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'आपने घबराना नहीं है', चुनाव चिह्न 'बल्ला' छिन जाने पर PTI कार्यकर्ताओं को इमरान खान का संदेश

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 16, 2024, 10:40 AM IST

Pakistan Election : कहा जा रहा है कि 2018 के चुनाव में जो हाल नवाज शरीफ का था आज वही हाल इमरान खान और उनकी पार्टी का है। तब सिस्टम इमरान के साथ था आज उनके खिलाफ है। इमरान के लिए मुसीबत कम नहीं हो रही है। पीटीआई का चुनाव चिह्न बल्ला भी एससी ने अमान्य घोषित कर दिया है।

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पाकिस्तान में 8 फरवरी को हैं चुनाव।

Pakistan Election : पाकिस्तान तहरीक एक इंसाफ के मुखिया एवं पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को चुनाव में झटके पर झटके मिल रहे हैं। खान का नामांकन तो रद्द हो ही चुका है अब उनका पार्टी सिंबल 'बल्ला' भी सुप्रीम कोर्ट ने अमान्य घोषित कर दिया। अडियाला जेल में बंद इमरान खान ने पार्टी कार्यकर्ताओं को दिए अपने संदेश में कहा है कि उन्हें घबराना नहीं है, डटे रहना है क्योंकि 8 फरवरी के चुनाव में पीटीआई की जीत होगी।

इमरान का दावा-जीत हमारी होगी

चुनाव चिह्न रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पीटीआई के नेता बैरिस्टर गौहर खान ने अडियाला जेल के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा कि इससे लोगों का मौलिक अधिकार प्रभावित हुआ है। इमरान खान का संदेश सुनाते हुए बैरिस्टर ने कहा कि 'खान साहब ने कहा है कि आठ फरवरी की जीत हमारी होगी, आपको डटे रहना है, आपने घबराना नहीं है।'

शरीफ पर लगे सभी आरोप हटा लिए गए

इस बार पाकिस्तान का चुनाव दिलचस्प है और इससे भी दिलचस्प है यहां के नेता। एक पूर्व प्रधानमंत्री इमरान जेल में हैं तो दूसरे नवाज शरीफ जो पहले जेल में और फिर निष्कासन में थे, वापस लौट आए हैं। सिस्टम की ऐसी कृपा बरसी कि शरीफ एक झटके में बिल्कुल शरीफ बन गए उनके ऊपर लगे सभी आरोप हटा लिए गए। अब चुनाव में उनका मुकाबला इमरान खान की पार्टी पीटीआई से है।

पीटीआई को केतली, जूता, बोतल और चमगादड़ चुनाव चिह्न

कहा जा रहा है कि 2018 के चुनाव में जो हाल नवाज शरीफ का था आज वही हाल इमरान खान और उनकी पार्टी का है। तब सिस्टम इमरान के साथ था आज उनके खिलाफ है। इमरान के लिए मुसीबत कम नहीं हो रही है। पीटीआई का चुनाव चिह्न बल्ला भी एससी ने अमान्य घोषित कर दिया है। पीटीआई के उम्मीदवारों को केतली, जूता, बोतल और चमगादड़ चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं। पीटीआई का आरोप है कि ऐसा मतदाताओं को उलझाने एवं भ्रमित करने के लिए किया जा रहा है। उन्हें चुनाव से दूर रखने की साजिश की जा रही है। यहां तक कि उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोक जा रहा है और उन्हें डराया जा रहा है।

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