पाकिस्तान सरकार ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद निजी अस्पताल के बजाय सरकारी अस्पताल ले जाने के मामले में उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का दावा है कि निजी शिफा इंटरनेशनल अस्पताल के बाहर PTI कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी के कारण सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी, जिसके चलते इमरान खान को पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने शनिवार को कहा कि 73 वर्षीय इमरान खान का मेडिकल चेकअप पारदर्शी तरीके से कराया गया और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन किया। हालांकि, इससे पहले इमरान खान की बहन उज्मा खान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों पर अदालत के आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने निजी अस्पताल भेजने का दिया था आदेश
बता दें कि पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को सरकार को निर्देश दिया था कि इमरान खान को रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल से दो दिन के भीतर निजी शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि उन्हें अगली सुनवाई, यानी 16 सितंबर तक अस्पताल में रखा जाए। लेकिन अधिकारियों ने इमरान खान को शिफा अस्पताल के बजाय PIMS पहुंचाया। वहां मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें फिट बताया, जिसके बाद उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इसी फैसले को लेकर इमरान खान के परिवार और PTI ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।
'PTI ने खुद पैदा की सुरक्षा की स्थिति'
वहीं, इमरान खान के परिवार के आरोपों पर सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने आरोप लगाया कि शिफा अस्पताल के आसपास और वहां जाने वाले रास्ते पर PTI समर्थकों की मौजूदगी के कारण हालात बिगड़े। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने वहां सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाए और सुरक्षा बैरिकेड हटाने की कोशिश की। तरार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल जांच को राजनीतिक उद्देश्यों से दूर रखने की बात कही थी, लेकिन PTI और इमरान खान के परिवार की गतिविधियों के कारण स्थिति राजनीतिक हो गई।उन्होंने कहा कि अगर किसी ने अदालत की अवमानना की है तो वह इमरान खान की बहन और उनकी पार्टी है।” उनका आरोप था कि कार्यकर्ताओं को इकट्ठा कर और इस मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देकर PTI ने अधिकारियों के लिए मुश्किलें पैदा कीं।
