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खारदुंगला पास, रोहतांग पास... आखिर पहाड़ों के नाम के आखिर में 'पास' क्यों लिखा होता है?

खारदुंगला, रोहतांग या नाथू ला जैसे नामों में आने वाले 'पास' का मतलब काफी दिलचस्प है। इसका संबंध पास या फेल वाले पास से नहीं है, बल्कि पास पहाड़ों के बीच बने प्राकृतिक दर्रे को कहते हैं।

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Why is the word 'pass' added to Khardungla rohtang pass

घूमने फिरने के शौकीन हैं और अगर आपने कभी लद्दाख या हिमाचल की यात्रा की हो, तो खारदुंगला पास, रोहतांग पास, नाथू ला पास या जोजिला पास आदि जैसे नाम जरूर सुने होंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि इन सभी जगहों के नाम के आखिर में 'पास' क्यों लिखा होता है? ये पास और फेल वाला पास है, नाम का हिस्सा है या इसके पीछे कोई खास वजह छिपी है?

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दिलचस्प बात यह है कि पहाड़ों में 'पास' किसी पर्यटन स्थल का नाम नहीं, बल्कि एक खास तरह के प्राकृतिक रास्ते को कहा जाता है। यानी जहां एक पहाड़ से दूसरे पहाड़ या एक घाटी से दूसरी घाटी तक पहुंचने का रास्ता बनता है, उसे 'पास' कहा जाता है। ट्रेवल लवर हैं और आसान भाषा में ट्रेवल से जुड़ी यूनीक चीजें समझने का शौक रखते हैं, तो जानिए आखिर माउंटेन पास क्या होता है, यह क्यों जरूरी है और भारत के मशहूर पास इतने खास क्यों माने जाते हैं।

सबसे पहले समझिए 'पास' का आसान मतलब

अगर दो ऊंचे पहाड़ आपके सामने खड़े हों और उनके बीच से निकलने का एक रास्ता हो, तो उसी रास्ते को पास कहा जाता है। इसे ऐसे समझिए जैसे शहर में दो कॉलोनियों को जोड़ने के लिए सड़क होती है। ठीक वैसे ही पहाड़ों के बीच बना प्राकृतिक रास्ता एक इलाके को दूसरे इलाके से जोड़ता है।

इसे सिर्फ सड़क मत समझिए

बहुत से लोग सोचते हैं कि जहां सड़क बनी है, वहीं पास है। जबकि सच यह है कि पहले वहां प्राकृतिक रास्ता था। बाद में लोगों के आने जाने को आसान बनाने के लिए सड़क बनाई गई। यानी सड़क इंसान ने बनाई, लेकिन रास्ता प्रकृति ने।

रोहतांग पास क्यों है इतना मशहूर?

रोहतांग पास हिमाचल प्रदेश में स्थित एक ऊंचा पहाड़ी दर्रा है। यह कुल्लू घाटी को लाहौल-स्पीति क्षेत्र से जोड़ता है। वहीं लद्दाख का खारदुंगला पास दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ऊंचे मोटरेबल माउंटेन पास में गिना जाता है। यह लेह को नुब्रा घाटी से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। नाथू ला पास, जोजिला पास यही कुछ नाम हैं, जिनकी वजह से पास शब्द और भी ज्यादा पॉपुलर हो गया है।

व्यापार होता था

आज लोग इन जगहों पर घूमने जाते हैं, लेकिन पहले इनका महत्व बिल्कुल अलग था। इन्हीं रास्तों से लोग व्यापार करते थे, गांवों के बीच आना-जाना होता था और जरूरत का सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचता था। आज भी कई पास रणनीतिक और परिवहन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
Natu La Pass

Natu La Pass

'ला' और 'पास' में क्या संबंध है?

अगर आपने ध्यान दिया हो तो खारदुंगला, नाथू ला जैसे नामों में 'ला' शब्द भी आता है। तिब्बती भाषा में 'ला' का अर्थ भी पहाड़ी दर्रा या पास होता है। इसलिए कई जगह लोग खारदुंगला पास या नाथू ला पास कहते हैं। बोलचाल में यह प्रचलित है, हालांकि भाषाई दृष्टि से 'ला' में ही दर्रे का अर्थ शामिल होता है।

अगली बार आपको जब भी किसी बोर्ड पर "...पास" लिखा दिखाई दे, तो समझ जाइए कि आप किसी साधारण सड़क पर नहीं, बल्कि दो पहाड़ों या दो घाटियों को जोड़ने वाले प्राकृतिक दर्रे से गुजर रहे हैं। यह सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि प्रकृति की बनाई वह कड़ी है जिसने सदियों से लोगों, संस्कृतियों और इलाकों को जोड़े रखा है।

Avni Bagrola
अवनी बागरोलाauthor

अवनी बागरोला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के लाइफस्टाइल सेक्शन में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। फैशन, ब्यूटी, ट्रेंड्स, पर्सनल स्टाइलिंग और आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कंटेंट पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें युवा और स्टाइल-सेवी ऑडियंस के बीच खास पहचान दिलाती है। अवनी की लेखन शैली सरल, ट्रेंडी और यूज़र-फ्रेंडली है, जो पाठकों को तेजी से बदलते फैशन व लाइफस्टाइल ट्रेंड्स को समझने में मदद करती है। अब तक 2,500 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुकी अवनी क्रिएटिव अप्रोच, अपडेटेड नॉलेज और रियल-टाइम ट्रेंड सेंस के लिए जानी जाती हैं।

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