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Hawa Mahal Facts: जब जमीन पर खड़ी है ये इमारत तब क्यों कहा जाता है हवामहल, जानें इसके पीछे का रहस्य

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Nov 18, 2023, 04:13 PM IST

गुलाबी नगरी में स्थित हवा महल के बारे में आप सभी ने सुना ही होगा। लेकिन क्या आप इसके नाम के पीछे की वजह जानते हैं? आइए आपको बताते हैं हवा महल से जुड़े कुछ रोचक तथ्य..

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जयपुर की खूबसूरती में चार-चांद लगाता 'हवा महल' (Image Credit - iStock)

KEY HIGHLIGHTS
  • गुलाबी नगरी में स्थित है हवा महल
  • राजसी मुकुट पर आधारित है डिजाइन
  • महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था हवा महल

Interesting Facts About Hawa Mahal: जयपुर भारत के उन शहरों में से एक है, जिसे वास्तुशास्त्र के हिसाब से बसाया गया था। ये शहर भारत के सबसे सुंदर शहरों में से एक है। राजा-महाराजा की इस धरती पर काफी खूबसूरत-खूबसूरत स्थान हैं, जिसे देखने के लिए न सिर्फ देश से बल्कि विदेशों से भी पर्यटक आते हैं। इसी शहर के बीचों-बीच बसा है मुग़ल और राजपूत शैली की झलक दिखाता हवा महल। इसके ऊपरी हिस्से से आप जंतर मंतर, सिरे देवरी बाजार और सिटी पैलेस का खूबसूरत नजारा भी देख सकते हैं।

Hawa Mahal

राजाओं की शानो-शौकत को बयां करती हवा महल (Image Credit - iStock)

राजाओं की शानो-शौकत को बयां करती हवा महल

हवा महल की सुंदरता देखने के लिए सबसे अधिक विदेशी पर्यटक आते हैं। ये पर्यटन स्थल अपनी खिड़कियों और हवादार जालियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। कहते हैं कितनी भी गर्मी क्यूं न हो, हवा महल में आपको हमेशा हवा लगती है, इसी हिसाब से इसे बनाया भी गया है। यह इमारत अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं है। यह आज भी यह राजाओं की शानो-शौकत को बयां करती है।

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श्रीकृष्ण के मुकुट की तरह डिजाइन की गई है हवा महल (Image Credit - iStock)

श्रीकृष्ण के मुकुट की तरह डिजाइन की गई है हवा महल

लाल बलुआ पत्थर से निर्मित इस इमारत को आमेर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था। यह खासकर रानियों के लिए बनवाया गया था, जहां से बाहरी नजारों और उत्सवों का आनंद ले पाती थी। गर्मियों में यहां राजपूत महिलाएं आया करती थीं, जो यहां पर हो रहे कठपुतली और शतरंज के खेल का आनंद लिया करती थीं। पिरामिड आकार में बनी यह इमारत पांच मंजिला बनाई गई थी। कहा जाता है महाराजा सवाई प्रताप सिंह श्रीकृष्ण के परम भक्त थे, इसीलिए हवा महल को कन्हैया के ताज की तरह बनवाया गया था, जिसे वास्तुकार लाल चंद उस्ताद द्वारा डिजाइन किया गया था।

Hawa Mahal

मुगल और राजसी शैली का मिश्रित नमूना (Image Credit - iStock)

मुगल और राजसी शैली का मिश्रित नमूना

बता दें, हवामहल में कुल 953 खिड़कियां हैं, जहां हवा के झरोखे मिलते रहते हैं। आज भी आप यहां चले जाएंगे तो खिड़कियों से आपको बराबर हवा मिलती रहेगी। यह बिना नींव की बनाई गई है और यह बिना नींव वाली दुनिया की सबसे बड़ा महल भी है। 15 मीटर ऊंचे इस महल की सबसे ऊपरी मंजिल की चौड़ाई केवल 1.5 फीट है। बेहतरीन कारीगरी के लिए प्रसिद्ध इस इमारत पर आप फूल-पत्तियों की नक्काशी देख सकते हैं। यह इमारत मुगल और राजसी शैली का मिश्रित उदाहरण भी है।

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हवा महल का नाम 'हवा महल' कैसे पड़ा? (Image Credit - iStock)

हवा महल का नाम 'हवा महल' कैसे पड़ा?

लेकिन इन सभी के मन में एक सवाल आता है कि हवा महल का नाम 'हवा महल' ही क्यों पड़ा? जबकि यह इमारत तो जमीन पर बनाई गई है तो फिर इसके नाम के पीछे का क्या कारण है? दरअसल, हवा महल के नाम के पीछे एक रोचक कहानी कही जाती है। इसके पांचवीं मंजिल पर एक मंदिर है, जिसका नाम हवा मंदिर है। इसी मंदिर के नाम पर ही इस इमारत का नाम हवा महल रखा गया था। वहीं, इस महल के प्रत्येक मंजिल पर शरद मंदिर, रत्न मंदिर, विचित्र मंदिर व प्रकाश मंदिर स्थित है।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

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