Donald Trump Gaza Deal Hamas Disarmament: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पट्टी में महीनों से ठप पड़ी शांति वार्ता को लेकर एक बड़े समझौते का दावा किया है। ट्रुथ सोशल पर जारी अपने बयान में ट्रंप ने घोषणा की कि उनके नेतृत्व वाले 'बोर्ड ऑफ पीस' ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निःशस्त्रीकरण के लिए एक ऐतिहासिक सहमति बना ली है। ट्रंप ने इसे अपने '20-पॉइंट शांति प्लान' को लागू करने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। हालांकि, जमीनी हकीकत और विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना को धरातल पर उतारने से पहले 6 ऐसी मुख्य अड़चनें हैं जो पूरे शांति समझौते को किसी भी वक्त विफल कर सकती हैं।
क्या है ट्रंप का नया ऐलान?
ट्रंप के अनुसार, यह समझौता चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। जैसे-जैसे हमास और अन्य लड़ाके अपने हथियार डालेंगे, इजरायली सेना गाजा से पीछे हटती जाएगी। घोषणा के मुख्य बिंदु:
अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती: गाजा में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 'इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स' (ISF) को एक नए फिलिस्तीनी पुलिस बल के साथ तैनात किया जाएगा।
नई नागरिक सरकार का गठन: गाजा का प्रशासनिक नियंत्रण एक नई फिलिस्तीनी तकनीकी सरकार (NCAG) को सौंपा जाएगा जो 'बोर्ड ऑफ पीस' के साथ मिलकर काम करेगी।
मध्यस्थों का आभार: ट्रंप ने इस वार्ता को अंजाम तक पहुंचाने के लिए मिस्र, कतर और तुर्की की मध्यस्थता की सराहना की।
6 बड़ी अड़चनें जो इस शांति समझौते को बिगाड़ सकती हैं
1. इजरायल की ओर से अभी तक आधिकारिक मुहर नहीं
यद्यपि हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि वे निःशस्त्रीकरण योजना पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं, लेकिन इजरायल ने इस सौदे को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। रॉयटर्स के अनुसार, इजरायली अधिकारियों का मानना है कि प्रस्तावित शर्तें उनके लिए पूरी तरह से संतोषजनक नहीं हैं।
2. हमास का मुख्य हथियारों का जखीरा शुरुआती हस्तांतरण से बाहर
समझौते के शुरुआती 2 हफ्तों में केवल गाजा की नियमित पुलिस अपने हथियार बोर्ड ऑफ पीस-समर्थित प्रशासन को सौंपेगी। हमास के मुख्य लड़ाके, रोकेट, एंटी-टैंक मिसाइलें और उनकी सैकड़ों किलोमीटर लंबी सुरंगों को नष्ट करने का काम बाद के चरणों में होगा, जिसमें 200 से 350 दिनों का समय लग सकता है। यह लंबा समय विवादों की नई वजह बन सकता है।
3. इजरायल द्वारा हमास के अनुपालन पर संदेह
इजरायली सेना की वापसी को हमास के हथियार समर्पण से जोड़ा गया है। इजरायल को गहरा संदेह है कि हमास अपने मुख्य हथियारों और सुरंगों को छिपा सकता है। यदि इजरायल को जरा भी संदेह हुआ, तो वह अपनी सेना की वापसी रोक सकता है।

गाजा में इजरायल के हमलों में बुरा हाल
4. हथियारों के पूर्ण खात्मे की स्वतंत्र पुष्टि का अभाव
गाजा के मलबे और विशाल सुरंग नेटवर्क के बीच यह कौन जांचेगा कि हमास के सारे हथियार नष्ट हो चुके हैं? इसके लिए किसी स्पष्ट और सर्वमान्य निरीक्षण तंत्र का न होना सबसे बड़ी कमजोरी है, जिससे दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगा सकते हैं।
5. नई फिलिस्तीनी नागरिक सरकार के सामने शासन की चुनौती
युद्ध से तबाह हो चुके गाजा में नई गैर-राजनीतिक फिलिस्तीनी सरकार (NCAG) को काम करना होगा। यदि हमास पर्दे के पीछे से अपना प्रभाव बनाए रखता है या स्थानीय गुट नई सरकार को मान्यता देने से मना करते हैं, तो शासन व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी।
6. ईरान का हस्तक्षेप और जारी सैन्य हिंसा
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने हमास को इस समझौते को स्वीकार न करने की सलाह दी थी। इसके अलावा, गाजा में इजरायली हमले और गोलीबारी जारी है। निःशस्त्रीकरण की प्रक्रिया के दौरान यदि हिंसक घटनाएं होती हैं, तो शांति वार्ता के पटरी से उतरने का खतरा बना रहेगा।
