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पाकिस्तान के पास कौन सा है भारत का आखिरी गांव, जानें कब बना था हिन्दुस्तान का हिस्सा

Knowledge Fact: भारत में लाखों की संख्या में गांव हैं। कुछ के बारे में आप सब जानते होंगे। लेकिन, ज्यादातर गांवों के बारे में लोगों को जानकारी नहीं होगी। खासकर, भारत के आखिरी गांव के बारे में...

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कहां है भारत का आखिरी गांव (तस्वीर साभार- @istock)

Knowldge Fact: ये तो हम सब जानते हैं भारत को गांवों (Indian Village) का देश कहा जाता है। यहां की सभ्यता, संस्कृति की चर्चा दुनियाभर में होती है। आप सब भी भारत के बारे में कई बात जानते होंगे। लेकिन, अब भी कई बातों से अनजान होंगे। इसी कड़ी में आज हम आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में बताएंगे, जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे। आप सबने भारत के कई गांवों का नाम सुना होगा, देखा होगा। लेकिन, सभी गांवों के नाम के बारे में जानकारी नहीं होगी। आज हम जिस गांव के बारे में बात करेंगे, वो भारत का आखिरी गांव है, जो पाकिस्तान के बॉर्डर के पास है। साथ ही यब भी बताएंगे कि वो गांव हिन्दुस्तान का हिस्सा कब बना था।

    हर गांव की अपनी-अपनी खासियत और विशेषताएं हैं। इसके अलावा हर गांव की अपनी कोई ना कोई कहानी जरूर है। लेकिन, क्या आप जानते हैं पाकिस्तान बॉर्डर के पास भारत का आखिरी गांव कौन सा है? इसका जवाब ज्यादार लोगों का मालूम नहीं होगा। अगर आप भी इसके बारे में नहीं जानते हैं, तो आज जरूर जान लीजिए। पाकिस्तान बॉर्डर के पास भारत का आखिरी गांव तुरतुक (Turtuk) है, जो लद्दाख के गुब्रा घाटी में स्थित है। साल 1971 की लड़ाई में जब भारत ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था उसी वक्त यह गांव भारत में शामिल हो गया था। तुरतुक गांव बॉर्डर से महज 8 किलोमीटर पहले है। इसके आगे थांग नाम की जगह है, लेकिन यहां पाकिस्तानी सेना की स्नाइपर रेंज मौजूद है और किसी भी भारतीय को यहां जाना मना है। यहां आपको बता दें कि जब यह गांव पाकिस्तान में था, तो इसका नाम बाल्टिस्तान था। इसी कारण यहां आज भी बाल्टी संस्कृति है।

    indian village

    भारत का आखिरी गांव कहां है ? (तस्वीर साभार- @istock)

    गांव में जाने के लिए नियम

    यह गांव अपनी खूबसूरती के लिए काफी फेमस है। इस गांव में 16वीं सदी की मस्जिद और आइकॉनिक पोलो ग्राउंड और खुबानी की भरपूर खेती आपको देखने को मिलेगी। इस गांव की आबादी तकरीबन 2500 से तीन हजार है। आपको बता दें कि इस गांव में जाने से पहले आपको प्रशासन अनुमति लेनी पड़ेगी। इस गांव में आप केवल पांच दिनों तक रह सकते हैं। पाकिस्तान बॉर्डर नजदीक होने के कारण यहां आने वाले लोगों की सेक्योरिटी चेक होती है।

    Kaushlendra Pathak
    कौशलेंद्र पाठकauthor

    कौशलेंद्र पाठक टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कार्यरत हैं। मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद उनका सफर ग्राउंड रिपोर्टिंग से डिजिटल डेस्क तक फैला, जहां उन्होंने कंटेंट की विविध शैलियों को नजदीक से समझा। अजब-गजब, अनोखी, सोशल और ट्रेंडिंग कंटेंट पर उनकी गहरी पकड़ और तेज न्यूज सेंस ने उन्हें डिजिटल दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई। वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कौशलेंद्र का ध्यान हमेशा ऐसे कंटेंट पर रहता है जो रीडर्स को नई, दिलचस्प और अनजानी कहानियों से रूबरू कराए—हर बार कुछ अलग, कुछ नया।

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