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कभी सोचा है घड़ी की सुइयां हमेशा दाहिने तरफ ही क्यों घूमती हैं, बाईं तरफ क्यों नहीं, जान लें असली कारण

Knowledge News: आज के समय में घड़ी हर घर में घड़ी का इस्तेमाल होता है। क्योंकि, बिना घड़ी देखे हम समय का अंदाजा नहीं लगा सकते। लेकिन, घड़ी की सूइयां दाहिने तरफ ही क्यों घूमती।

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घड़ी की सुइयां हमेशा दाहिने तरफ ही क्यों घूमती (तस्वीर साभार- @istock)

Knowledge News: आज के दौर में समय देखने के लिए हम सब घड़ी का इस्तेमाल करते हैं। आलम ये है घड़ी हर घर की जरूर बन चुकी है। मोबाइल हो, स्मार्टवॉच हो या फिर दीवार पर टंकी घड़ी ये सभी चीजें समय देखने के लिए इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। इतना ही नहीं आज के समय में कई तरह की घड़ियां आती है। घड़ी के बारे में कई मजेदार बातें आप जानते भी होंगे। लेकिन, कभी सोचा है घड़ी (Clock History) हमेशा दाहिने तरफ ही क्यों घूमती है। देखा तो सबने होगा, लेकिन इसके बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं होगी। अगर आप भी इसके बारे में नहीं जानते हैं, तो आज जरूर जान लीजिए।

जानकारी के मुताबिक, प्राचीन ग्रीस के दौरान में धूपघड़ी का इस्तेमाल होता था। उस वक्त लोग उत्तरी गोलार्ध में रहते थे। धूपघड़ी में एक सीती छड़ी लगाई जाती थी। जैसे ही उस पर सूरज की रोशनी पड़ती उसकी परछाई बाएं से दाएं की तरफ घूमती थी। यही परछाई समय बिताने का जरिया बन गई। मतलब ये हुआ कि समय की दिशा वही मानी गई जिस तरफ छाया चलती थी। वहीं, जब 12वीं से 15वीं सदी के बीच यूरोप में पहली मैकेनिकल घड़ियां बनीं, तो कारीगरों ने उसी दिशा को अपनाया जो धपघड़ी में दिखती थी। परिणाम ये हुआ कि धीरे-धीरे यही दिशा स्टैंडर्ड बन गई। अगर सूई उलटी दिखा में घूमती तो लोगों को समय समझने में दिक्कत होती। अंत में निष्कर्ष यह निकला कि आदत और परंपरा ने मिलकर क्लॉकवाइज मूवमेंट को दुनियाभर में स्वीकार कर लिया।

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क्या आप जानते हैं सच्चाई (तस्वीर साभार- @istock)

घड़ी का इतिहास

अब जरा सोचिए अगर मैकेनिकल घड़ी का आविष्कार पहले दक्षिणी गोलार्ध में हुआ होता तो घड़ी की दिशा की अवधारणा पूरी तरह से अलग हो सकती थी। क्योंकि, वहां सूर्य की छाया विपरित दिशा में चलती है। परिणाम ये होता है कि घड़ी एंटीक्लॉक वाइज चलती। कुछ रिपोर्ट के अनुसार, कुछ संस्कृतियों ने ऐसी घड़ियां भी बनाईं, जो एंटी क्लॉकवाइज चलती हैं, जो उनके पढ़ने-लिखने की दिशा के साथ मेल खाती थी। जब यांत्रिक घड़ियां यूरोप और बाद में पूरे विश्व में व्यापक रूप फैली तो इस दिशात्मक परंपरा को अपनाना और अधिक मजबूत हो गया।

Kaushlendra Pathak
कौशलेंद्र पाठकauthor

कौशलेंद्र पाठक टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कार्यरत हैं। मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद उनका सफर ग्राउंड रिपोर्टिंग से डिजिटल डेस्क तक फैला, जहां उन्होंने कंटेंट की विविध शैलियों को नजदीक से समझा। अजब-गजब, अनोखी, सोशल और ट्रेंडिंग कंटेंट पर उनकी गहरी पकड़ और तेज न्यूज सेंस ने उन्हें डिजिटल दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई। वायरल सेक्शन के लीड के रूप में कौशलेंद्र का ध्यान हमेशा ऐसे कंटेंट पर रहता है जो रीडर्स को नई, दिलचस्प और अनजानी कहानियों से रूबरू कराए—हर बार कुछ अलग, कुछ नया।

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