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OMG: यहां सीधा बम-बारूद और तोप से खेलते हैं होली, Video देखकर कांप गई लोगों की रूह

  • Authored by: आदित्य साहू
  • Updated Mar 9, 2023, 08:13 AM IST

Holi with Bomb: पिछले चार सौ सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, इस गांव में आज भी होली बम-बारूद से खेली जाती हे। आप देख सकते हैं कि एक-एक करके सैंकडो बंदूंकों से हवाई फायर किये जा रहे हैं। इन्हीं धमाकों के बीच ग्रामीण नाचते गाते और खुशियं मनाते हैं।

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बम-बारूद से होली

KEY HIGHLIGHTS
  • होली मनाने का सबसे खौफनाक अंदाज
  • उदयपुर के गांव में खेली जाती है होली
  • बम-बारूद और तोप से खेलते हैं होली

Holi with Bomb: रंगों के त्यौहार 'होली' को आपने अलग-अलग अंदाज और परम्पराओं से मनाते हुए देखा होगा, लेकिन आज हम आपको उस एतिहासिक होली के बारे में बताएंगे। जिसके बारे में ना तो आपने कभी सुना होगा और ना ही सोचा होगा। उदयपुर से करीब पचास किलोमीटर दूर स्थित मेनार गांव में होली के दूसरे दिन अनूठे अंदाज़ में रंगों का त्यौहार मनाया जाता है। पिछले चार सौ सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, इस गांव में आज भी होली बम-बारूद से खेली जाती हे।

बम-बारूद से होली खेलते हैं लोग

मेनार गांव के लोग होली के दूसरे दिन पारंपरिक वेशभूषा में इकट्ठा होते हैं। लोग आधी रात को गांव के चौपाल पर जमकर बारूद की होली खेलते हैं। इस बारूद की होली को देखने पर ऐसा लगता है की होली नहीं, बल्कि दिवाली मनाई जा रही हे। सभी ग्रामीण इस मौके पर न सिर्फ पटाके छोड़ते हैं बल्कि बन्दूको से भी कई हवाई फायर करते हैं। इससे यह दिन ऐतिहासिक बन जाता है। आप देख सकते हैं कि एक-एक करके सैंकडो बंदूंकों से हवाई फायर किये जा रहे हैं। इन्हीं धमाकों के बीच ग्रामीण नाचते गाते और खुशियं मनाते हैं।

इस होली की सबसे खास बात यह हैं कि जश्न में शामिल होने के लिये देश के कोनो-कोनों से ही नहीं बल्कि विश्व के किसी भी इलाके में गांव के निवासी मौजूद हों, इस दिन वह अपने गांव जरूर आते हैं। इस होली को देखने के लिये सैंकडो लोग जमा होते हैं। गांव का हर व्यक्ति इस दिन के लिये विशेष तैयारी करता है। एक समय ऐसा भी आता हैं कि जब ग्रामीण दो गुटों में आमने-सामने खडे हो जाते हैं और हवाई फायर करते हुए जश्न मनाते हैं।

मुगल काल से जुड़ा इतिहास

ग्रामीणों की मान्यता है कि मुगल काल में महाराणा प्रताप के पिता उदयसिंह के समय मेनारिया ब्रह्माण ने मेवाड़ राज्य पर हो रहे आतितियों का कुशल रणनीति के साथ युद्ध कर मेवाड़ राज्य की रक्षा की थी। इसी की याद में इस त्यौहार को अलग अंदाज में मनाते हुए सभी ग्रामवासी पूरी रात बन्दूकों से फायरिंग और आग उगलती आतिशबाजी कर जश्न मनाते हे। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बंदूकों के धमाकों के अलावा इस दिन तोप भी छोडी जाती हैं। ग्रामीणों कहते हैं कि मां अंबे की कृपा और पांरपरिक संस्कृतिक को जिंदा रखने की ग्रामीणों की ललक के चलते आज तक कोई हादसा गांव में नहीं हुआ है।

आदित्य साहू
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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