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ITR दाखिल कर दिया लेकिन रिफंड अभी तक नहीं आया, ऐसे ऑनलाइन चेक कहां अटका पैसा?

टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि इनकम टैक्स रिफंड तब जारी किया जाता है जब टैक्सपेयर द्वारा चुकाया गया टैक्स, डिडक्शन के बाद असल देनदारी से ज्यादा होता है। इसे ITR के ई-वेरिफिकेशन के बाद प्रोसेस किया जाता है।

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इनकम टैक्स रिफंड

देशभर में 31 अगस्त तक रिकॉर्ड 7.8 करोड़ से ज्यादा इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किए गए हैं। अगर आप भी उनमें हैं, जिसने अपना रिटर्न फाइल कर दिया है लेकिन रिफंड नहीं मिला है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। हम आपको आज बता रहे हैं कि आयकर विभाग द्वारा कब रिफंड जारी किया जाता है। इसका प्रोसेस क्या होता है?

रिफंड मिलने में कितना समय लगता है?

ऑफिशियल ई-फाइलिंग पोर्टल पर दी गई जानकारी के मुताबिक, टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग तभी शुरू करता है जब आप ई-वेरिफिकेशन पूरा कर लेते हैं। अगर आप ई-वेरिफिकेशन कर लेते हैं तो आपके लिंक्ड बैंक अकाउंट में रिफंड आने में चार से पांच सप्ताह लग सकते हैं। इसलिए, अगर इस समय के दौरान इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से कोई रिफंड या फाइनल असेसमेंट की सूचना (ईमेल या SMS) नहीं मिलती है, तो टैक्सपेयर्स के लिए अपने ITR का स्टेटस चेक करना बेहतर है।

टैक्स रिफंड का ऑनलाइन स्टेटस कैसे चेक करें?

  • e-filing वेबसाइट https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ पर जाएं।
  • लॉगिन बटन पर क्लिक करें और अपनी PAN डिटेल्स और पासवर्ड डालें।
  • लॉगिन करने के बाद, होम पेज के टास्कबार पर जाएं और e-file — Income Tax Returns — View Filed Returns पर क्लिक करें।
  • आपके ITR की पूरी टाइमलाइन असेसमेंट ईयर के हिसाब से दिखाई देगी, जिसमें खास असेसमेंट ईयर के लिए रिफंड का स्टेटस भी दिखेगा।
  • खास बात यह है कि जिन कंपनियों और टैक्सपेयर्स (जैसे फर्म के पार्टनर जिनके अकाउंट्स का ऑडिट होना जरूरी है) के अकाउंट्स का ऑडिट होना जरूरी है, उनके लिए ड्यू डेट 31 अक्टूबर है। इसके अलावा, ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, सेक्शन 92E के तहत ट्रांसफर-प्राइसिंग प्रावधानों के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर्स के पास 30 नवंबर तक का समय है।

कृपया ध्यान दें कि इन टैक्सपेयर्स को रिफंड (अगर कोई हो) ITR के ई-वेरिफाई होने के चार से पांच हफ्ते के अंदर ही मिलेगा।

क्यों अटक सकता है टैक्स रिफंड?

जानकारों का कहना है कि रिफंड न मिलने की कई वजहें हैं, जैसे अकाउंट की अधूरी जानकारी या इनएक्टिव लिंक। इसमें ई-फाइलिंग पोर्टल पर एक्टिव अकाउंट, आधार और पैन का लिंक होना, और रिफंड क्लेम के साथ ITR फाइल करना शामिल है। रिफंड ट्रांसफर प्रोसेस के दौरान बैंक की तरफ से तकनीकी खराबी या रिजेक्शन, बैंक अकाउंट और PAN की जानकारी में अंतर, और PAN का इनऑपरेटिव होना शामिल है। इसके अलावा, ऐसा भी हो सकता है कि आपके रिफंड को पिछले सालों के बकाया टैक्स की मांग के साथ एडजस्ट कर दिया जाए या ITR, TDS या इनकम की जानकारी में गड़बड़ी।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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