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ट्यूबलेस टायर में कौन-सी हवा भरी जाती है? नॉर्मल हवा से यह कितनी अलग होती है?

आजकल अधिकतर गाड़ियों में ट्यूबलेस टायर का इस्तेमाल हो रहा है। कई लोग पूछते हैं कि जब ट्यूबलेस टायर है तो हवा क्यों भरी जाती है, लेकिन वे ये नहीं जानते कि ट्यूबलेस टायर में गैस भरी जाती है।

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ट्यूबलेस टायर में कौन सी हवा भरी जाती है

आजकल ज्यादातर कारों और बाइक में ट्यूबलेस टायर का इस्तेमाल किया जाता है। ये टायर पुराने ट्यूब वाले टायर से ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक माने जाते हैं। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि ट्यूबलेस टायर में कौन-सी हवा भरनी चाहिए? क्या इसमें सामान्य हवा भर सकते हैं या सिर्फ नाइट्रोजन गैस ही जरूरी होती है?

ट्यूबलेस टायर में सामान्य हवा भरी जा सकती है

ट्यूबलेस टायर में आमतौर पर सामान्य हवा (Normal Air) ही भरी जाती है। यह हवा ऑक्सीजन, नाइट्रोजन और दूसरी गैसों का मिश्रण होती है। ज्यादातर वाहन निर्माता कंपनियां भी टायर में सामान्य हवा भरने की सलाह देती हैं। अगर आपके वाहन में ट्यूबलेस टायर है तो पेट्रोल पंप या टायर शॉप पर मिलने वाली सामान्य हवा से कोई नुकसान नहीं होता, बशर्ते टायर में सही प्रेशर रखा जाए।

नाइट्रोजन गैस क्यों भरी जाती है?

कुछ लोग ट्यूबलेस टायर में नाइट्रोजन गैस भरवाते हैं। नाइट्रोजन एक सूखी गैस होती है और इसमें नमी की मात्रा बहुत कम होती है। इसका इस्तेमाल खासतौर पर रेसिंग कारों, भारी वाहनों और कुछ प्रीमियम वाहनों में किया जाता है। नाइट्रोजन भरने के पीछे कारण यह है कि तापमान बढ़ने पर इसका दबाव सामान्य हवा की तुलना में ज्यादा स्थिर रह सकता है।

क्या नाइट्रोजन भरने से टायर की लाइफ बढ़ती है?

नाइट्रोजन के कुछ फायदे हो सकते हैं, लेकिन आम उपयोग में इसका अंतर बहुत ज्यादा महसूस नहीं होता। अगर कोई व्यक्ति रोजमर्रा में बाइक या कार चलाता है तो सही टायर प्रेशर बनाए रखना ज्यादा जरूरी है। टायर की लाइफ और माइलेज पर सबसे बड़ा असर सही हवा का दबाव, समय पर व्हील अलाइनमेंट, टायर की स्थिति, सही ड्राइविंग तरीका का होता है।

ट्यूबलेस टायर में हवा कम होने से क्या नुकसान होता है?

अगर टायर में हवा कम हो तो वाहन का माइलेज कम हो सकता है और टायर ज्यादा गर्म हो सकता है। इससे टायर जल्दी खराब होने के साथ-साथ सड़क पर नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है। वहीं जरूरत से ज्यादा हवा भरने से टायर की पकड़ कम हो सकती है और झटके ज्यादा महसूस हो सकते हैं।

कब चेक करें टायर प्रेशर?

टायर का प्रेशर कम से कम महीने में एक बार जरूर चेक करना चाहिए। लंबी यात्रा पर जाने से पहले टायर प्रेशर जांच लेना बेहतर होता है। टायर प्रेशर हमेशा वाहन कंपनी द्वारा बताए गए स्तर के अनुसार रखना चाहिए। यह जानकारी आमतौर पर कार के दरवाजे के पास लगे स्टिकर या वाहन की मैनुअल बुक में दी होती है।

ट्यूबलेस टायर का सबसे बड़ा फायदा क्या है?

ट्यूबलेस टायर में अलग से ट्यूब नहीं होती, इसलिए पंचर होने पर हवा धीरे-धीरे निकलती है। इससे वाहन चालक को अचानक टायर फटने जैसी स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा ये टायर हल्के होते हैं और कई मामलों में बेहतर माइलेज देने में मदद कर सकते हैं।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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