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पाकिस्तान में इमरान की सेहत पर घमासान, पूर्व PM को निजी अस्पताल क्यों नहीं ले गई सरकार? शहबाज सरकार ने दी दलील

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को सरकार को निर्देश दिया था कि इमरान खान को रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल से दो दिन के भीतर निजी शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि उन्हें अगली सुनवाई, यानी 16 सितंबर तक अस्पताल में रखा जाए।

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पाकिस्तान में इमरान की सेहत पर घमासान।

Photo : PTI

पाकिस्तान सरकार ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद निजी अस्पताल के बजाय सरकारी अस्पताल ले जाने के मामले में उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का दावा है कि निजी शिफा इंटरनेशनल अस्पताल के बाहर PTI कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी के कारण सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके चलते इमरान खान को पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने शनिवार को कहा कि 73 वर्षीय इमरान खान का मेडिकल चेकअप पारदर्शी तरीके से कराया गया और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन किया। हालांकि, इससे पहले इमरान खान की बहन उज्मा खान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों पर अदालत के आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने निजी अस्पताल भेजने का दिया था आदेश

बता दें कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को सरकार को निर्देश दिया था कि इमरान खान को रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल से दो दिन के भीतर निजी शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि उन्हें अगली सुनवाई, यानी 16 सितंबर तक अस्पताल में रखा जाए। लेकिन अधिकारियों ने इमरान खान को शिफा अस्पताल के बजाय PIMS पहुंचाया। वहां मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें फिट बताया, जिसके बाद उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इसी फैसले को लेकर इमरान खान के परिवार और PTI ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

'PTI ने खुद पैदा की सुरक्षा की स्थिति'

वहीं, इमरान खान के परिवार के आरोपों पर सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने आरोप लगाया कि शिफा अस्पताल के आसपास और वहां जाने वाले रास्ते पर PTI समर्थकों की मौजूदगी के कारण हालात बिगड़े। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने वहां सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाए और सुरक्षा बैरिकेड हटाने की कोशिश की। तरार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल जांच को राजनीतिक उद्देश्यों से दूर रखने की बात कही थी, लेकिन PTI और इमरान खान के परिवार की गतिविधियों के कारण स्थिति राजनीतिक हो गई।

उन्होंने कहा कि अगर किसी ने अदालत की अवमानना की है तो वह इमरान खान की बहन और उनकी पार्टी है।” उनका आरोप था कि कार्यकर्ताओं को इकट्ठा कर और इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देकर PTI ने अधिकारियों के लिए मुश्किलें पैदा कीं।

सरकार बोली- आदेश का पालन हुआ

पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मूल उद्देश्य पूरा किया। उनके मुताबिक, इमरान खान की मेडिकल जांच कराई गई, जांच पारदर्शी तरीके से हुई और उनकी बहन भी वहां मौजूद थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिफा अस्पताल के डॉक्टर जांच प्रक्रिया में शामिल थे। तरार ने कहा कि इमरान खान का इलाज कभी नहीं रोका गया है और जरूरत पड़ने पर उनका उपचार आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने PTI नेतृत्व और इमरान खान के परिवार से स्वास्थ्य और कानूनी मामलों को राजनीति से दूर रखने की अपील की।

आंखों की बीमारी को लेकर लंबे समय से चिंता

इमरान खान के स्वास्थ्य को लेकर उनके परिवार और समर्थक लंबे समय से चिंता जता रहे हैं। इस साल की शुरुआत में उनकी आंखों में राइट सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन की समस्या का पता चला था। इसके बाद उन्हें कई बार PIMS ले जाया गया। जेल प्रशासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनकी आंखों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है और उनकी दृष्टि अब लगभग सामान्य है। इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में विभिन्न मामलों में बंद हैं। अब उन्हें निजी अस्पताल के बजाय सरकारी अस्पताल ले जाने को लेकर सरकार, PTI और इमरान खान के परिवार के बीच नया राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है।
Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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