नेपाल के गुरखा परिवार से ब्रिटेन की एलीट SBS तक का प्रेरणादायक सफर
के2 पर पहली सफल विंटर समिट करने वाली नेपाली टीम के अहम सदस्य बने
उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर नेटफ्लिक्स ने बनाई '14 Peaks: Nothing Is Impossible' डॉक्यूमेंट्री
'गिविंग अप इज नॉट इन द ब्लड सर', यानी, हार मानना मेरे खून में नहीं। सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम रील्स पर आपने यह मशहूर मोटिवेशनल डायलॉग जरूर सुना होगा, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस जज्बे को दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले शख्स थे निर्मल 'निम्स' पुर्जा। दुनिया की 8,000 मीटर (26,300 फीट) से अधिक ऊंचाई वाली सभी 14 चोटियों को महज 6 महीने और 6 दिन में फतह कर इतिहास रचने वाले निर्मल पुर्जा अब इस दुनिया में नहीं रहे।
पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन में उनकी मौत हो गई। इस हादसे में अभियान दल के सभी 10 सदस्यों की जान चली गई। विडंबना यह रही कि जिन पहाड़ों से उन्हें सबसे ज्यादा मोहब्बत थी, उन्हीं की गोद में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। अपने साहस, विनम्रता और अटूट आत्मविश्वास से उन्होंने दुनिया भर के लाखों लोगों को प्रेरित किया।
हिमस्खलन में निर्मल पुर्जा सहित 10 लोगों की मौत हो गई। nimsdai insta handle
गुरखा परिवार से ब्रिटेन की एलीट SBS तक का सफर
निर्मल (Nirmal Purja) का 25 जुलाई 1983 को नेपाल के म्याग्दी जिले में एक साधारण गोरखा परिवार में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट में थे, जबकि उनके दोनों भाई ब्रिटिश गोरखा में शामिल थे। युवावस्था में निर्मल ने भी ब्रिटिश आर्मी की रॉयल गोरखा राइफल्स (Royal Gurkha Rifles) जॉइन की।
अपनी असाधारण फिटनेस, अनुशासन और मानसिक मजबूती के दम पर वह बाद में ब्रिटेन की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन स्पेशल फोर्स स्पेशल बोट सर्विस (SBS) का हिस्सा बने। SBS में चयन दुनिया की सबसे कठिन सैन्य प्रक्रियाओं में गिना जाता है।
6 महीने 6 दिन में रच दिया इतिहास
साल 2019 में निर्मल पुर्जा ने 'प्रोजेक्ट पॉसिबल (Project Possible)' की शुरुआत की। उनका लक्ष्य था दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों को फतह करना। जहां इस उपलब्धि को हासिल करने में पर्वतारोहियों को पहले करीब 8 साल लगते थे, वहीं निर्मल ने यह कारनामा सिर्फ 6 महीने और 6 दिन में पूरा कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। यह उपलब्धि आज भी पर्वतारोहण के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है।
दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों को फतह कर चुके थे निर्मल। nimsdai insta handle
एवरेस्ट की वायरल तस्वीर से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा
निर्मल पुर्जा ने कई बार माउंट एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई की। उनकी सबसे चर्चित तस्वीर वह रही, जिसमें एवरेस्ट की चोटी से ठीक पहले पर्वतारोहियों की लंबी कतार दिखाई दे रही थी। यह तस्वीर दुनिया भर में वायरल हुई और इसने एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़, व्यावसायिक पर्वतारोहण और सुरक्षा को लेकर वैश्विक बहस छेड़ दी।
दुनिया के सबसे कठिन पर्वतों में गिने जाने वाले K2 पर लंबे समय तक सर्दियों में कोई भी सफलतापूर्वक नहीं चढ़ पाया था। साल 2021 में निर्मल पुर्जा और नेपाली पर्वतारोहियों की टीम ने पहली बार सर्दियों में K2 फतह कर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि आधुनिक पर्वतारोहण के सबसे बड़े मील के पत्थरों में मानी जाती है।
पढ़ें निर्मल पुर्जा ने जीवन में क्या-क्या हालिस की। AI IMAGE
रिकॉर्ड ही नहीं, कई जिंदगियां भी बचाईं
निर्मल पुर्जा केवल रिकॉर्ड बनाने वाले पर्वतारोही नहीं थे। उन्होंने कई बार अपने अभियान रोककर संकट में फंसे पर्वतारोहियों की जान बचाई। उन्होंने अनेक हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू मिशनों में हिस्सा लिया और बेहद कठिन परिस्थितियों में लोगों को सुरक्षित नीचे लाने का काम किया। इसी वजह से उन्हें सिर्फ एक महान पर्वतारोही नहीं, बल्कि एक सच्चे इंसान के रूप में भी याद किया जाता है।
अनेक हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू मिशनों में हिस्सा लिया था। nimsdai insta handle
शेरपा समुदाय की आवाज बने निर्मल
1953 में तेनजिंग नोर्गे और एडमंड हिलरी ने पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रचा था। हालांकि, इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाने के बावजूद शेरपा समुदाय को लंबे समय तक वह वैश्विक पहचान नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे। एडमंड हिलरी को ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ ने सम्मानित किया, लेकिन तेनजिंग नोर्गे को वैसी अंतरराष्ट्रीय पहचान नहीं मिली।
निर्मल पुर्जा हमेशा मानते थे कि शेरपा समुदाय ने दुनिया भर के पर्वतारोहियों को प्रशिक्षित किया है और पर्वतारोहण में उनका योगदान अतुलनीय है। वे चाहते थे कि शेरपाओं को भी उनका उचित सम्मान मिले। उनकी के2 टीम के सदस्य मिंगमा जी शेरपा ने भी कहा था कि अब हालात बदल रहे हैं और शेरपा समुदाय को दुनिया में पहले से अधिक सम्मान और पहचान मिल रही है।
'हिमालय से प्यार हो गया था'
2021 में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में निर्मल पुर्जा ने बताया था कि उनका पर्वतों के प्रति जुनून बचपन और पारिवारिक माहौल से आया। उन्होंने कहा था कि माउंट एवरेस्ट पर पहली चढ़ाई के बाद उन्हें हिमालय से ऐसा प्रेम हो गया कि पर्वतारोहण ही उनका जीवन बन गया। मिंगमा जी शेरपा ने भी बताया था कि K2 अभियान के दौरान नेपाली टीमों ने निर्मल पुर्जा को अपना नेता चुना, क्योंकि उन्होंने बहुत कम समय में नेपाल और नेपाली पर्वतारोहियों का दुनिया भर में सम्मान बढ़ाया।
उन्होंने यह भी बताया कि जहां अधिकांश पर्वतारोही अतिरिक्त ऑक्सीजन के साथ चढ़ाई कर रहे थे, वहीं निर्मल पुर्जा बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के अभियान का हिस्सा थे। यही उनकी असाधारण शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता का प्रमाण था।
पर्वतों के प्रति बचपन से था निर्मल पुर्जा का जुनून। nimsdai insta handle
नेटफ्लिक्स पर बनी डॉक्यूमेंट्री
निर्मल पुर्जा की ऐतिहासिक उपलब्धि पर Netflix ने "14 Peaks: Nothing Is Impossible" नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई। यह डॉक्यूमेंट्री दुनियाभर में बेहद लोकप्रिय हुई और करोड़ों लोगों ने पहली बार उनके संघर्ष, साहस और असंभव को संभव बनाने की कहानी को करीब से जाना।
निर्मल पुर्जा ने साबित कर दिया था कि सीमाएं इंसान के दिमाग में होती हैं। अनुशासन, मेहनत और अटूट आत्मविश्वास के दम पर असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। 'हार मानना मेरे खून में नहीं है', यह सिर्फ उनका एक डायलॉग नहीं था, बल्कि उनकी पूरी जिंदगी का दर्शन था। यही वजह है कि निर्मल 'निम्स' पुर्जा आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं और हमेशा रहेंगे।
