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स्विंग और स्पिन का असली खेल! फैक्ट्री में ऐसे बनती है क्रिकेट बॉल, वीडियो हुआ वायरल

Cricket ball making process: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में क्रिकेट गेंद बनाने की पूरी प्रक्रिया दिखाई गई है। इसमें बताया गया है कि कैसे कॉर्क, धागों और चमड़े की मदद से गेंद तैयार की जाती है। खासतौर पर उसकी सिलाई यानी सीम ही गेंद को स्विंग और स्पिन कराने में अहम भूमिका निभाती है।

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एक गेंद के पीछे इतनी मेहनत! (Instagram/ thegreatindianfoodie)

How cricket ball is made: क्रिकेट का मैच जब भी रोमांचक होता है, चौके-छक्के लगते हैं या गेंदबाज विकेट लेकर मैच पलट देता है तो उस खेल का सबसे अहम हिस्सा होती है एक छोटी-सी क्रिकेट गेंद। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाया गया है कि क्रिकेट बॉल फैक्ट्री में कैसे बनाई जाती है। इस वीडियो को देखकर लोग समझ पा रहे हैं कि गेंद (cricket ball kaise banta hai) के पीछे कितनी मेहनत और बारीकी छिपी होती है। क्रिकेट गेंद बनाने की प्रक्रिया बहुत ही सावधानी से शुरू होती है। सबसे पहले गेंद के अंदर का हिस्सा तैयार किया जाता है।

इसके लिए कॉर्क (एक खास तरह की हल्की लकड़ी), धागे और कई परतों का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी चीजों को इस तरह जोड़ा जाता है कि गेंद मजबूत बने और लंबे समय तक अपना आकार बनाए रखे। यही अंदरूनी ढांचा गेंद को सही वजन और मजबूती देता है। इसके बाद आता है गेंद के बाहरी हिस्से का काम, जो असल में सबसे अहम माना जाता है। गेंद (cricket ball factory video) को चमड़े (लेदर) से ढका जाता है। इस चमड़े को खास तरीके से काटकर उसके टुकड़ों को हाथ से सिलाई करके जोड़ा जाता है। यह सिलाई ही गेंद की “सीम” बनाती है, जो क्रिकेट बॉल की पहचान होती है।

सीम का काम सिर्फ गेंद (sports manufacturing process) को जोड़ना ही नहीं है, बल्कि यह खेल में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। गेंदबाज इसी सीम की मदद से गेंद को स्विंग कराते हैं, स्पिन देते हैं और उछाल (बाउंस) में बदलाव लाते हैं। इसलिए सीम का मजबूत और सही होना बहुत जरूरी होता है। वीडियो में कारीगरों की मेहनत साफ नजर आती है। हर टांका बराबर दूरी पर लगाया जाता है और हर परत को एक जैसी कसावट दी जाती है। कोशिश की जाती है कि हर गेंद लगभग एक जैसी बने, ताकि खेल में कोई फर्क न पड़े।

जब गेंद (cricket ball factory video) पूरी तरह तैयार हो जाती है, तब उसकी जांच की जाती है। मशीनों और हाथों की मदद से गेंद का वजन, आकार और बाउंस चेक किया जाता है। अगर गेंद सभी मानकों पर सही उतरती है, तभी उसे मैच में इस्तेमाल के लिए भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को देखकर समझ आता है कि एक छोटी-सी क्रिकेट गेंद के पीछे कितनी मेहनत और कला छिपी होती है। इस वायरल वीडियो को सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम पर thegreatindianfoodie नामक अकाउंट से शेयर किया गया है। जिसे अभी तक लाखों लोगों ने देखा है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।

monu jha
मोनू झा author

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कं... और देखें

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