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पाकिस्तान में तड़के लगे भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर 5.2 रही तीव्रता, दूर तक थरथराई धरती

राष्ट्रीय भू-विज्ञान केंद्र के मुताबिक भूकंप का केंद्र जमीन से 135 किलोमीटर की गहराई पर था और इसकी उत्पत्ति फयाजाबाद, अफगानिस्तान से 138 किलोमीटर दक्षिणपूर्व में थी। रिपोर्टों के मुताबिक झटके महसूस होने के बाद लोग घरों से बाहर निकल आए।

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पाकिस्तान में आया 5.2 तीव्रता का भूकंप। तस्वीर-PTI

Earthquake in Pakistan: पाकिस्तान में शुक्रवार तड़के 5.2 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप के झटके दूर तक महसूस किए गए। राष्ट्रीय भू-विज्ञान केंद्र के मुताबिक भूकंप का केंद्र जमीन से 135 किलोमीटर की गहराई पर था और इसकी उत्पत्ति फयाजाबाद, अफगानिस्तान से 138 किलोमीटर दक्षिणपूर्व में थी। रिपोर्टों के मुताबिक झटके महसूस होने के बाद लोग घरों से बाहर निकल आए।

कम गहराई वाले भूकंप ज्यादा खतरनाक

ऐसे भूकंप जिनकी गहराई कम होती है वे गहरे भूकंप की तुलना में आम तौर पर ज्यादा खतरनाक होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कम गहरे भूकंपों से आने वाली सीस्मिक तरंगों को सतह तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है और वे ज्यादा तीव्र होती हैं। इससे जमीन ज्यादा हिलती है और इमारतों एवं ढांचों को ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इससे जान-माल का ज्यादा नुकसान भी होता है।

सीस्मिक रूप से एक्टिव जोन में स्थित है पाकिस्तान

अफगानिस्तान, पाकिस्तान और उत्तरी भारत दुनिया के सबसे ज्यादा सीस्मिक रूप से एक्टिव जोन में से एक में स्थित हैं। यहां इंडियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स मिलती हैं। इस इलाके में अक्सर हल्के से लेकर तेज भूकंप आते हैं, जो अक्सर फॉल्ट लाइनों के पास होने की वजह से बॉर्डर पार महसूस किए जाते हैं। पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में से है जो सीस्मिक रूप से एक्टिव हैं, जहां कई बड़े फॉल्ट आते हैं।

भूकंपों के लिए बहुत ज्यादा कमजोर बनाता है

यह टकराव वाला जोन देश को तेज भूकंपों के लिए बहुत ज्यादा कमजोर बनाता है। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे प्रांत यूरेशियन प्लेट के दक्षिणी किनारे पर हैं, जबकि सिंध और पंजाब इंडियन प्लेट के उत्तर-पश्चिमी किनारे पर हैं, जिससे अक्सर भूकंप आते रहते हैं। बलूचिस्तान, अरेबियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच एक्टिव बाउंड्री के पास है।

क्या होता है भूकंप

पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी प्लेटों में बंटी होती है। ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से हिलती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती, एक-दूसरे के ऊपर चढ़ती या एक-दूसरे से दूर होती हैं, तो सतह पर बहुत जोर का कम्पन होता है, इस कंपन को ही भूकंप कहते हैं।

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आलोक कुमार राव
आलोक कुमार राव Author

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारो... और देखें

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