरिका की कोई भी मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादा ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत के अगले दौर से फिलहाल इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन अपनी 'अत्यधिक मांगों' (Maximalist demands) को छोड़ने को तैयार नहीं है, विशेष रूप से परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर। ईरान ने अमेरिका को संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) ट्रांसफर करने की संभावना को भी पूरी तरह सिरे से खारिज कर दिया है।
युद्ध की भयावह तस्वीर: अब तक 3,468 मौतें
ईरान के 'फाउंडेशन ऑफ शहीद एंड वेटरन्स अफेयर्स' ने संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक हुए नुकसान के आंकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के अंत से जारी अमेरिकी-इजरायली हमलों में अब तक कम से कम 3,468 लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा पहले के अनुमानों से अधिक है, जो इस युद्ध की गंभीरता को दर्शाता है।
