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US Spelling Bee: 11 शब्दों की स्पेलिंग लिख 'देव शाह' बने स्पेलिंग बी चैंपियन, आठवीं का छात्र हो गया मालामाल

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 2, 2023, 01:11 PM IST

Dev Shah wins National Spelling Bee: देव शाह ने तीसरी बार इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। इससे पहले, वह 2019 और 2021 में इस प्रतियोगिता में शामिल हो चुके हैं। कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण 2020 में इस प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया गया था।

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देव शाह

Photo : Twitter

Dev Shah wins National Spelling Bee: अमेरिका के फ्लोरिडा निवासी भारतीय-अमेरिकी देव शाह ने प्रतिष्ठि स्क्रिप्स 95वीं नेशनल स्पेलिंग बी चैंपियनशिप 2023 जीत ली है। उन्होंने यह उपलब्धि 11 शब्दों की स्पेलिंग 'Psammophile' की वर्तनी सही करते हुए हासिल की है। देव शाह को इस उपलब्धि के लिए 50 हजार डॉलर का नकद इनाम दिया गया है।

मैरीलैंड के नेशनल हार्बर में आयोजित प्रतियोगिता जीतने के बाद शाह ने कहा, यह अद्भुत है... मेरे पैर अभी भी कांप रहे हैं। उन्होंने कहा, मैंने पिछले तीन महीने में कई त्याग किए और मुझे इसका कोई पछतावा नहीं है। मुझे अपने सभी त्यागों का फल मिला है। समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट की खबर के अनुसार, शाह ने ‘सैमोफाइल’ का सही हिज्जे बताकर इस प्रतियोगिता में जीत दर्ज की। ‘सैमोफाइल’ रेतीले क्षेत्रों में पाए जाने वाले पौधे या जानवर होते हैं।

शब्द को तुंरत पहचान गए थे शाह

समाचार पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की खबर के अनुसार, शाह तुरंत ही इस शब्द को पहचान गए थे, लेकिन फिर भी पूरी तरह से संतुष्ट होने के लिए उन्होंने इससे जुड़े कुछ सवाल पूछे। उन्होंने पूछा, ग्रीक में सैमो का मतलब रेत है? और फाइल का मतलब प्यार है? बाथिपिटोमीटर, टॉल्सेस्टर, रोमैक, एगेग्रस, शिस्टोर्राचिस, पोलियोरेक्टिक्स, पेरिओसी, एक्होरेशन, कोकोमैट और अर्डोइ वे अन्य शब्द हैं, जिनके शाह ने प्रतियोगिता के दौरान सही स्पेलिंग बताए।

बीते एक साल से ले रहे थे ट्रेनिंग

समाचार पत्र यूएसए टुडे की खबर के अनुसार, स्कॉट रेमर एक पूर्व स्पेलर हैं, जिन्होंने फाइनल में पहुंचे छह छात्रों को प्रशिक्षण दिया था। रेमर ने बताया कि वह शाह के साथ पिछले साल से काम कर रहे हैं। रेमर ने कहा, ‘देव की एक चीज जो वास्तव में मुझे प्रभावित करती है, वह है उनकी दृढ़ता और प्रतिबद्धता। वह बेहद परिपक्व व आत्म विश्वास से भरे हैं।

तीसरी बार प्रतियोगिता में लिया हिस्सा

शाह ने तीसरी बार इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। इससे पहले, वह 2019 और 2021 में इस प्रतियोगिता में शामिल हो चुके हैं। कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण 2020 में इस प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया गया था। 14 वर्ष की आयु होने के कारण प्रतियोगिता जीतने का शाह के पास यह आखिरी मौका था। शाह की जीत के बाद उनके माता-पिता बेहद भावुक नजर आए। उनकी मां ने कहा कि वह पिछले चार साल से इसके लिए मेहनत कर रहा था। प्रारंभिक दौर की प्रतियोगिता मंगलवार को आयोजित की गई, जबकि क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल बुधवार को हुए।

वर्जीनिया के अर्लिंगटन की रहने वाली शैर्लट वॉल्श (14) इस प्रतियोगिता में उपविजेता रहीं। स्पेलिंग बी में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के छात्र हिस्सा लेते हैं। यह शब्दों के सही हिज्जे बताने से जुड़ी प्रतियोगिता है। ‘नेशनल स्पेलिंग बी’ प्रतियोगिता की शुरुआत 1925 में की गई थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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