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FASTag अब मोबाइल नंबर की तरह होगा PORT, बैंक बदलने के लिए नहीं लेना पड़ेगा नया टैग

भारत की टोल व्यवस्था अब सिर्फ ‘रुककर भुगतान’ करने वाले सिस्टम से आगे बढ़कर ‘Free-Flow Mobility’ की तरफ बढ़ रही है। FASTag PORT, One Tag, AI और बैरियर-फ्री टोलिंग जैसी सुविधाओं से आने वाले समय में हाईवे पर सफर पहले के मुकाबले ज्यादा आसान और तेज होने की उम्मीद है।

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FASTag PORT करने पर नहीं बदलेगा टैग

Photo : iStock

FASTag यूजर्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब अगर आप अपने FASTag जारी करने वाले बैंक की सर्विस से परेशान हैं या किसी दूसरे बैंक की सुविधा लेना चाहते हैं, तो आपको नया FASTag खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकार FASTag को मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तर्ज पर एक बैंक से दूसरे बैंक में PORT करने की सुविधा शुरू करने की तैयारी कर रही है। यानी वाहन पर लगा FASTag वही रहेगा, लेकिन उसका Issuer Bank बदला जा सकेगा।

FASTag PORT करने पर नहीं बदलेगा टैग

नई व्यवस्था के तहत FASTag यूजर को बैंक बदलने के लिए पुराने FASTag को वाहन से हटाने की जरूरत नहीं होगी। मौजूदा टैग को ही दूसरे बैंक के साथ जोड़ा जा सकेगा। इसका मतलब है कि मोबाइल नंबर पोर्ट करने की तरह FASTag भी PORT होगा और ग्राहक अपनी पसंद का नया बैंक या FASTag Issuer चुन सकेगा।

अभी अगर कोई ग्राहक FASTag जारी करने वाले बैंक की सेवा से संतुष्ट नहीं है और बैंक बदलना चाहता है, तो उसे नया FASTag लेना पड़ता है। इसके बाद पुराने टैग को वाहन से हटाकर नए टैग को लगाना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

Rajmarg Yatra App से मिलेगी PORT की सुविधा

FASTag को एक बैंक से दूसरे बैंक में PORT करने की सुविधा Rajmarg Yatra App के जरिए उपलब्ध कराई जा सकती है। यानी ग्राहक ऐप के माध्यम से अपने FASTag का Issuer Bank बदल सकेगा। इससे बैंक बदलने की प्रक्रिया ज्यादा आसान और डिजिटल हो जाएगी। इस सुविधा को ‘One Tag’ के नाम से पेश किया जा रहा है। इसका मकसद FASTag यूजर्स को बैंक बदलने के लिए नया टैग खरीदने और पुराने टैग को हटाने की परेशानी से बचाना है।

नितिन गडकरी ने बताया One Tag का प्लान

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने Global Fintech Fest 2026 में FASTag से जुड़ी इस नई सुविधा की जानकारी दी। ‘One Tag’ का उद्देश्य FASTag सिस्टम को और ज्यादा सुविधाजनक बनाना है, ताकि ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से FASTag बैंक बदल सकें और उन्हें हर बार नया टैग लेने की जरूरत न पड़े। सीधे शब्दों में समझें तो FASTag वही रहेगा, बैंक बदल जाएगा। यह व्यवस्था मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह काम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

देश में 13 करोड़ FASTag जारी

भारत में FASTag के जरिए डिजिटल टोल कलेक्शन तेजी से बढ़ा है। सरकार के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्गों पर करीब 98 प्रतिशत टोल कलेक्शन डिजिटल तरीके से FASTag के जरिए हो रहा है। देश में अब तक करीब 13 करोड़ FASTag जारी किए जा चुके हैं। इतने बड़े यूजर बेस को देखते हुए FASTag से जुड़ी सेवाओं को ज्यादा आसान और सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। One Tag सुविधा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकती है।

टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत भी होगी कम

सरकार सिर्फ FASTag PORT की सुविधा तक सीमित नहीं रहना चाहती। आने वाले समय में टोल कलेक्शन को AI, Barrier-Free Tolling और Free-Flow Mobility जैसी तकनीकों से और बेहतर बनाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने की जरूरत को कम करना है।

यानी भविष्य में टोल प्लाजा पर गाड़ी रोककर भुगतान करने के बजाय वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकेंगे। AI और नई तकनीक की मदद से टोल पहचान और भुगतान की प्रक्रिया को ज्यादा तेज और ऑटोमेटेड बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

FASTag सिस्टम में होने वाले बड़े बदलाव

नई व्यवस्था के बाद FASTag यूजर्स को बैंक बदलने के लिए नया टैग खरीदने की जरूरत नहीं होगी। वाहन पर लगा मौजूदा टैग ही इस्तेमाल किया जा सकेगा और ग्राहक अपनी पसंद के FASTag बैंक या Issuer को चुन सकेगा। इसके साथ ही Annual Pass से टोल भुगतान को आसान बनाने और Barrier-Free Tolling के जरिए टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत घटाने पर भी काम किया जा रहा है।

bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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