वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 7.8% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की। इस रफ्तार के साथ भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मजबूत GDP आंकड़ों का जश्न शेयर बाजार में देखने को नहीं मिला। इसके उलट, बाजार में बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है।
पिछले पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 2,000 अंक टूट चुका है, जबकि निफ्टी भी अहम सपोर्ट स्तर को तोड़कर 23,400 के नीचे कारोबार कर रहा है। हफ्ते के आखिरी दिन आज बाजार में बड़ी गिरावट है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब देश की अर्थव्यवस्था इतनी तेज रफ्तार से बढ़ रही है, तो शेयर बाजार क्यों गिर रहा है? आखिर GDP के मजबूत आंकड़े बाजार की गिरावट को क्यों नहीं रोक पाए? आइए, इस पूरी पहेली को आसान भाषा में समझते हैं।
शेयर बाजार को नीचे खींच रहे ये 7 बड़े विलेन
1. SEBI-रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने बताया कि मजबूत जीडीपी के बावजदू भारतीय बाजार में गिरावट जारी है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल में आग है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध से ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बुरी खबर है। भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। कच्चे तेल में उछाल से भारत का आयात बिल बढ़ने की आशंका है। महंगे ईंधन से पहले ही महंगाई आसमान पर है। महंगाई और बढ़ने की आशंका है। इससे बाजार में यह गिरावट है। अनुज गुप्ता के अनुसार, आने वाले दिनों में Nifty50 22,800 तक टूट सकता है।
2. बॉन्ड यील्ड में उछाल: दुनिया भर के निवेशक जोखिम से सुरक्षित और बेहतर रिटर्न की तलाश में रहते हैं। जैसे-जैसे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ रही है, विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों को बेचकर अपना पैसा सुरक्षित और अधिक ब्याज देने वाले अमेरिकी सरकारी एसेट्स में लगा रहे हैं। जापान में लॉन्ग टर्म बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने भी निवेशकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है।
3. AI बूम: सरकारें और कंपनियां (AI बूम के कारण) पूंजी (Capital) जुटाने के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। इससे दुनिया भर में उधार लेने की लागत (Borrowing Costs) बढ़ रही है। इसका बुरा असर भारतीय बाजार पर हो रहा है। इसके चलते बाजार में गिरावट है।
4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: ईरान युद्ध शुरू होने से भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों ने फिर बिकवाली शुरू कर दी है। लगातार दो महीनों तक भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने के बाद, सितंबर के पहले हफ्ते में विदेशी निवेशक नेट सेलर बन गए। उन्होंने ₹7,443 करोड़ निकाले, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों का रुझान बदल गया है।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के डेटा से पता चलता है कि यह निकासी तब हुई जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त में ₹29,600 करोड़ से ज़्यादा और जुलाई में ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था।
5. रुपया का टूटना: आरबीआई की कोशिश के बाद रुपये में गिरावट थमी थी लेकिन एक बार फिर से डॉलर के सामने रुपया टूट रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी के कारण रुपया शुक्रवार को 27 पैसे टूटकर 95.79 प्रति डॉलर पर आ गया। इससे भी विदेशी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है, जो बाजार को नीचे धकेलने का काम कर रहा है।
6. IPO मार्केट में तेजी: शेयर बाजार में गिरावट की एक और वजह आईपीओ मार्केट में जबरदस्त हलचलत है। इन दिनों लगातार एक के बाद IPO ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भारी ओवरसब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग पर मिलने वाले अच्छे मुनाफे ने लाखों निवेशकों को IPO बाजार की तरफ़ आकर्षित किया है। इस वजह से सेकेंडरी मार्केट से बड़ी मात्रा में पैसा निकलकर IPO बाजार में जा रहा है। यह बाजार को तोड़ने का काम कर रहा है।
7. फेड की ब्याज दरों में बढ़ोतरी: इसके अलावा, ज्यादातर जानकारों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 16 सितंबर को ब्याज दरें बढ़ा सकता है। यह उम्मीद इसलिए है कि अगस्त में प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) में 0.4% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि जुलाई के आंकड़ों में भी संशोधन के बाद 0.1% की बढ़त दर्ज की गई थी। यह भी भारतीय बाजार के लिए बुरी खबर है।
बाजार में क्यों मचा है कोहराम?
दुनिया के बाजारों में भारतीय मार्केट का सबसे खराब प्रदर्शन
| शेयर बाजार / इंडेक्स | देश | 2026 YTD प्रदर्शन |
|---|
| KOSPI | दक्षिण कोरिया | +65% |
| TAIEX | ताइवान | +64% |
| Nikkei 225 | जापान | +31% |
| Nasdaq | अमेरिका | +14% |
| S&P 500 | अमेरिका | +13% |
| Dow Jones | अमेरिका | +11% |
| FTSE 100 | ब्रिटेन | +10% |
| DAX | जर्मनी | +9% |
| Shanghai Composite | चीन | +1% |
| Hang Seng | हांगकांग | -1% |
| Nifty 50 | भारत | -10% |
शेयर बाजार के लिए GDP ग्रोथ का क्या मतलब है?
जानकारों का कहना है कि आमतौर पर, शेयर बाजार देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा होता है। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही के दौरान भारत की GDP का प्रदर्शन अच्छा रहा, जैसा कि Q1 2026 के नतीजों से पता चलता है। बाजार को अगली तिमाही में भी ऐसे ही नतीजों की उम्मीद है, इसलिए, उम्मीद है कि Q2 2026 के नतीजे के बाद बाजार में तेजी लौटेगी।
निवेशकों हैं तो क्या करें?
शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट यह बताती है कि मजबूत GDP ही शेयर बाजार को ऊपर नहीं ले जा सकती। बाजार की चाल पर महंगाई, ब्याज दर, रुपये, क्रूड, विदेशी निवेश और कंपनियों की कमाई का भी असर होता है। इसलिए मौजूदा दौर में घबराकर हर शेयर बेचने के बजाय निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपने निवेश की अवधि पर ध्यान देना चाहिए।
