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Explained : बार-बार टपक रही फ्लैट की छत, क्या है बिल्डर की जिम्मेदारी और आपका हक?

अगर आप मल्टीस्टोरी ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में रहते हैं और घर में सीलन, सीपेज या छत टपकने जैसी दिक्कतें हैं, तो इस तरह के मामले में बिल्डर या AOA की क्या जिम्मदारी है और आपके क्या हक हैं?

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रेरा से मिली घर खरीदारों को राहत

बड़े शहरों में आज करोड़ों की संख्या में लोग हाईराइज बिल्डिंग्स में रह रहे हैं। यहां अक्सर ऐसे मामले आते हैं, जब किसी फ्लैट की छत से पानी टपकने लगता है या घर के बाहर से सीपेज होता है। ऐसे मामलों में अक्सर घर मालिकों को बिल्डर, पड़ोसी और AOA से लड़ना पड़ता है। इसी तरह के एक मामले में Karnataka RERA ने साफ किया है कि अगर पानी का रिसाव खराब निर्माण या वॉटरप्रूफिंग जैसी कमी के कारण है, तो बिल्डर इससे पल्ला नहीं झाड़ सकता। बिल्डर को अपने खर्च पर समस्या का प्रभावी और स्थायी समाधान करना होगा। हालांकि, फ्लैट मालिक यह शर्त नहीं लगा सकता कि मरम्मत किस ब्रांड के प्रोडक्ट और किस कंपनी या एजेंसी से कराई जाए।

क्या है पूरा मामला?

Karnataka RERA के चेयरमैन राकेश सिंह और सदस्यों की बेंगलुरु स्थित बेंच ने बसवराज जलिहलऔर स्वाति M की शिकायत पर यह आदेश दिया। मामला सिंगापुरा विलेज, बेंगलुरु नॉर्थ स्थित SMR विनय एस्टेला हाउसिंग सोसायटी के फ्लैट नंबर E3-809 से जुड़ा है। इस मामले में नए फ्लैट में छत से पानी के रिसाव की दिक्कत आ रही थी। इसके बाद फ्लैट में एक बड़ी दरार भी दिखाई दी। दीवारों में सीलन आने लगी और किचन तथा हॉल में पेंट उखड़ने लगा। खरीदारों का कहना था कि नया फ्लैट लेने के बाद ऐसी समस्या हर साल दोबारा सामने आ रही थी। उन्होंने पहले WhatsApp के जरिये बिल्डर को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कई बार पानी रिसने की शिकायत की गई। बिल्डर ने हर बार मरम्मत के लिए कॉन्ट्रैक्टर भेजा, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।

घर खरीदारों ने क्या मांग रखी?

फ्लैट मालिकों ने कर्नाटक RERA में शिकायत करते हुए कहा कि पहले की गई मरम्मत अस्थायी थी। उनके मुताबिक, कॉन्ट्रैक्टर ने सीलेंट लगाकर समस्या दूर करने की कोशिश की, लेकिन पानी का असली स्रोत ठीक नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि बिल्डर स्थायी समाधान के लिए Dr. Fixit या Asian Paints जैसी विशेषज्ञ एजेंसी की सेवा ले और मरम्मत के काम पर कम से कम 10 साल की वारंटी दे। दूसरी तरफ बिल्डर ने कहा कि जब भी शिकायत मिली, उसने पेशेवर वॉटरप्रूफिंग कॉन्ट्रैक्टर को भेजकर मरम्मत कराई। बिल्डर ने यह भी बताया कि हाल की मरम्मत पर उसने 74,623 रुपये खर्च किए हैं। इसके समर्थन में उसने काम की तस्वीरें और टैक्स इनवॉयस भी RERA के सामने पेश किए।

RERA ने क्या कहा?

Karnataka RERA ने साफ किया कि छत से पानी का रिसाव, दीवारों में सीलन, दरार और पेंट का उखड़ना महज सामान्य टूट-फूट नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब ये समस्याएं निर्माण की गुणवत्ता या काम में कमी से जुड़ी हों। बेंच ने कहा कि ऐसे दोष RERA Act की Section 14(3) के दायरे में आते हैं। इस प्रावधान के तहत कब्जा मिलने की तारीख से 5 साल के भीतर अगर कोई स्ट्रक्चरल डिफेक्ट या काम की गुणवत्ता, निर्माण या सर्विस से जुड़ी कमी बिल्डर के सामने लाई जाती है, तो उसे बिना अतिरिक्त शुल्क के 30 दिनों के भीतर ठीक करना उसकी जिम्मेदारी है। इस मामले में खरीदारों ने कब्जा मिलने के कुछ ही महीनों के भीतर अक्टूबर 2022 में शिकायत कर दी थी। यानी 5 साल की तय अवधि के भीतर ही कमी बिल्डर के संज्ञान में आ गई थी।

बारिश बताएगी कि मरम्मत हुई या नहीं

Karnataka RERA ने एक व्यावहारिक बात भी कही। वॉटरप्रूफिंग के काम की असली परीक्षा बारिश के दौरान ही हो सकती है। इसलिए बेंच ने कहा कि बिल्डर की तरफ से हाल में कराए गए काम को बारिश के दौरान परखा जाना चाहिए। अगर पानी का रिसाव फिर से शुरू होता है या मरम्मत प्रभावी साबित नहीं होती, तो फ्लैट मालिक इस मामले को दोबारा RERA के सामने खोल सकते हैं। इसके साथ ही बिल्डर को फ्लैट के उन हिस्सों को भी ठीक करना होगा, जिन्हें पानी के कारण नुकसान हुआ है। इसमें सीलन, दरार, प्लास्टर का नुकसान और उखड़ा हुआ पेंट शामिल है। यह पूरा काम बिल्डर को अपने खर्च पर करना होगा।

फ्लैट मालिक को क्या अधिकार?

RERA Act की Section 14(3) बिल्डर पर स्पष्ट जिम्मेदारी डालती है। कब्जा मिलने के 5 साल के भीतर सामने आए स्ट्रक्चरल, काम की गुणवत्ता या सर्विस से जुड़े दोष को बिल्डर को बिना अतिरिक्त शुल्क के ठीक करना होता है। अगर बिल्डर को शिकायत मिलने के 30 दिनों के भीतर दोष ठीक नहीं किया जाता, तो प्रभावित खरीदार RERA के सामने उचित मुआवजे की मांग कर सकता है। यानी मामला सिर्फ मरम्मत कराने तक सीमित नहीं है; परिस्थितियों के आधार पर मरम्मत की लागत की भरपाई का दावा भी किया जा सकता है।

RWA और बिल्डर की जिम्मेदारी अलग

इस मामले में बिल्डर ने यह भी कहा था कि सोसायटी का रोजाना का रखरखाव और मैनेजमेंट RWA देखता है और शिकायत RWA के मेंटेनेंस ऑफिस में भी की गई थी। लेकिन Section 14(3) की जिम्मेदारी के संदर्भ में बिल्डर और RWA की स्थिति एक जैसी नहीं है। RERA Act के तहत स्ट्रक्चरल, निर्माण या काम की गुणवत्ता से जुड़े ऐसे दोषों की सीधी वैधानिक जिम्मेदारी बिल्डर पर डाली गई है; RWA पर उसी तरह की जिम्मेदारी नहीं है।

इस फैसले से घर खरीदार क्या समझें?

इस आदेश का सबसे बड़ा संदेश यह है कि नए फ्लैट में बार-बार होने वाली सीलन या पानी की समस्या को सिर्फ मेंटेनेंस या छोटी-मोटी परेशानी के तौर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर समस्या निर्माण की गुणवत्ता, वॉटरप्रूफिंग या बिल्डर के काम में कमी से जुड़ी है और तय 5 साल की अवधि में बिल्डर को इसे ठीक कराना होगा।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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