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घूम आएं 200 साल से ज्यादा पुराने इस हिल स्टेशन, एक समय भारतीयों की यहां एंट्री थी बैन

Uttarakhand Tourism Places: भारत में लगभग हर हिल स्टेशन बेहद प्राचीन और अपने में कई कहानी समेटे हुए है। यात्रा के दौरान अगर आपको घूमने वाली जगह का इतिहास पता हो तो घूमने-फिरने का मजा दोगुना हो जाता है। भारत के प्रचीन हिल स्टेशन मसूरी तो आप कई बार गए होंगे लेकिन, इसके बारे में बहुत कुछ है जिससे शायद आप अनजान हों।

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Uttarakhand hill station

Uttarakhand Hill Station: भारत में हिल स्टेशन की भरमार है। इस बार आप मसूरी जिसे पहाड़ों की रानी कहा जाता है उस हिल स्टेशन की यात्रा का प्लान कर सकते हैं जिसकी कहानी अलग और अनूठी है। प्राकृतिक सुंदरता के लिए तो मसूरी फेमस है ही इसके साथ ही इसका ऐतिहासिक महत्व भी बेहद प्राचीन है। शायद ही आपको इस बारे में जानकारी हो कि मसूरी को अंग्रेजों ने 1823 में बसाया था।

अंग्रेजों ने 1820 में मसूरी में जमीन खरीदी और इसे हिल स्टेशन के रूप में डेवलप किया था। गौर करने वाली बात ये थी कि उन्होंने यहां भारतीय लोगों के प्रवेश पर ही पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। भारतीय लोग मसूरी में प्रवेश ना कर सकें इसके लिए उस वक्त वहां मॉल रोड पर 'इंडियंस एंड डॉग्स नॉट अलाउड' जैसे शब्द लिखे गए थे।

केम्प्टी फॉल्स, गन हिल, मसूरी झील, लाल टिब्बा, कैमल्स बैक रोड मसूरी के प्रमुख आकर्षण हैं। गर्मियों में मसूरी का मौसम बहुत सुहावना होता है। अप्रैल से जून के बीच आप यहां पर ट्रैवल के लिए जा सकते हैं।

बर्फबारी का आनंद लेने के लिए आप नवंबर से फरवरी माह के बीच यहां जा सकते हैं। अगर आप मसूरी की यात्रा की योजना बना रहे हैं तो मौसम की जानकारी यात्रा मार्ग ठहरने के स्थान के बारे में पहले से ही जान लें। देहरादून इसके निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो मसूरी से लगभग 35 किमी दूर है।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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