आजकल ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और महंगे गैजेट खरीदने तक लगभग हर जगह No Cost EMI का विकल्प दिखाई देता है। नाम सुनकर लगता है कि ग्राहक को EMI पर सामान खरीदने के बावजूद कोई अतिरिक्त ब्याज नहीं देना पड़ेगा। लेकिन वास्तव में नो कॉस्ट EMI का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि आपको सामान की कीमत के अलावा कुछ भी नहीं देना पड़ेगा। इसमें कई तरह के चार्ज और शर्तें शामिल हो सकती हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
No Cost EMI आखिर क्या होती है?
नो कॉस्ट EMI में आमतौर पर लोन की ब्याज लागत को ग्राहक से अलग तरीके से वसूल किया जाता है या डिस्काउंट के रूप में एडजस्ट किया जाता है। इसलिए विज्ञापन में आपको EMI की रकम आकर्षक नजर आती है, लेकिन पूरी खरीदारी की लागत देखते समय अन्य शुल्कों पर भी ध्यान देना चाहिए।
उदाहरण के लिए, अगर किसी फोन की कीमत ₹30,000 है और उसे 6 महीने की No Cost EMI पर खरीदा जा रहा है, तो सामान्य तौर पर ₹5,000 के आसपास की मासिक किस्त दिखाई जा सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अंतिम भुगतान हमेशा बिल्कुल ₹30,000 ही होगा।
ब्याज नहीं तो फिर पैसा कहां से जाता है?
नो कॉस्ट EMI में बैंक या फाइनेंस कंपनी की ओर से ब्याज की रकम को किसी दूसरे तरीके से एडजस्ट किया जा सकता है। कई मामलों में दुकानदार या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म प्रोडक्ट की कीमत में मिलने वाले डिस्काउंट को छोड़कर ब्याज लागत को एडजस्ट करते हैं।
यानी ग्राहक को भले ही 'No Cost' लिखा दिखाई दे, लेकिन प्रोडक्ट की प्रभावी कीमत और मिलने वाले डिस्काउंट को ध्यान से देखना जरूरी है। कुछ ऑफर्स में बैंक या फाइनेंस कंपनी की ओर से अलग शुल्क भी लगाया जा सकता है।
Processing Fee का रखें खास ध्यान
No Cost EMI लेते समय सबसे पहले Processing Fee जरूर चेक करें। कई EMI ऑफर्स में ब्याज नहीं लिया जाता, लेकिन प्रोसेसिंग फीस अलग से लग सकती है। मान लीजिए किसी प्रोडक्ट की कीमत ₹30,000 है और EMI ऑफर के साथ ₹500 की प्रोसेसिंग फीस लगती है। ऐसी स्थिति में ग्राहक की वास्तविक लागत ₹30,000 से ज्यादा हो जाएगी। इसलिए सिर्फ EMI की मासिक रकम देखकर फैसला करना सही नहीं है।
GST और दूसरे चार्ज भी बढ़ा सकते हैं खर्च
EMI से जुड़े कुछ शुल्कों पर टैक्स भी लागू हो सकता है। इसलिए ऑफर की शर्तों में यह देखना जरूरी है कि बताई गई रकम में सभी टैक्स और चार्ज शामिल हैं या नहीं। इसके अलावा कुछ मामलों में लेट पेमेंट फीस, EMI बाउंस चार्ज या अन्य शुल्क भी लग सकते हैं। अगर ग्राहक समय पर EMI का भुगतान नहीं करता है तो नो कॉस्ट EMI भी महंगी पड़ सकती है।
Credit Card से No Cost EMI लेते समय सावधान
क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाली No Cost EMI में बैंक की शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। कुछ मामलों में EMI में बदलने पर प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क लग सकते हैं। वहीं, EMI में बदलने के बाद संबंधित ट्रांजैक्शन पर मिलने वाले कुछ फायदे या रिवॉर्ड पॉइंट्स के नियम भी अलग हो सकते हैं। इसलिए EMI चुनने से पहले बैंक की वेबसाइट, कार्ड के नियम और खरीदारी पेज पर दिए गए ऑफर की पूरी जानकारी पढ़ना बेहतर है।
EMI शुरू करने से पहले ऐसे करें पूरा हिसाब
किसी भी No Cost EMI को स्वीकार करने से पहले सिर्फ यह न देखें कि हर महीने कितनी EMI देनी है। सबसे पहले प्रोडक्ट की कैश कीमत, कुल EMI रकम, प्रोसेसिंग फीस, टैक्स और अन्य संभावित शुल्कों को जोड़ें। इसके बाद देखें कि कैश में सामान खरीदने और EMI पर खरीदने में वास्तविक अंतर कितना है। अगर EMI की कुल लागत ज्यादा है तो 'No Cost' लिखा होने के बावजूद यह आपके लिए पूरी तरह मुफ्त नहीं है।
'No Cost' देखकर तुरंत न करें खरीदारी
No Cost EMI अपने आप में खराब विकल्प नहीं है। अगर आपको बड़ी रकम एक साथ खर्च नहीं करनी है और ऑफर की सभी शर्तें आपके लिए सही हैं तो EMI उपयोगी हो सकती है। लेकिन सिर्फ 'No Cost' देखकर महंगा सामान खरीदना समझदारी नहीं है।
