पर्यावरण के संरक्षण को लेकर दुनियाभर में तरह-तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देश की सरकारें लोगों से पेड़ लगाने की अपील कर रही हैं। करोड़ों रुपए लगाकर गो ग्रीन जैसे कैंपेन चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अफ्रीका की एक युवती ने पर्यावरण को बचाने के लिए ऐसा काम कर दिखाया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। केन्या की रहने वाली 22 साल की पर्यावरण कार्यकर्ता ट्रूफेन मुथोनी ने अपने इस कारनामे से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम भी दर्ज करा लिया है। इस कारनामे के तहत ट्रूफेन मुथोनी लगातार 72 घंटे तक एक पेड़ को गले लगाकर खड़ी रहीं।
कब बना यह वर्ल्ड रिकॉर्ड
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, ट्रूफेन ने यह रिकॉर्ड 8 दिसंबर से 11 दिसंबर 2025 को बनाया। उन्होंने केन्या के न्येरी गवर्नर कार्यालय परिसर में 11 दिसंबर को दोपहर 12:25 बजे इस मैराथन को पूरा किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने “सबसे लंबी ट्री-हगिंग मैराथन” का खिताब अपने नाम कर लिया।
क्यों लिया यह अनोखा चैलेंज?
ट्रूफेन मुथोनी का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ रिकॉर्ड बनाना नहीं था। वह लोगों को पेड़ों की रक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के महत्व के बारे में जागरूक करना चाहती थीं। उनका मानना है कि जलवायु संकट से निपटने में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान भी बेहद जरूरी है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी कहा कि इस रिकॉर्ड का मकसद लोगों को प्रकृति से जोड़ना है, ताकि पर्यावरण बचाना केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक भावना बन सके। रिकॉर्ड पूरा होने के बाद ट्रूफेन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “लोगों और धरती के लिए।”
दूसरी बार मिला सम्मान
यह पहली बार नहीं है जब ट्रूफेन ने ट्री-हगिंग मैराथन में नाम कमाया हो। इससे पहले उन्होंने जनवरी 2025 में नैरोबी में 48 घंटे तक पेड़ को गले लगाकर खड़े रहने का रिकॉर्ड बनाया था। इस बार उन्होंने अपने ही पुराने रिकॉर्ड को करीब 24 घंटे से ज्यादा बढ़ाकर नया कीर्तिमान रच दिया।
पहले किसके नाम था रिकॉर्ड?
इससे पहले यह रिकॉर्ड घाना के अब्दुल हकीम अवाल के नाम था, जिन्होंने मई 2024 में 24 घंटे 21 मिनट तक पेड़ को गले लगाया था। ट्रूफेन ने बताया कि इस चुनौती के लिए उन्होंने करीब पांच महीने तक तैयारी की थी। उन्होंने लंबी पैदल यात्राएं कीं और घंटों तक पेड़ से लिपटकर अभ्यास किया। उनका कहना है कि यह अनुभव मानसिक और भावनात्मक रूप से भी काफी मजबूत करने वाला रहा।
