वायरल न्यूज़

एक ऐसा किला... जहां गोला बारूद खत्म होने पर दागे गए थे 'चांदी के गोले', बड़ी ही रोचक है कहानी

  • Authored by: किशन गुप्ता
  • Updated Apr 10, 2023, 04:17 PM IST

राजस्थान के इस किले की कहानी भी बड़ी रोचक है। एक बार युद्ध के दौरान जब बारूद खत्म हो गया था तो दुश्मनों पर चांदी के गोले बरसाए गए थे। इस किले की कहानी काफी रोचक है।

Image

चूरू का किला, राजस्थान (फोटो साभार - ट्विटर)

KEY HIGHLIGHTS
  • सबसे प्रसिद्ध किलों में से एक है चूरू का किला
  • बारूद खत्म होने पर चांदी के गोले दागे गए थे
  • काफी रोचक है इस किले की कहानी

Churu Fort Rajasthan: हमारे देश में यूं तो हजारों किले हैं, लेकिन इसमें से कुछ ऐसे किले हैं, जिनके बारे में सुनने और जानने में बड़ा ही रोचकता महसूस होती है। या यूं कहें कि इनके बारे में जानना भी किसी रोमांच से कम नहीं है तो ये गलत नहीं होगा। आज हम बात करने जा रहे हैं राजस्थान के एक ऐसे किले के बारे में, जिसका अपना एक अलग इतिहास है। इसके बारे में सुनते ही लोगों को वह मंजर याद आने लगता है, जिसे कभी यहां के लोगों ने अपने आंखों से देखा है।

हम बात करने जा रहे हैं राजस्थान के चूरू जिले में स्थित चूरू किला के बारे में..। पहले तो जान लीजिए कि इस किले को लगभग 400 साल (17वीं शताब्दी के अंत में) पहले ठाकुर कुशल सिंह ने बनवाया गया था। फिर 19वीं सदी का वह दौर आया, जब इस किले ने एक ऐसी लड़ाई देखी, जिसने इसे हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया। 1814 ईसवी में बीकानेर रियासत के राजा सूरत सिंह ने इस पर हमला कर दिया था। इस लड़ाई में चूरू की सेना का मनोबल टूट रहा था, इसका कारण था किले के गोला बारूद का खत्म होना। लेकिन तब चूरू की प्रजा ने अपना प्रजा-धर्म निभाया और अपने तत्कालीन राजा शिवजी सिंह को एक अनोखा दान दिया, जो इतिहास के पन्नों में अब तक का अपने राजा को दिया गया सबसे बड़ा दान है।

Churu Fort Rajasthan

चूरू किले में रखा गया तोप

दुश्मनों पर बरसाए थे चांदी के गोले

तब चूरू के प्रजा ने अपने राजा को अपना सारा जेवर दे दिया। फिर इन्हीं जेवरों से गोले तैयार किए गए, जो बाद दुश्मनों पर बरसाए गए। फिर क्या.. दुश्मन घुटने टेंकने पर मजबूर हो गए थे। यह वाक्या इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए स्वर्णिम अक्षरों में लिख गया, जिसे शायद कभी मिटाया नहीं जा सकता। इस किले के बारे में जानकर आपको कैसा लगा, हमें कमेंट कर जरूर बताएं।

किशन गुप्ता
किशन गुप्ताauthor

<p>देश की धार्मिक राजधानी काशी में जन्म लिया और घाटों पर खेल-कूदकर बड़ा हुआ। साल 2019 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री ली। यही से पत्रकारिता की शुरुआत भी हुई। इसी साल जुलाई में हैदराबाद स्थित रामोजी रॉव के स्वामित्व वाले ईटीवी भारत से करियर की शुरुआत हुई। बतौर ट्रेनी यहां एक साल से अधिक का समय बिताया। यह पहली दफा था, जब घर से दूर निकला था। लेकिन चस्का था तो काम करने, एक अच्छा पत्रकार बनने का। यहां रहकर चंद्रयान - 2 को कवर करने का मौका मिला। इसके बाद राजस्थान में शिक्षक भर्ती को लेकर उम्मीदवारों की ओर से हुए हिंसक विरोध को भी करीब से देखा। इस दौरान पथराव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन काम करने का एक जुनून था। यह पहली दफा था, जब मैंने किसी बड़ी न्यूज को कवर किया था। इसके बाद ये सिलसिला चलता गया। कुछ समय ऐसा भी आया, जब होम पेज भी काम करने को मिला। करीब एक साल से अधिक समय बिताने के बाद ईटीवी भारत से अलविदा लिया और अपने गृह जिले में पहुंचा, जहां के एक लोकल चैनल टूडेज इंडिया न्यूज में काम करने का मौका मिला। यहां करीब डेढ़ साल से अधिक का समय बिता, जहां रहकर बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल को भी कवर करने का मौका मिला। राजनीति और क्राइम की खबरों में खासा रूचि होने के कारण अक्सर फोकस भी इसी पर रहता था। इस दौरान कोविड के दंश को भी देखा। कोरोना काल का यह वो भयानक मंजर था, जिसकी किसी को आशंका न थी। इस दौरान खबरों के माध्यम से देश के दुख-दर्द को करीब से महसूस करने का मौका मिला। फिर मई 2022 में वनइंडिया ज्वाइन कर ली, यहां से फीचर राइटिंग की शुरुआत करते हुए मैंने ट्रैवेल पर काम करना शुरू किया। ऑफिस बैंगलोर था, तो वहां जाने के लिए काफी सोचना भी पड़ा लेकिन दिमाग में था कि बड़ा कुछ करना है तो देश की आर्थिक राजधानी के लिए निकल पड़ा। यहां काफी कम समय ही बिता, करीब 9 महीने तक काम करने के बाद यहां से अलविदा लिया। फिर समय आया देश के प्रतिष्ठित संस्थान टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने का। मार्च 2023 में मैं Timesnowhindi.com के वायरल टीम से जुड़ा। इस बीच तमाम ट्रेंडिंग, वायरल और अजब-गजब जैसी कई खबरें की। बीट अलग होने के कारण थोड़ा चैलेंजिंग था लेकिन उस चैलेंज को पूरा करते हुए और चुनौतियों का सामना करते हुए आज एक साल से ऊपर का समय हो गया है।</p>

और पढ़ें
End of Article