Hal Chhath Ki Puja Samagri Ka Kya Kare: 2 सितंबर को हलछठ का व्रत रखा गया है।हलछठ, जिसे हरछठ, हल षष्ठी और ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है, संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस दिन महिलाएं विशेष पूजा करती हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान बलराम जी का जन्म हुआ था।
हलछठ की पूजा में अनाज, फल और अन्य सामग्री के साथ सफेद कमल, कुश, दूर्वा, झरबेरी की टहनियां, पलाश और महुआ के पत्तों व चुनरी का भी इस्तेमाल किया जाता है। इन्हीं पेड़-पौधों की डालियों और पत्तियों को एक साथ बांधकर गठ्ठर तैयार किया जाता है। इसे पूजा के दौरान स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है।
पूजा पूरी होने के बाद अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि जिस गठ्ठर की पूजा की गई है, उसका क्या करना चाहिए? क्या उसे घर में रखना चाहिए या विसर्जित कर देना चाहिए? इसी तरह ललही छठ की दूसरी पूजन सामग्री का क्या किया जाए, इसे लेकर भी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग परंपराएं हैं।
पूजा के बाद हलछठ के गठ्ठर का क्या करें
पूजा पूरी होने के बाद गठ्ठर की किसी भी सामग्री को कूड़े में नहीं फेंकना चाहिए। पूजा सामग्री को सम्मान के साथ रखें। इसके अगले दिन सप्तमी पर हलछठ के गठ्ठर को किसी पेड़ के नीचे या ऐसी जगह रखा जा सकता है जहां पूजा सामग्री का अनादर न हो। वहीं, इसको तालाब या सरोवर में प्रवाहित कर सकते हैं, लेकिन इससे सरोवर या तालाब दूषित हो सकता है। धार्मिक जानकारों के अनुसार इस गठ्ठर को नदी के पास या किसी अन्य पवित्र जगह पर मिट्टी में दबा देना चाहिए।
क्या गठ्ठर को घर में रख सकते हैं
पूजा के बाद गठ्ठर को अगले दिन विसर्जित करना अनिवार्य है। इसको घर में रखना नहीं चाहिए। न ही सूख जाने पर इधर से उधर फेंकना चाहिए। इसका विशेष ध्यान रखें।
ललही छठ की बाकी पूजा सामग्री का क्या करें
हलछठ की पूजा के बाद केवल गठ्ठर ही नहीं, बल्कि बाकी पूजन सामग्री का भी सही तरीके से निस्तारण करना अनिवार्य है। इसके लिए आप पूजा में चढ़ाए गए फूल और पत्तियों को कूड़े में फेंकने के बजाय किसी पेड़-पौधे के पास रखा जा सकता है। अगर घर में कंपोस्ट की सुविधा है तो पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री को उसमें भी डाला जा सकता है।
पूजा में चढ़ाए गए फल अगर खाने योग्य हैं तो परिवार के लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते हैं। खराब हो चुके फल को खुले में फेंकने के बजाय जैविक कचरे में डालना बेहतर है। हलछठ की पूजा में इस्तेमाल किया गया अनाज अगर साफ और खाने योग्य है तो उसे प्रसाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। चुनरी व अन्य चीजों को किसी जरूरतमंद को भी दिया जा सकता है।
