वायरल न्यूज़

500 के नोट पर लालकिला तो 100 के नोट पर बनी है कौन सी इमारत, जानकर यकीन नहीं कर पाएंगे

Knowledge News: आप भी 100 रुपये के नोट को जरूर इस्तेमाल करते होंगे लेकिन शायद ही इस नोट पर बनी इमारत के बारे में आप कोई जानकारी रखते होंगे। आप देखेंगे कि इस नोट पर एक बेहद ही खास और अनोखी इमारत बनी होती है। चलिए हम आपको बताते हैं कि यह इमारत कौन सी है और इसका क्या ऐतिहासिक महत्व है।

Image

100 रुपये की नोट (iStock)

Knowledge News: भारत की मुद्राएं सिर्फ लेन-देन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की समृद्ध संस्कृति, विरासत और इतिहास को भी दर्शाती है। आपने भी भारतीय नोटों का इस्तेमाल जरूर से जरूर किया होगा। अगर आपने गौर किया होगा तो देखा होगा कि हर मूल्य के नोटों पर अलग-अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें बनी हुई हैं। आपने देखा होगा कि 500 रुपये के नोट पर दिल्ली का लाल किला बना हुआ है। क्या आपने कभी 100 रुपये के नोट पर बनी इमारत देखी है?

100 की नोट में बनी कौन सी इमारत

यकीनन आप भी 100 रुपये के नोट को जरूर इस्तेमाल करते होंगे लेकिन शायद ही इस नोट पर बनी इमारत के बारे में आप कोई जानकारी रखते होंगे। आप देखेंगे कि इस नोट पर एक बेहद ही खास और अनोखी इमारत बनी होती है। चलिए हम आपको बताते हैं कि यह इमारत कौन सी है और इसका क्या ऐतिहासिक महत्व है। सबसे पहले आपको बता दें कि इस इमारत का नाम 'रानी की वाव' है। 100 रुपये के नोट पर बनी रानी की वाव इमारत का कनेक्शन गुजरात राज्य से है।

100 rupees

फोटो साभार- iStock

सोलंकी वंश की रानी ने करवाया निर्माण

बता दें कि गुजरात के पाटन जिले में स्थित रानी की वाव एक प्राचीन बावड़ी यानि सीढ़ीदार कुआं है। इस कुएं का निर्माण 11वीं शताब्दी में रानी उदयमती ने करवाया था। रानी उदयमती सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम की पत्नी थीं, जिन्होंने अपने पति की स्मृति में इस बावड़ी का निर्माण करवाया। यह बावड़ी जल संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके साथ ही यह स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना मानी जाती है।

100 rupees2

फोटो साभार (iStock)

विश्व धरोहर स्थल में शामिल

यह जानकर आप दिल हार बैठेंगे कि रानी की वाव को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया है। इसकी दीवारों पर देवी-देवताओं, अप्सराओं तथा पौराणिक कथाओं से जुड़ी बारीक और सुंदर नक्काशी मिलेगी। सबसे हैरान करने वाली बात है कि यह संरचना जमीन के भीतर बनी हुई है। यह 11वीं शताब्दी की उन्नत इंजीनियरिंग को दर्शाती है।

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

और पढ़ें
End of Article