Jyotirlinga Yatra Travel Plan: भारत की आध्यात्मिक धरोहर में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। यही कारण है कि हर साल लाखों श्रद्धालु इन पवित्र धामों की यात्रा पर निकलते हैं। यदि आप भी एक ही यात्रा में सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो आपको यह कंप्लीट ट्रैवल प्लान एक बार जरूर जान लेना चाहिए। आइए जानते हैं ज्योतिर्लिंग यात्रा (Jyotirlinga Yatra) का पूरा प्लान...
कहां से करें यात्रा की शुरुआत
ज्योतिर्लिंग यात्रा का सबसे सुविधाजनक सफर गुजरात से शुरू होता है। आप सबसे पहले सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करें, जो गुजरात में अरब सागर के किनारे स्थित है। यहां से लगभग 230 किलोमीटर दूर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग है, जो द्वारका के निकट स्थित है। इन दोनों मंदिरों के दर्शन के बाद आप महाराष्ट्र पहुंचें जहां आपको एक ही राज्य में सबसे ज्यादा ज्योतिर्लिंगों का दर्शन करने को मिलेगा।
महाराष्ट्र में ज्योतिर्लिंग दर्शन का प्लान
महाराष्ट्र को ज्योतिर्लिंगों की भूमि भी कहा जाता है क्योंकि यहां पांच ज्योतिर्लिंग मौजूद हैं। यहां आप सबसे पहले भीमाशंकर महादेव के दर्शन के लिए जाएं, जो सह्याद्रि की पहाड़ियों के बीच स्थित है। इसके बाद त्र्यंबकेश्वर (नासिक), घृष्णेश्वर (औरंगाबाद), औंढा नागनाथ क्षेत्र के निकट दर्शन मार्ग और फिर परली वैजनाथ के दर्शन किए जा सकते हैं। महाराष्ट्र का यह सर्किट सड़क और रेल मार्ग से आसानी से पूरा किया जा सकता है।
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इसके बाद करें मध्य भारत की यात्रा
इसके बाद आपकी यात्रा मध्य प्रदेश की ओर बढ़नी चाहिए। यहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन) और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (खंडवा) स्थित हैं। महाकाल की प्रसिद्ध भस्म आरती और नर्मदा नदी के बीच स्थित ओंकारेश्वर का प्राकृतिक सौंदर्य श्रद्धालुओं को एक अनोखा अनुभव प्रदान करता है।
उत्तर भारत की ओर यात्रा करें
मध्य भारत से आगे बढ़ते हुए आपको उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन का प्लान बनाना चाहिए। यहां दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए मोक्षदायी माना जाता है। इसके बाद आपको उत्तर भारत यानी उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग पहुंचना चाहिए। यह यात्रा शारीरिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से विशेष मानी जाती है।
ज्योतिर्लिंग यात्रा के अंतिम पड़ाव
इसके बाद झारखंड के बैद्यनाथ धाम (देवघर) के दर्शन करें। फिर दक्षिण भारत की ओर बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश के मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (श्रीशैलम) पहुंचें। यात्रा का अंतिम पड़ाव तमिलनाडु का रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हो सकता है, जहां समुद्र तट, धार्मिक परंपराएं और रामायण काल की कथाएं इस यात्रा को और भी विशेष बना देती हैं।
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कितने दिन में कंप्लीट होगी यात्रा
सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा आराम से करने के लिए लगभग एक महीने का समय लग सकता है। इसलिए अपनी व्यस्था और मौसम के अनुसार यात्रा की योजना बनाएं। इस यात्रा में आमतौर पर सबसे ज्यादा मुश्किल केदारनाथ के दर्शन में होती है, इसलिए पहले से तैयारियां कर लें। इस पूरी यात्रा में रेल, सड़क और हवाई यात्रा का कॉम्बिनेश आपके सफर को ज्यादा सुविधाजनक और किफायती बना सकता है।
