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Ajab Gajab: क्यों है फरवरी साल का सबसे छोटा महीना? 2000 साल पुराना राज जानकर चौंक जाएंगे

Ajab Gajab: फरवरी साल का सबसे छोटा महीना है, जिसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं बल्कि प्राचीन रोमन कैलेंडर का इतिहास और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। रोमन समय में किए गए फैसलों की वजह से आज भी फरवरी (Why February has 28 days) में केवल 28 या लीप ईयर में 29 दिन होते हैं।

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फरवरी में सिर्फ 28 दिन क्यों? (फोटो: iStock)

Ajab Gajab: फरवरी में सिर्फ 28 दिन क्यों होते हैं? (Why February has 28 days) यह सवाल बहुत लोगों के मन में आता है। बाकी महीनों के मुकाबले फरवरी छोटा क्यों है, इसके पीछे कोई वैज्ञानिक नियम नहीं, बल्कि इतिहास और पुरानी रोमन मान्यताएं जिम्मेदार हैं। आज हम जिस ग्रेगोरियन कैलेंडर का इस्तेमाल करते हैं, उसकी जड़ें हजारों साल पुराने रोमन समय से जुड़ी हुई हैं। बहुत पहले रोमन लोग चंद्रमा के आधार पर कैलेंडर बनाते थे। उस समय महीने चंद्र चक्र के हिसाब से चलते थे, इसलिए उनमें 29 या 31 जैसे विषम संख्या वाले दिन रखे जाते थे। शुरुआत में रोमन वर्ष में सिर्फ 10 महीने होते थे। जो मार्च से दिसंबर तक माने जाते थे। सर्दियों के दिनों को कैलेंडर में सही तरह से नहीं गिना जाता था, क्योंकि उस समय खेती या खास काम नहीं होते थे।

जनवरी और फरवरी नाम के दो नए महीने जोड़े

बाद में रोमन राजा नुमा पोम्पिलियस ने कैलेंडर को ठीक करने का फैसला किया। उन्होंने साल में जनवरी और फरवरी नाम के दो नए महीने जोड़े, जिससे साल 12 महीनों का हो गया। लेकिन एक समस्या सामने आई। रोमनों को विषम संख्या शुभ लगती थी, जबकि सम संख्या को अशुभ माना जाता था। इसलिए महीनों को संतुलित करने के लिए एक महीने को छोटा करना पड़ा, और फरवरी को चुना गया। फरवरी पहले से ही मृतकों से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों का महीना माना जाता था, इसलिए इसे छोटा और थोड़ा अलग रखना रोमनों को सही लगा। इसी कारण फरवरी में सिर्फ 28 दिन तय कर दिए गए। यह फैसला किसी विज्ञान पर नहीं, बल्कि उस समय की मान्यताओं पर आधारित था।

1582 में पोप ग्रेगरी तेरहवें ने कैलेंडर में किया सुधार

इसके बाद जूलियस सीज़र ने कैलेंडर में बड़ा बदलाव किया और जूलियन कैलेंडर शुरू किया, जो सूर्य की गति के हिसाब से बनाया गया था। हालांकि कई चीजें बदलीं, लेकिन फरवरी की लंबाई वही रही। हर चार साल में एक अतिरिक्त दिन जोड़कर लीप ईयर बनाया गया, जिससे फरवरी कभी-कभी 29 दिनों का हो जाता है। बाद में 1582 में पोप ग्रेगरी तेरहवें ने कैलेंडर में सुधार किया और ग्रेगोरियन कैलेंडर बनाया, जिसे आज दुनिया के ज्यादातर देश इस्तेमाल करते हैं। फिर भी फरवरी सबसे छोटा महीना ही बना रहा। यानी फरवरी का 28 दिनों वाला होना किसी वैज्ञानिक कारण से नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और पुराने रोमन फैसलों का नतीजा है, जो आज तक हमारे कैलेंडर में दिखाई देता है।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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