US military bases in Middle east: बीते 28 फरवरी को अपने ऊपर अमेरिका और इजराइल का हमला होने के बाद ईरान इन दोनों देशों को जवाब देता आया है। इजराइल में उसने जहां ड्रोन एवं मिसाइलों से हमले किए। वहीं, उसने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिकी सैन्य बेसों पर ईरान के हमलों पर अब 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट आई है जिसमें कहा गया है कि ईरान के हमलों के बाद यूएस के कम से कम 13 सैन्य ठिकाने एक तरह से 'निर्जन' हो गए हैं, वहां कोई नहीं रह रहा। ईरानी हमलों के खतरे को देखते हुए इन सैन्य बेस को छोड़कर अमेरिकी सैनिक चले गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये सैनिक वापस अमेरिका तो नहीं गए लेकिन वे मध्य पूर्व के होटलों एवं दूसरी जगहों से काम कर रहे हैं। अधिकारी इसे 'रिमोट वार' बता रहे हैं।
28 फरवरी को इन सैन्य बेस पर हुए हमले
हमले वाले दिन यानी 28 फरवरी को ईरान ने सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस, कुवैत में अली अल सालेम एयर बेस, कुवैत में कैंप ब्यूहरिंग बेस और कतर में अल उदेद एयर बेस सहित मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन एवं मिसाइलों से हमले किए। इनमें कतर का अल उदेद एयरबेस मध्य पूर्व में यूएस का सबसे बड़ा मिलिट्री बेस है। इसके बाद एक मार्च को ईरानी सेना ने कुवैत में एक पोर्ट पर हमला किया। इस हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई। एक मार्च को ही ईरान ने सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया। इस हमले में एक अन्य सैनिक की जान गई। इस तरह युद्ध में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर सात हो गई।
कतर में सेंट्रल कमांड का मुख्यालय
आने वाले दिनों में ईरान पश्चिम एशिया में जहां पर भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, वहां हमले किए। इन हमलों में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों का काफी नुकसान पहुंचा। कतर में उल उदेद सैन्य बेस अमेरिका की सेंट्रल कमांड का मुख्यालय है। यहां पर अमेरिका के अर्ली वार्निंग सिस्टम को नुकसान पहुंचा। बहरीन में ईरान के ड्रोन हमले में यूएस के पांचवीं फ्लीट मुख्यालय में संचार उपकरणों को नुकसान पहुंचा जबिक सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर ईरान के मिसाइल एवं ड्रोन हमलों में संचार उपकरणों एवं री-फ्यूलिंग टैंकर्स क्षतिग्रस्त हुए। जॉर्डन के मुवाफाक साल्टी एयर बेस में एयर डिफेंस सेंसर को नुकसान पहुंचा।
रहने लायक नहीं रह गए 13 सैन्य बेस
न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरानी हमले इतने घातक हुए हैं कि पश्चिम एशिया में कम से कम 13 अमेरिकी सैन्य बेस रहने लायक नहीं रह गए हैं। सैन्य बेसों को हुए नुकसान को देखते हुए अमेरिकी बलों ने अपने मजबूत माने जाने वाले इन ठिकानों को छोड़ दिया है और वे होटल एवं ऑफिस में रहने लगे हैं। रिपोर्ट में अमेरिकी एवं सैन्य कर्मियों के हवाले से कहा गया है कि 'ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों के बाद पूरे इलाके में अमेरिकी सैनिकों को होटल एवं किराए के ऑफिस में भेजा गया।
अमेरिका ने होटलों में पहुंचाए सैनिक
रिपोर्ट के मुताबिक फाइटर पायलट एवं एयर क्रिउ ऑपरेशनल एयरफील्ड्स से तो काम कर रहे हैं लेकिन जमीनी अभियान चलाने वाली यूनिटें कम सुरक्षित वाली व्यवस्था में जाना पड़ा है। इसे 'रिमोट वार' कहा जा रहा है।' इसकी वजह से मध्य पूर्व में यूएस के युद्ध लड़ने की क्षमता में कमी आई है। न्यूयॉर्ट टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यूएस एयर फोर्स मास्टर सार्जेंट (रिटायर) वेस जे ब्रायंट ने कहा कि 'आप होटल की छत पर अपने सभी उपकरणों को नहीं रख सकते...यदि आप ऐसा करते भी हैं तो आप कुछ न कुछ खोएंगे।'
