दुनिया

Pakistan में शिक्षा संकट की गंभीर तस्वीर...पाकिस्तान के 63 प्रतिशत युवा कभी स्कूल नहीं गए

सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट और यूएनएफपीए द्वारा खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में किए गए एक अध्ययन में आउट ऑफ स्कूल एडोलसेंट्स एंड यूथ की समस्याओं का आकलन किया गया।

school in pakistan

पाकिस्तान के 63 प्रतिशत युवा कभी स्कूल नहीं गए (प्रतीकात्मक फोटो: Canva AI)

पाकिस्तान में शिक्षा संकट की गंभीर तस्वीर सामने आई है। जनगणना 2023 के आंकड़ों के अनुसार, देश की 63 प्रतिशत युवा आबादी और 23 प्रतिशत किशोरों ने कभी भी औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की। यह स्थिति लाखों युवाओं को समाज के हाशिये पर धकेल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कूल से बाहर रहने वाले किशोर और युवा (आउट ऑफ स्कूल एडोलसेंट्स एंड यूथ) नीति निर्माण में सबसे अधिक उपेक्षित वर्गों में शामिल हैं।

पाकिस्तान में हालात महिलाओं के लिए और भी चिंताजनक हैं। 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 75 प्रतिशत महिलाएं कभी स्कूल नहीं गईं, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा लगभग 50 प्रतिशत है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल शिक्षा की कमी नहीं, बल्कि बेहतर रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक भागीदारी से आजीवन वंचित रहने का संकेत है।

आउट ऑफ स्कूल एडोलसेंट्स एंड यूथ की समस्याओं का आकलन

सस्टेनेबल डेवलपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट और यूएनएफपीए द्वारा खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब में किए गए एक अध्ययन में आउट ऑफ स्कूल एडोलसेंट्स एंड यूथ की समस्याओं का आकलन किया गया। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि ये युवा शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिक जीवन में दोबारा कैसे शामिल हो सकते हैं।

75 प्रतिशत युवाओं के स्कूल छोड़ने का सबसे बड़ा कारण आर्थिक तंगी

अध्ययन में सामने आया कि करीब 75 प्रतिशत युवाओं के स्कूल छोड़ने का सबसे बड़ा कारण आर्थिक तंगी है। इसके अलावा, घरेलू जिम्मेदारियां, काम का दबाव, नजदीकी स्कूलों की कमी, लंबी दूरी, असुरक्षित परिवहन और सामाजिक मान्यताएं, खासकर लड़कियों के लिए, समस्या को और बढ़ाती हैं।कम उम्र में शादी और उत्पीड़न का डर लड़कियों की शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा है। अध्ययन के अनुसार, लड़कों और लड़कियों पर स्कूल से बाहर रहने का असर अलग-अलग पड़ता है।

कम उम्र में ही कठिन और कम वेतन वाले काम करने पड़ते हैं

कई लड़कों को कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए कठिन और कम वेतन वाले काम करने पड़ते हैं। लगभग दो-तिहाई पुरुषों ने बताया कि उन्हें छोटी उम्र से ही कमाने का दबाव महसूस होता है।वहीं, 85 प्रतिशत से अधिक लड़कियां दिन का अधिकांश समय बिना वेतन वाले घरेलू और देखभाल कार्यों में बिताती हैं, जिससे उनके पास न शिक्षा के लिए समय बचता है और न ही रोजगार के लिए। अध्ययन में लड़कियों की औसत विवाह आयु 18 वर्ष पाई गई।

शिक्षा की कमी का सीधा असर रोजगार पर दिखता है

शिक्षा की कमी का सीधा असर रोजगार पर दिखता है। लगभग 75 प्रतिशत आउट ऑफ स्कूल एडोलसेंट्स एंड यूथ के पास किसी भी तरह का भुगतान वाला काम नहीं है, जिनमें महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। जो लोग काम करते भी हैं, वे अस्थायी और असंगठित क्षेत्र में लंबे समय तक काम करने के बावजूद 25,000 रुपये से कम मासिक आय कमाते हैं।अध्ययन में यह भी सामने आया कि 90 प्रतिशत से अधिक युवाओं ने कभी किसी व्यावसायिक या कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। स्वास्थ्य की स्थिति भी चिंताजनक है। कुपोषण, पुराना दर्द और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं आम हैं, लेकिन महंगे इलाज, आवाजाही की दिक्कतों और जागरूकता की कमी के कारण ये युवा उचित स्वास्थ्य सेवाओं तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

रवि वैश्य
रवि वैश्य author

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों... और देखें

End of Article