सऊदी अरब के वास्तविक नेता, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत में ईरान के साथ संघर्ष को बढ़ाने की अमेरिकी योजनाओं पर चिंता जताई है। यह जानकारी इस बातचीत से वाकिफ एक व्यक्ति ने दी है। शनिवार को हुई इस बातचीत की खबर सबसे पहले 'एक्सियोस' (Axios) ने दी थी। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ट्रंप ईरान पर नए हमलों को लेकर विचार कर रहे हैं।
सऊदी अरब को ये डर
मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र (जो सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने के लिए अधिकृत नहीं हैं) के अनुसार, सऊदी अरब को डर है कि अगर अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया या अन्य प्रमुख ठिकानों पर बड़े हमले किए, तो ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है। ईरान इसके जवाब में सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले कर सकता है।
ईरान के खिलाफ क्या नए कदम उठाने पर विचार
सूत्र ने बताया कि शनिवार की कॉल के दौरान क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से यह स्पष्ट करने को कहा कि वह ईरान के खिलाफ क्या नए कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। इस बातचीत को लेकर व्हाइट हाउस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
तनाव कम करने की कोशिश
सऊदी अरब ने इसी हफ्ते इराक में ईरान-समर्थित मिलिशिया के कई लॉजिस्टिक्स और हथियारों के ठिकानों पर अमेरिका के साथ मिलकर हमले किए थे, लेकिन अब वह अमेरिका और ईरान दोनों से इस 5 महीने पुराने संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत की मेज पर लौटने का आग्रह कर रहा है।
सऊदी रक्षा मंत्री का दौरा: रणनीति पर चर्चा करने के लिए क्राउन प्रिंस ने इसी हफ्ते अपने भाई और सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान को भी वॉशिंगटन भेजा था, जहां उन्होंने ईरान नीति को लेकर ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के साथ अलग से बैठकें की थीं।
मध्य पूर्व में संकट गहराया
मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहा सैन्य संकट अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान पर सख्त हमला करने की चेतावनी के बाद, अब ईरान ने भी बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान ने इस सप्ताहांत सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर अमेरिकी सेना ने उसके ठिकानों पर कोई भी नया हमला या साहसिक कार्रवाई की, तो वह इसका निर्णायक और विनाशकारी जवाब देगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर क्षेत्र के किसी भी देश ने अमेरिका या इजरायल को उसके खिलाफ सैन्य सहयोग दिया, तो वह उन देशों के ऊर्जा और तेल क्षेत्रों को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा।
