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कतर के बाद ईरान के निशाने पर अबू धाबी, मिसाइल का मलबा गिरने के बाद गैस संयंत्र में कामकाज ठप

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल, जॉर्डन, इराक और उन खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इन हमलों से जान-माल का नुकसान हुआ है और वैश्विक बाजारों तथा विमानन सेवाओं पर भी असर पड़ा है।

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खाड़ी देशों के गैस संयंत्रों पर ईरान के हमले।

Photo : ANI

Iran target gas facility : ईरान के निशाने पर अब खाड़ी देशों के गैस संयंत्र आ गए हैं। कतर के बाद उसने अबू धाबी के गैस संयंत्र पर हमले किए हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि उसने अपने हाबशान गैस संयंत्र में कामकाज रोक दिया है। हवा में मिसाइल को निष्क्रिय किए जाने के बाद उसका मलबा संयंत्र के भीतर गिरा जिसके बाद अधिकारियों ने संयंत्र में गैस उत्पादन रोक दिया। बाब ऑयल फील्ड को भी निशाना बनाया गया।

नए हमलों से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

एक बयान में, अबू धाबी मीडिया कार्यालय ने कहा कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ है। क्षेत्रीय तनाव तब से लगातार बढ़ता जा रहा है जब इजराइल और अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमला किया था, जिसमें अब तक लगभग 1,300 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें उस समय के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे।

खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए ईरान के हमले

ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल, जॉर्डन, इराक और उन खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इन हमलों से जान-माल का नुकसान हुआ है और वैश्विक बाजारों तथा विमानन सेवाओं पर भी असर पड़ा है।

'संघर्ष के दायरे को बढ़ा रहा ईरान'

कतर ने कहा कि रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए मिसाइल हमले उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्र की स्थिरता के लिए 'सीधा खतरा' हैं। देश के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'ईरानी पक्ष अपनी उकसावे वाली नीतियों को जारी रखे हुए है, जो क्षेत्र को खाई की ओर धकेल रही हैं और इस संकट में शामिल न होने वाले देशों को भी संघर्ष के दायरे में खींच रही हैं।'

जवाब देने का अपना अधिकार सुरक्षित रखते हैं-कतर

बयान में आगे कहा गया कि कतर 'जवाब देने का अपना अधिकार सुरक्षित रखता है' और अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए 'सभी आवश्यक कदम उठाने में हिचकिचाएगा नहीं।'

108 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर तेल की कीमत

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमत 108 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच जाने के साथ (युद्ध की शुरुआत के बाद से 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि) गैसोलीन और अन्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जिससे दुनिया भर के उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव पड़ रहा है। ट्रंप प्रशासन तेल की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने के तरीकों की तलाश कर रहा है, बुधवार को अमेरिकी वित्त विभाग ने वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी और कहा कि अमेरिकी कंपनियों को देश की सरकारी तेल और गैस कंपनी के साथ व्यापार करने की अनुमति दी जाएगी।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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