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Solo Trip: हिमालय के लिए जादुई होता है जून का महीना, सोलो ट्रिप का बना सकते हैं प्लान

Solo Trip Destination: 1 जून से यहां ट्रैकिंग सीजन शुरू हो रहा है जहां आप सोलो ट्रिप पर जाने का प्लान कर सकते हैं। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल ये जगह प्रकृति के बीच 2 पल शांति और सुकून से बिताने के लिए एकदम परफेक्ट है। परिवार के साथ भी आप ट्रिप पर जाने का प्लान कर सकते हैं।

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Solo Trip

Solo Trip Destination: जून का महीना हिमालय के लिए हमेशा से ही नया जादू लेकर आता है। गर्मी के महीनों में यहां बर्फ पिघलती है, पहाड़ लंबी सर्दियों की नींद से जागता है और फूलों की घाटी रंगों से जीवंत हो उठती है। ऐसे में अगर आप सोलो ट्रिप का प्लान कर रहे हैं तो फिर आपको ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रैंक स्माइथ का अब शुक्रिया कर ही देना चाहिए। फ्रैंक स्माइथ ने 1931 में वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क की खोज की थी जो अब पर्यटकों खासकर सोलो ट्रैवलर्स के लिए शानदार लोकेशन बन चुकी है।

वैली ऑफ फ्लावर अपने दुर्लभ और रंगीन अल्पाइन फूलों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में भी इसे शामिल किया गया है। उत्तराखंड में यह लुभावनी ट्रेक 1 जून से पर्यटकों के लिए खुलती है, जो आपको दुर्लभ फूलों, कलकल करती नदियों और बर्फ से ढकी चोटियों से भरे परिदृश्य से गुजरने का मौका देती है।

वैली ऑफ फ्लावर के लिए बेस कैंप पूलना या पीपलकोटी में स्थित है। आप गोविंदघाट से भी यहां पहुंच सकते हैं और वहां कैंप लगाकर चिलआउट कर सकते हैं। पूलना/गोविंदघाट से आपको घांघरिया तक जाना होगा, जिसे गोबिंद धाम भी कहा जाता है। यहां से वैली ऑफ फ्लावर एक तरफ से लगभग 4 किलोमीटर दूर है।

वैली ऑफ फ्लावर में रात भर रुकने या कैंपिंग करने की अनुमति नहीं है ऐसे में आपको शाम 5 बजे तक घांघरिया वापस आना होगा। घांघरिया से एक रास्ता आपको हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा तक भी ले जाता है। यहां यात्रा करने का सबसे अच्छा समय जुलाई और सितंबर के बीच है। अगस्त आदर्श समय है क्योंकि मानसून के ठीक बाद अधिकतम फूल खिलते हैं। इसके निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जहां से आप गोविंदघाट के लिए बस या टैक्सी ले सकते हैं।

prabhat sharma
प्रभात शर्माauthor

प्रभात शर्मा टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के फीचर डेस्क में कार्यरत ट्रैवल और लाइफस्टाइल राइटर हैं। यात्राओं के प्रति उनका गहरा जुनून और नई जगहों को समझने–परखने की क्षमता उनकी लेखन शैली को बेहद जीवंत और पाठकों से जोड़ने वाली बनाती है। वे ऑफबीट डेस्टिनेशन, लोकल कल्चर, हेरिटेज साइट्स, रोड ट्रिप्स, फूड जर्नी और बजट ट्रैवल जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। प्रभात की स्टोरीज़ सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि यात्रा के माहौल, भाव और अनुभव को भी महसूस कराती हैं। अब तक 7,000 से अधिक कंटेंट लिख चुके प्रभात अपनी सहज भाषा, प्रामाणिक जानकारी और अनुभव-आधारित दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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