दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने एटीएम से नकदी निकासी से जुड़े एक मामले में पंजाब एंड सिंध बैंक को ग्राहक के पक्ष में बड़ा भुगतान करने का निर्देश दिया है। मामला ऐसा था, जिसमें ग्राहक के खाते से 10,000 रुपये कट गए, लेकिन एटीएम से नकदी बाहर नहीं आई। आयोग ने बैंक को न केवल 10,000 रुपये वापस करने का आदेश दिया, बल्कि मानसिक तनाव और सेवा में खामी के लिए अलग से मुआवजा भी देने को कहा है। कुल मिलाकर ग्राहक को 49,600 रुपये का भुगतान करना होगा।
खाते से कटे 10 हजार, ATM से नहीं निकले पैसे
PTI/भाषा के मुताबिक मामला जितेंद्र सिंह की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि 5 दिसंबर 2022 को उन्होंने गाजियाबाद स्थित एक्सिस बैंक के एटीएम से 10,000 रुपये निकालने की कोशिश की थी। लेनदेन पूरा होने का संदेश उनके मोबाइल पर आया और पंजाब एंड सिंध बैंक के खाते से 10,000 रुपये कट भी गए, लेकिन एटीएम से नकदी नहीं निकली। इसके बाद ग्राहक ने बैंक में शिकायत दर्ज कराई और अपने खाते से कटी रकम वापस मांगी। हालांकि, मामला लंबे समय तक सुलझ नहीं सका।
बैंक ने दूसरे बैंक पर डाल दी जिम्मेदारी
पंजाब एंड सिंध बैंक ने आयोग के सामने बताया कि ग्राहक की शिकायत दर्ज करने के बाद उसे एक्सिस बैंक के पास भेजा गया था। एक्सिस बैंक ने लेनदेन को सफल बताते हुए शिकायत खारिज कर दी। इसके बाद मामला एटीएम सेल और मध्यस्थता प्रक्रिया के पास भेजा गया, जहां भी इसे खारिज कर दिया गया।
हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक को बैंकों के बीच चल रहे विवाद का नुकसान नहीं उठाना चाहिए। अगर लेनदेन में देरी के लिए दूसरा बैंक जिम्मेदार है, तो जारीकर्ता बैंक आपसी व्यवस्था के तहत उससे रकम या मुआवजा वसूल सकता है।
बैंक की सेवा में खामी मानते हुए दिया बड़ा मुआवजा
आयोग के अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य रश्मि बंसल की पीठ ने 27 अगस्त को दिए आदेश में कहा कि निर्धारित समय के भीतर असफल लेनदेन की राशि वापस नहीं करना सेवा में खामी है। आयोग ने माना कि ग्राहक को अपने ही पैसे का इस्तेमाल करने से वंचित रहना पड़ा और उसे बार-बार बैंक के चक्कर लगाने, लिखित शिकायतें देने और अंत में आयोग का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
आयोग ने पंजाब एंड सिंध बैंक को ग्राहक के खाते से काटे गए 10,000 रुपये वापस करने के अलावा 29,600 रुपये का मुआवजा, मानसिक तनाव और उत्पीड़न के लिए 10,000 रुपये तथा मुकदमे के खर्च के तौर पर 10,000 रुपये देने का निर्देश दिया है।
45 दिन में करना होगा भुगतान
आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह निर्धारित कुल राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर करे। अगर बैंक तय समयसीमा में भुगतान नहीं करता है, तो बकाया राशि पर चूक की तारीख से वास्तविक भुगतान होने तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
इस मामले से यह साफ होता है कि एटीएम ट्रांजैक्शन में खाते से पैसे कट जाने लेकिन नकदी नहीं निकलने की स्थिति में ग्राहक को बैंकों के बीच के विवाद का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। बैंकिंग व्यवस्था के स्तर पर समस्या होने पर उसका समाधान बैंकों को आपस में करना होगा, जबकि ग्राहक के पैसे की वापसी की जिम्मेदारी बनी रहती है।
