Valley of Flowers Opening Dates 2025 in Uttarakhand (फूलों की घाटी कब खुलेगी 2025 में): परियों का देश कितना सुंदर होता होगा - इसकी झलक आप देवभूमि उत्तराखंड में देख सकते हैं। उत्तराखंड में एक बेहद खूबसूरत जगह है जहां प्रकृति प्रेमी ट्रेक के जरिए पहुंचते हैं। इसका नाम है फूलों की घाटी। यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की लिस्ट में शामिल ये जगह दरअसल नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व का हिस्सा है। जानें 2025 में फूलों की घाटी कब से खुलेगी और यहां कैसे पहुंचा जा सकता है।
फूलों की घाटी कब खुलेगी 2025
फूलों की घाटी हर साल 1 जून को खुलती है और फिर 30 अक्टूबर को बंद होती है। इस साल भी फूलों की घाटी के खुलने की तारीख एक जून ही है।
फूलों की घाटी कहां स्थित है
फूलों की घाटी देखने के लिए आपको उत्तराखंड के चमोली जिले में पहुंचना होगा जो लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां का आकर्षण एक खूबसूरत घाटी में खिले रंग-बिरंगे फूल हैं जिनको देखने के लिए प्रकृति प्रेमी दूर दूर से पहुंचते हैं। आप यहां से हिमालय की गौरी पर्वत, रताबन और कुंथ खाल जैसी चोटियों का दीदार कर सकते हैं।

फूलों की घाटी में दुर्लभ फूल खिलते हैं
फूलों की घाटी में कौन सी नदी निकलती है
फूलों की घाटी से पुष्पावती नदी बहती है जो आगे घांघरिया में लक्ष्मण गंगा से मिल जाती है। जब आप घांघरिया से आगे बढ़ेंगे तो इसी नदी के किनारे ट्रेक करते हुए फूलों की घाटी पहुंचेंगे।
फूलों की घाटी जानें का बेस्ट टाइम क्या है
फूलों की घाटी एक परियों के देश जितनी खूबसूरत है। हिमालय की खूबसूरत चोटियों और झरनों का अलौलिक दीदार करना हो तो जुलाई से सितंबर के बीच यहां जाने का प्लान बनाएं। हालांकि मॉनसून सीजन होने की वजह से ट्रेक उतना आसान नहीं होता, इसलिए आने वालों को पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
फूलों की घाटी का ट्रेक कितना लंबा है
फूलों की घाटी की यात्रा गोविंदघाट से शुरू होती है। यह एक छोटा गांव है जहां हरिद्वार या ऋषिकेश से सड़क मार्ग से आप आराम से पहुंच सकते हैं। इसके बाद गोविंदघाट से घांघरिया गांव के बीच करीब 13 किलोमीटर की चढ़ाई करनी होगी। ट्रेक के अगले चरण में घांघरिया से फूलों की घाटी तक 4 किलोमीटर की चढ़ाई शामिल है। यानी आपको करीब 16-17 किलोमीटर लंबा ट्रेक यहां पहुंचने के लिए चढ़ना होगा। वैसे घांघरिया से 6 किलोमीटर आगे सिख तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब भी है। आप चाहें तो ट्रेक करके वहां भी जा सकते हैं।

फूलों की घाटी का ट्रेक थोड़ा कठिन माना जाता है
फूलों की घाटी का ट्रेक पूरा करने में कितना समय लगता है
- फूलों की घाटी का ट्रेक अगर आप गोविंद घाट से शुरू करते हैं तो वापस यहीं आने पर आपको 3 दिन का समय लगेगा।
- हरिद्वार से आप अपनी यात्रा शुरू करेंगे तो वापस हरिद्वार पहुंचने में आपको 5 दिन लगेंगे।
Phoolon Ki Ghati Trek Route Details
- हरिद्वार या ऋषिकेश से जोशीमठ में गोविंदघाट तक सड़क मार्ग से आपको 255 किमी की यात्रा करनी होगी। आप देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग से जोशीमठ होते हुए गोविंदघाट पहुंचेंगे। इसमें 8–10 घंटे का समय लगेगा।
- अगला पड़ाव गोविंदघाट से पुलना तक पहुंचना है। यहां आपको स्थानीय वाहन मिलेगा और पहुंचने में 15–20 मिनट का टाइम लगेगा।
- पुलना से घांघरिया का 9 किमी का ट्रेक असली चैलेंज है। इसे पूरा करने में आपको 4–5 घंटे लगेंगे। हालांकि यहां आपको छोटे होटल मिलेंगे। वहीं कुली और खच्चर की सुविधा भी है। यह रास्ता पुष्पावती नदी के किनारे है और आप पत्थर के पक्के रास्ते से होते हुए जाते हैं।
- घांघरिया से फूलों की घाटी तक का 4 किमी का है। आना जाना मिलाकर आपको 7-8 घंटे का समय लगेगा।
फूलों की घाटी प्रवेश शुल्क और समय
- फूलों की घाटी में प्रवेश का समय सुबह 7:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक का है। फूलों की घाटी सुबह 7 बजे खुलती है।
- फूलों की घाटी का बंद होने का समय शाम 5:00 बजे तक घाटी से वापस आना ही होता है। इसके बाद यहां ठहरने नहीं दिया जाता है। ये भी नोट करें कि यहां रात रुकने की परमिशन नहीं है।
- फूलों की घाटी में प्रवेश शुल्क भारतीय नागरिकों के लिए 150 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 600 रुपये है। एक बार फीस पर भरने पर यह तीन दिन के लिए वैध रहती है।
फूलों की घाटी में कहां ठहर सकते हैं
फूलों की घाटी में पर्यटकों और ट्रेकर्स को रात में रुकने की परमिशन नहीं है। रात्रि व्यवस्था आपको घांघरिया में मिलेगी।
फूलों की घाटी जाने के लिए कुछ सुझाव
- यह ट्रेक मध्यम कठिनाई वाला है तो इसके लिए आप मानसिक तौर पर तैयार होकर जाएं।
- मॉनसून में रास्ते में फिसलन हो सकती है इसलिए जूते और कपड़े इस लिहाज से पहनें।
- ऊंचाई पर ऑक्सिजन की कमी की वजह से थोड़ी परेशानी हो सकती है। थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें।
फूलों की घाटी क्यों खास है
फूलों की घाटी पश्चिमी हिमालय में स्थित है। पर्यटकों के बीच यह अपनी असाधारण जैव विविधता और विविध तरह के फूलों के लिए प्रसिद्ध है। इस घाटी में जाने पर आपको 600 से अधिक प्रजातियों के फूल देखने को मिलते हैं। इनमें हिमालयन ऑर्किड, ब्रह्म कमल, ब्लू पॉपी, कोबरा लिली आदि खास हैं। यहां आप कुछ दुर्लभ वन्य जीवों को भी स्पॉट कर सकते हैं जिनमें स्नो लेपर्ड, कस्तूरी मृग, काला भालू, लाल लोमड़ी आदि शामिल हैं।
